आगरा: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब उनके पैतृक शहर आगरा तक पहुंच गया है। सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगरा की विजय नगर कॉलोनी स्थित ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान घर के मुख्य गेट और दीवार पर कालिख पोती गई और स्प्रे पेंट से ‘वोट चोर’ तथा ‘ज्ञानेश गद्दार’ जैसे नारे लिखे गए। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लिखे गए नारों को हटवाया। पुलिस अब प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए आसपास के CCTV फुटेज खंगाल रही है।
यह प्रदर्शन ऐसे वक्त हुआ है जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को आयोग की सामूहिक और सर्वसम्मत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
सुबह करीब 11 बजे आवास के बाहर पहुंचे प्रदर्शनकारी
रिपोर्टों के मुताबिक, सोमवार सुबह कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता विजय नगर स्थित ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर लेकर नारेबाजी की और कुछ देर तक वहां विरोध जताया।
इसके बाद मुख्य गेट और दीवार पर काले रंग से आपत्तिजनक नारे लिखे गए। कुछ रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों की संख्या दो दर्जन से अधिक बताई गई है। प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें बाद में सोशल मीडिया पर भी सामने आईं।
प्रदर्शनकारी कुछ देर बाद वहां से चले गए। उनके जाने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और गेट तथा दीवार पर लिखे गए नारों को साफ कराया।
पुलिस ने शुरू की पहचान की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान की जा सके।
पुलिस की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि आवास की दीवार और गेट को नुकसान पहुंचाने या सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित करने के मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाता है।
आगरा में पैदल मार्च भी निकाला गया
CEC के आवास के बाहर प्रदर्शन के अलावा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगरा में पैदल मार्च भी निकाला। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता सुभाष पार्क से कलेक्ट्रेट की ओर मार्च करते हुए पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। कांग्रेस नेताओं ने CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई।
कांग्रेस की ओर से यह प्रदर्शन केवल आगरा तक सीमित नहीं रहा। पार्टी ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर भी चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा है।
SIR विवाद से जुड़ा है विरोध
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के मौजूदा अभियान की पृष्ठभूमि में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहा विवाद है।
हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों का संबंध SIR समेत चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न फैसलों से बताया गया।
इस रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने CEC के खिलाफ अपना राजनीतिक अभियान और तेज किया तथा उनके इस्तीफे की मांग की।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को SIR से जुड़े विवाद पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि संबंधित फैसले आयोग की पूर्ण पीठ ने सर्वसम्मति से लिए थे। आयोग ने SIR की प्रक्रिया में कुछ बदलावों की जानकारी भी दी, जिसमें दस्तावेजों के संबंध में बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका और सुनवाई की प्रक्रिया से जुड़े बदलाव शामिल थे।
यानी एक तरफ कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि आयोग इन आरोपों के बीच अपनी निर्णय प्रक्रिया को सामूहिक और नियमों के अनुरूप बता रहा है।
पहले भी सड़कों पर उतर चुकी है कांग्रेस
CEC के खिलाफ कांग्रेस का विरोध पिछले कुछ दिनों में कई राज्यों में दिखाई दिया है। 25 सितंबर को पार्टी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन शुरू किया था। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की खबरें भी सामने आईं।
आगरा की घटना इसी अभियान की अगली कड़ी है। हालांकि इस बार विरोध का स्थान खास था—यह प्रदर्शन सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक आवास के बाहर हुआ।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
घटना के बाद बीजेपी की ओर से भी कांग्रेस के खिलाफ प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। यह बीजेपी का राजनीतिक आरोप है, जबकि कांग्रेस अपने प्रदर्शन को चुनाव प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े सवालों के विरोध के रूप में पेश कर रही है।
इस तरह विवाद अब केवल SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है। चुनाव आयोग की संस्थागत भूमिका, CEC के खिलाफ विपक्ष के आरोप और आयोग की ओर से दिए गए जवाब—तीनों मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।
घर की दीवार से सियासी टकराव तक
आगरा में CEC के पैतृक आवास पर कालिख पोतने की घटना ने विवाद को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले से चल रही बहस अब व्यक्तिगत विरोध-प्रदर्शनों तक पहुंच गई है।
फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज और उपलब्ध वीडियो के आधार पर प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटी है। दूसरी ओर कांग्रेस ने चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


