नई दिल्ली: गांधी जयंती के दिन दिल्ली का जंतर-मंतर सियासी विरोध का केंद्र बन गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर आम आदमी पार्टी, छात्र संगठनों और विभिन्न विपक्षी समूहों ने प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू कर दी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़े, जिसके बाद पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
लाइव हिन्दुस्तान और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, 500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत कई प्रमुख नेता शामिल थे। बाद की रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 700 तक पहुंचने की बात कही गई, इसलिए आंकड़ा समय के साथ बदलता रहा।
जंतर-मंतर के चारों तरफ बैरिकेडिंग, भारी पुलिस बल तैनात
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। प्रदर्शन स्थल के आसपास बैरिकेड लगाए गए और पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी तैनाती की गई।
दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू करते हुए अनधिकृत सभा, जुलूस, धरना, नारेबाजी और सार्वजनिक प्रदर्शन जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया था। पुलिस ने लोगों से आदेशों का पालन करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की।
पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ाई। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, इलाके में कई जोन बनाए गए और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया। ड्रोन से भी निगरानी की गई।
सौरभ भारद्वाज और आतिशी समेत कई नेता हिरासत में
AAP नेताओं ने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कार्यकर्ताओं से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज भी प्रदर्शन में पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, AAP सांसद संजय सिंह और अन्य विपक्षी नेताओं के भी हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई। इसके अलावा RJD के मनोज झा, वाम दलों के नेताओं और छात्र संगठनों के कई कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
प्रदर्शन में AISA, SFI, NSUI और अन्य छात्र एवं युवा संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। अलग-अलग समूहों ने SIR और मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए।
11 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद, यात्रियों को हुई परेशानी
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों पर भी पाबंदियां लगाई गईं। सुबह के समय 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए गए। इनमें जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, INA, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली जैसे स्टेशन शामिल थे।
कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहने की जानकारी भी सामने आई। सुरक्षा कारणों से यह व्यवस्था लागू की गई थी।
इसका असर सेंट्रल दिल्ली के ट्रैफिक पर भी पड़ा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जंतर-मंतर रोड, संसद मार्ग, टॉल्स्टॉय मार्ग, कनॉट प्लेस और पटेल चौक के आसपास आवाजाही को नियंत्रित या डायवर्ट करने की एडवाइजरी जारी की। लोगों से इन रास्तों से बचने और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखने को कहा गया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। इसके साथ ही SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है। इन्हीं आरोपों को लेकर प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों को तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े अपने फैसलों का बचाव किया है और कहा है कि देशव्यापी SIR से संबंधित आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से जारी हुआ था।
यानी फिलहाल विवाद का एक पक्ष प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं, जबकि दूसरा पक्ष चुनाव आयोग का आधिकारिक स्पष्टीकरण है।
6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च की तैयारी
जंतर-मंतर के प्रदर्शन को विपक्ष और नागरिक संगठनों की व्यापक मुहिम से भी जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी दलों ने SIR और मतदाता सूची के मुद्दे पर आगे भी आंदोलन जारी रखने की योजना बनाई है।
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 अक्टूबर से जिला स्तर पर कार्यक्रम और मार्च की शुरुआत करने तथा 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च की योजना सामने आई है।
इससे संकेत मिलता है कि जंतर-मंतर का प्रदर्शन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष की व्यापक राजनीतिक मुहिम का हिस्सा है।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव जैसी स्थिति
जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए रोकने की कोशिश की। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी और नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
इंडियन एक्सप्रेस और अन्य रिपोर्टों में भी AAP नेताओं, छात्र संगठनों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों की हिरासत की पुष्टि हुई है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रतिबंध कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाए गए थे। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी इसे अपनी लोकतांत्रिक आवाज उठाने से रोकने की कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।
दिल्ली से मुंबई तक बढ़ा विरोध
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मुंबई के शिवाजी पार्क में भी CJP की ओर से प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और विशाल ददलानी जैसी सार्वजनिक हस्तियां भी नजर आईं। वहां भी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए।
इस तरह एक ही दिन दिल्ली और मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ अलग-अलग समूहों के प्रदर्शन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया।
अब आगे क्या?
जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि SIR और मतदाता सूची को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद किस दिशा में जाता है।
एक तरफ AAP, कांग्रेस, वाम दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों की ओर से चुनाव आयोग से जवाबदेही और CEC के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया और SIR को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है।
आने वाले दिनों में जिला स्तर के विरोध कार्यक्रमों और 6 अक्टूबर को प्रस्तावित चुनाव आयोग मार्च पर नजर रहेगी। फिलहाल गांधी जयंती के दिन जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन दिल्ली की राजनीति में SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर बढ़ती बहस का एक बड़ा घटनाक्रम बन गया है।


