कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है। निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए। अब आगामी उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम से मैदान में उतरेगा और उसका चुनाव चिह्न ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ होगा। वहीं अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और उसके पारंपरिक ‘दो फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चुनाव आयोग तक पहुंच चुका है। आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह व्यवस्था विवाद पर अंतिम निर्णय आने तक अंतरिम तौर पर लागू रहेगी।
पहले दिए गए थे नाम और सिंबल के विकल्प
आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों गुटों से 18 सितंबर की सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक नाम और उपलब्ध ‘फ्री सिंबल’ में से तीन-तीन चुनाव चिह्न सुझाने को कहा गया था।
ममता बनर्जी गुट ने अपने विकल्पों में ममता और तृणमूल कांग्रेस दोनों को जगह दी थी। रिपोर्टों के मुताबिक ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’, ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ममता’ और ‘तृणमूल ममता कांग्रेस’ जैसे नाम सुझाए गए थे। चुनाव चिह्न के लिए फुटबॉल खिलाड़ी और क्रिकेट बैट जैसे खेल से जुड़े विकल्प दिए गए थे।
दूसरे गुट की ओर से ‘राष्ट्रवादी तृणमूल कांग्रेस’ और ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ जैसे नामों के साथ ब्लैकबोर्ड, लिफाफा और टॉर्च जैसे चुनाव चिह्न सुझाए गए थे। आखिरकार आयोग ने ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ को मंजूरी दी।
उपचुनाव से ठीक पहले आया फैसला
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर पड़ेगा। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। अब दोनों गुट इन चुनावों में अपनी नई पहचान और नए चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक दोनों नए नामों और चिह्नों की यह व्यवस्था फिलहाल संबंधित चुनावों के लिए अंतरिम है। मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों के दावे को लेकर आयोग के समक्ष अंतिम प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी।
TMC के इतिहास में क्यों अहम है यह बदलाव?
तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर की थी। पार्टी का ‘दो फूल और घास’ वाला प्रतीक लंबे समय से उसकी चुनावी पहचान का हिस्सा रहा है। मौजूदा विवाद के बीच पहली बार पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी धड़ों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में जाना होगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपचुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर आयोग की अंतिम प्रक्रिया किस दिशा में जाती है। तब तक पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘फुटबॉल खिलाड़ी बनाम लिफाफा’ की नई चुनावी पहचान चर्चा में रहेगी।


