शिमला | बिजनेस डेस्क
हिमाचल प्रदेश में वाहन चालकों की जेब पर एक बार फिर असर पड़ने वाला है। सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर ‘अनाथ एवं विधवा सेस’ लागू किया है, जिसके बाद राज्य में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। बुधवार, 12 अगस्त 2026 को सामने आई ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पेट्रोल और डीजल के नए दाम प्रभावी हो गए हैं।
सरकार का कहना है कि इस सेस से मिलने वाली राशि को अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए राज्य में अलग से कल्याण कोष का प्रावधान किया गया है।
क्या है ‘अनाथ और विधवा सेस’?
हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने 2026 में VAT कानून में संशोधन किया था। इसके तहत पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की पहली बिक्री पर ‘Orphan and Widow Cess’ लगाने का कानूनी प्रावधान किया गया।
राजपत्र में स्पष्ट किया गया है कि सरकार इस सेस की दर अधिसूचना के जरिए तय कर सकती है, हालांकि इसकी अधिकतम सीमा ₹5 प्रति लीटर रखी गई है। इससे मिलने वाली रकम को Orphan and Widow Welfare Fund में जमा किया जाना है।
यानी यह सामान्य VAT से अलग एक अतिरिक्त उपकर है, जिसका उद्देश्य राज्य सरकार के मुताबिक सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए समर्पित राजस्व जुटाना है।
सरकार ने क्यों लगाया यह सेस?
विधेयक के उद्देश्यों में सरकार ने कहा था कि राज्य पहले से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अनाथ बच्चों और विधवाओं को वित्तीय सहायता तथा कल्याणकारी समर्थन देता रहा है।
सरकार का तर्क है कि इन योजनाओं को लगातार और स्थायी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए अलग राजस्व स्रोत जरूरी है। इसी उद्देश्य से पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर सेस लगाने का प्रस्ताव लाया गया था।
सरकार की योजना के मुताबिक सेस से प्राप्त राशि को सीधे अनाथ और विधवा कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में इस्तेमाल किया जाना है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों आया बदलाव?
पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कई स्तरों के टैक्स और शुल्क शामिल होते हैं। इनमें केंद्र और राज्य स्तर के करों के अलावा स्थानीय स्तर के शुल्क भी कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।
हिमाचल में नए सेस के लागू होने के बाद राज्य के ईंधन मूल्य ढांचे में एक और शुल्क जुड़ गया है। ताजा रिपोर्टों में भी इसी बदलाव के बाद पेट्रोल और डीजल महंगा होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, शहर-दर-शहर खुदरा कीमतों में अंतर हो सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं को अपने स्थानीय पेट्रोल पंप पर लागू आज का रेट देखना चाहिए।
पड़ोसी राज्यों से कितना अंतर?
हिमाचल प्रदेश में ईंधन की कीमतों की तुलना अक्सर पड़ोसी जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से की जाती है।
ताजा रिपोर्टों में हिमाचल के पेट्रोल-डीजल दामों की तुलना जम्मू और लेह से भी की गई है। राज्यवार VAT और अन्य शुल्क अलग होने के कारण समान पेट्रोलियम उत्पाद के लिए अलग-अलग राज्यों में ग्राहक को अलग कीमत चुकानी पड़ती है।
भारत सरकार के उपलब्ध आंकड़ों में भी हिमाचल प्रदेश के पेट्रोल और डीजल पर लागू VAT ढांचे में अलग-अलग दरों का उल्लेख है।
पहले भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स को लेकर हुआ है विवाद
हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस नई नहीं है। इससे पहले भी राज्य सरकार के ईंधन पर अतिरिक्त शुल्क और टैक्स बढ़ाने के फैसलों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।
मार्च 2026 में पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाए जाने के बाद भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर निशाना साधा था और इसे आम लोगों पर आर्थिक भार बताया था।
वहीं सरकार की तरफ से अतिरिक्त राजस्व जुटाने की जरूरत और राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए विभिन्न कर उपायों का बचाव किया गया है।
ईंधन महंगा होने का व्यापक असर क्यों पड़ता है?
पेट्रोल और डीजल की कीमत केवल वाहन चालकों के खर्च तक सीमित नहीं रहती। डीजल का इस्तेमाल माल ढुलाई, कृषि गतिविधियों और कई व्यावसायिक क्षेत्रों में होता है।
इसलिए ईंधन की लागत बढ़ने पर परिवहन खर्च बढ़ने की संभावना रहती है, जिसका अप्रत्यक्ष असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में यह प्रभाव और महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि कई क्षेत्रों में माल और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सड़क परिवहन पर निर्भर है।
सरकार के सामने दोहरा संतुलन
सुक्खू सरकार के सामने इस फैसले में दो लक्ष्य दिखाई देते हैं—एक तरफ सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए स्थायी राजस्व जुटाना और दूसरी तरफ ईंधन महंगा होने से आम उपभोक्ता पर पड़ने वाले असर को सीमित रखना।
सरकार के लिए सबसे बड़ा तर्क यह है कि सेस से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल विशेष रूप से अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण में किया जाएगा। वहीं उपभोक्ताओं के लिए सवाल यह है कि सामाजिक योजनाओं का खर्च जुटाने के लिए पेट्रोल और डीजल जैसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले ईंधन पर अतिरिक्त शुल्क कितना उचित है।
अब नजर नए रेट और आगे के फैसलों पर
फिलहाल हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर ईंधन करों और राज्य के राजस्व मॉडल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
राज्य सरकार ने जिस सेस को सामाजिक कल्याण से जोड़ा है, उसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात से तय होगी कि इससे जुटाई गई राशि किस तरह और कितने प्रभावी ढंग से लाभार्थियों तक पहुंचती है।
दूसरी ओर, वाहन चालकों और कारोबारियों के लिए बढ़ी ईंधन कीमत सीधे लागत से जुड़ी है।
इसलिए आने वाले दिनों में इस फैसले पर राजनीतिक बहस के साथ-साथ इसके वास्तविक सामाजिक और आर्थिक असर पर भी नजर रहेगी।


