राजनीति

बंगाल उपचुनाव में बड़ा उलटफेर: नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी ममता खेमे को झटका, प्रत्याशी ने पहले छोड़ा मैदान फिर बदला फैसला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के दो विधानसभा उपचुनावों से पहले सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। नंदीग्राम के बाद अब रेजीनगर सीट भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। रेजीनगर से ममता बनर्जी के खेमे के प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को पहले चुनाव मैदान से हटने की घोषणा की, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना फैसला बदलते हुए उपचुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों सीटों पर नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 19 सितंबर थी।

रेजीनगर में सुबह आया बड़ा ऐलान, दोपहर तक बदल गया फैसला

रेजीनगर से ममता खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को कहा कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके मुताबिक पार्टी के कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर परेशान किए जाने और नए चुनाव चिह्न को कम समय में मतदाताओं तक पहुंचाने की चुनौती के कारण चुनाव लड़ना मुश्किल हो रहा था।

लेकिन इसके कुछ घंटे बाद तस्वीर बदल गई। चौधरी ने दोबारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पुलिस की ओर से सुरक्षा का आश्वासन मिलने और ममता बनर्जी से बातचीत के बाद उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि वह 6 अक्टूबर को रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे।

इस तरह शुरुआती खबरों में जिस नाम वापसी को अंतिम माना जा रहा था, वह बाद में फैसला वापस लेने के कारण बदल गई।

नए नाम और चुनाव चिह्न को लेकर क्यों उठे सवाल?

रेजीनगर का घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न आवंटित किया है। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न दिया गया है।

रबीउल आलम चौधरी ने शुरुआती तौर पर यही चिंता जताई थी कि चुनाव प्रचार के लिए उपलब्ध कम समय में नए नाम और चुनाव चिह्न को मतदाताओं के बीच स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी सामने रखी थीं।

बाद में पुलिस से सुरक्षा का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला कायम रखने की बात कही।

नंदीग्राम में पहले ही बदल चुका है पूरा चुनावी समीकरण

इससे एक दिन पहले नंदीग्राम में भी ममता बनर्जी के खेमे को अपने प्रत्याशी के स्तर पर बड़ा बदलाव करना पड़ा था। यहां संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था।

इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था। लेकिन इसके कुछ समय बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई। पुलिस ने गिरफ्तारी को कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा बताया, जबकि कांग्रेस और ममता खेमे ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए।

इस घटनाक्रम ने नंदीग्राम के उपचुनाव को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

दो सीटें, लेकिन दोनों की कहानी अलग

नंदीग्राम और रेजीनगर में पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम को एक साथ देखने पर दोनों सीटों पर ममता बनर्जी के खेमे की रणनीति में अलग-अलग तरह की परिस्थितियां सामने आई हैं।

नंदीग्राम में प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस लिया और इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया गया।

रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लेने की घोषणा की, लेकिन बाद में सुरक्षा आश्वासन और पार्टी नेतृत्व से बातचीत के बाद चुनाव लड़ने का फैसला बरकरार रखा।

इसलिए फिलहाल रेजीनगर को ममता खेमे के उम्मीदवार से खाली सीट बताना सही नहीं होगा।

कौन हैं रबीउल आलम चौधरी?

रबीउल आलम चौधरी रेजीनगर से पहले भी विधायक रह चुके हैं। रिपोर्टों के मुताबिक वह 2013 और 2016 में कांग्रेस के टिकट पर रेजीनगर से विधायक चुने गए थे और 2021 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। 2026 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक और पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर विजयी हुए थे। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

अब आगे क्या?

6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। रेजीनगर में फिलहाल रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव मैदान में बने रहने का फैसला किया है, जबकि नंदीग्राम में ममता खेमे की ओर से कांग्रेस को समर्थन देने की स्थिति बनी हुई है।

आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार, उम्मीदवारों की गतिविधियां और दोनों सीटों पर दलों की रणनीति इस मुकाबले को और स्पष्ट करेगी। फिलहाल इतना जरूर है कि बंगाल उपचुनाव शुरू होने से पहले ही नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटें राज्य की राजनीति में बड़े घटनाक्रमों का केंद्र बन गई हैं।