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E20 का डर बदल रहा कार खरीदने का मूड! पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घटी, CNG-EV-हाइब्रिड ने मचाई हलचल

नई दिल्ली | ऑटो डेस्क

भारत के कार बाजार में ईंधन को लेकर ग्राहकों की पसंद तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। जुलाई 2026 के वाहन रिटेल आंकड़ों ने संकेत दिया है कि पेट्रोल कारों का दबदबा अब पहले जैसा नहीं रहा। इसके मुकाबले CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार बढ़ रही है।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन यानी FADA के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में पेट्रोल/एथेनॉल से चलने वाली यात्री कारों की बाजार हिस्सेदारी 41.68% रही, जबकि CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलाकर यह आंकड़ा 40.59% तक पहुंच गया। यानी दोनों के बीच अंतर महज 1.09 प्रतिशत अंक रह गया है।

यह बदलाव ऐसे समय आया है जब देश में E20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं के बीच सवाल और आशंकाएं बनी हुई हैं। हालांकि, FADA ने यह भी स्पष्ट किया है कि डीलरों को E20 से वाहन खराब होने से जुड़ी कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है।

एक साल में पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट

जुलाई 2025 में पेट्रोल से चलने वाली यात्री कारों की हिस्सेदारी करीब 47.6% थी। एक साल बाद जुलाई 2026 में यह घटकर करीब 41.7% रह गई।

यानी लगभग एक साल में पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी में करीब 6 प्रतिशत अंक की कमी आई है। इसके उलट वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की मांग मजबूत हुई है। CNG की हिस्सेदारी करीब 24% तक पहुंच गई, जबकि EV की हिस्सेदारी लगभग 8% रही।

यह बदलाव केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह संकेत देता है कि नई कार खरीदते समय भारतीय ग्राहक अब केवल शुरुआती कीमत नहीं, बल्कि ईंधन खर्च, माइलेज, भविष्य की लागत और वाहन की तकनीक जैसे पहलुओं को भी ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

E20 को लेकर क्यों बढ़ी ग्राहकों की चिंता?

भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना है। लेकिन E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के व्यापक इस्तेमाल के साथ कुछ ग्राहकों ने माइलेज, इंजन की अनुकूलता और पुराने वाहनों पर संभावित असर को लेकर सवाल उठाए हैं।

FADA के वाइस प्रेसिडेंट साई गिरिधर के अनुसार, डीलरों को E20 से जुड़ी औपचारिक वाहन-समस्या की शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, ग्राहकों की ओर से पूछताछ और चिंता जरूर बढ़ी है। उन्होंने उपभोक्ता चिंता के पीछे गलत जानकारी और वाहन निर्माताओं तथा डीलरों की ओर से शुरुआती स्तर पर पर्याप्त तैयारी न होने को भी एक कारण बताया।

इसका सीधा असर कुछ ग्राहकों के खरीद निर्णय पर दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ खरीदार पेट्रोल कार खरीदने का फैसला टाल रहे हैं या CNG, हाइब्रिड और EV जैसे विकल्प तलाश रहे हैं।

CNG सबसे बड़ा विकल्प बनकर उभरा

वैकल्पिक ईंधन वाली कारों में CNG अभी सबसे मजबूत विकल्प दिखाई दे रही है। जुलाई में यात्री वाहनों की बिक्री में CNG की हिस्सेदारी करीब 24% रही।

CNG की लोकप्रियता की बड़ी वजह अपेक्षाकृत कम रनिंग कॉस्ट है। ऐसे ग्राहक जो इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग व्यवस्था को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं, लेकिन पेट्रोल की तुलना में ईंधन खर्च कम रखना चाहते हैं, उनके लिए CNG एक व्यावहारिक विकल्प बनी हुई है।

यही वजह है कि कई कार कंपनियां अपने लोकप्रिय मॉडलों में पेट्रोल के साथ CNG विकल्प भी उपलब्ध करा रही हैं।

EV और हाइब्रिड की पकड़ भी मजबूत

CNG के साथ-साथ इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। जुलाई 2026 में EV की हिस्सेदारी करीब 8% रही, जबकि हाइब्रिड ने भी बाजार में अपनी जगह मजबूत की।

हाइब्रिड कारें उन ग्राहकों के लिए आकर्षक विकल्प बन रही हैं जो पेट्रोल इंजन की लंबी दूरी और आसान ईंधन उपलब्धता के साथ बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी चाहते हैं। वहीं EV खरीदारों को पेट्रोल की कीमतों और नियमित रनिंग खर्च से राहत का विकल्प दिखाई देता है।

इस तरह भारतीय कार बाजार में अब मुकाबला सिर्फ पेट्रोल बनाम डीजल का नहीं रह गया है। ग्राहक के सामने पेट्रोल, CNG, हाइब्रिड और EV के बीच चुनाव का नया बाजार तैयार हो चुका है।

डीजल की हिस्सेदारी अभी भी बनी हुई है

पेट्रोल की हिस्सेदारी घटने के बावजूद डीजल पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं हुआ है। FADA के अनुसार जुलाई में डीजल यात्री वाहनों की हिस्सेदारी करीब 18% रही और यह पिछले साल की तुलना में मोटे तौर पर स्थिर रही।

खासकर बड़े SUV और लंबी दूरी चलाने वाले ग्राहकों के बीच डीजल की मांग अभी भी बनी हुई है। हालांकि, नए उत्सर्जन मानकों और वैकल्पिक पावरट्रेन के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में डीजल की स्थिति पर भी नजर रहेगी।

दिलचस्प बात: कारों की कुल बिक्री फिर भी बढ़ी

ईंधन विकल्पों को लेकर बदलाव के बावजूद भारतीय यात्री वाहन बाजार में जुलाई का प्रदर्शन कमजोर नहीं रहा। FADA के अनुसार जुलाई 2026 में यात्री वाहनों की रिटेल बिक्री सालाना आधार पर 19.1% बढ़कर 4,16,555 यूनिट हो गई।

यानी ग्राहक कार खरीदने से पीछे नहीं हटे; बल्कि उनकी पसंद का ईंधन और पावरट्रेन बदल रहा है। नए मॉडल, करों में बदलाव से मिली मांग और ग्रामीण बाजार में मजबूत प्रदर्शन ने भी कुल बिक्री को सहारा दिया।

ग्रामीण बाजार भी बना बड़ा ड्राइवर

जुलाई में कार बाजार के प्रदर्शन में ग्रामीण मांग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत वाहन खरीद की बढ़ती क्षमता ऑटो कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बन रही है।

ऐसे बाजार में जहां ग्राहक वाहन की कीमत के साथ-साथ माइलेज और रनिंग कॉस्ट पर विशेष ध्यान देता है, CNG और अन्य ईंधन विकल्पों की बढ़ती स्वीकार्यता कंपनियों की उत्पाद रणनीति को प्रभावित कर सकती है।

क्या पेट्रोल कारों का दौर खत्म हो रहा है?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। पेट्रोल अभी भी भारत में यात्री वाहनों का सबसे बड़ा ईंधन वर्ग है। जुलाई में उसकी हिस्सेदारी 41.68% रही, जो वैकल्पिक ईंधनों के संयुक्त 40.59% से अभी भी थोड़ी अधिक है।

लेकिन ट्रेंड जरूर बदल रहा है। एक साल पहले दोनों के बीच अंतर करीब 13.21 प्रतिशत अंक था, जो जुलाई 2026 में घटकर केवल 1.09 प्रतिशत अंक रह गया।

यही आंकड़ा भारतीय ऑटो बाजार में चल रहे बदलाव की सबसे बड़ी कहानी बताता है।

अब कंपनियों के सामने नई चुनौती

ऑटो कंपनियों के लिए आने वाला समय केवल ज्यादा कारें बेचने का नहीं, बल्कि सही पावरट्रेन बेचने का भी है। ग्राहक अब यह सवाल पूछ रहा है कि अगले 5-10 साल के लिए उसके लिए कौन सा ईंधन विकल्प सबसे बेहतर रहेगा।

E20 को लेकर स्पष्ट जानकारी, पुराने वाहनों की अनुकूलता, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, CNG नेटवर्क और हाइब्रिड तकनीक की लागत—ये सभी कार खरीदने के फैसले को प्रभावित करने वाले कारक बन चुके हैं।

FADA ने भी E20 को लेकर सरकार, वाहन कंपनियों और डीलरों के बीच बेहतर संचार की जरूरत बताई है, ताकि ग्राहकों की आशंकाओं को दूर किया जा सके।

निष्कर्ष

जुलाई 2026 के आंकड़े भारतीय ऑटो बाजार में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं। पेट्रोल अभी नंबर-1 है, लेकिन उसकी बढ़त तेजी से कम हो रही है। CNG, हाइब्रिड और EV मिलकर पेट्रोल कारों के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।

इस बदलाव के पीछे केवल E20 की चिंता नहीं है—माइलेज, ईंधन लागत, नई तकनीक, पर्यावरणीय सोच और लंबे समय की बचत जैसे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं।

अगर यही रुझान आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय कार बाजार का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि “कौन सी कार खरीदें?”, बल्कि यह होगा कि “किस ईंधन या पावरट्रेन वाली कार खरीदें?”