भोपाल/बालाघाट | विशेष संवाददाता
मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन के लिए भेजे जाने वाले सरकारी चावल की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और जांच एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। प्रारंभिक जांच में आरोप है कि खाद्य निगम (FCI) के गोदाम से एथेनॉल संयंत्र के लिए भेजा गया सरकारी चावल अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय निजी राइस मिलों की ओर मोड़ दिया गया। इस मामले ने सरकारी खाद्यान्न वितरण और एथेनॉल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
242 क्विंटल चावल से भरा ट्रक राइस मिल में मिला
जांच की शुरुआत उस समय हुई जब बालाघाट के नवेगांव स्थित एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा के एक अधिकृत एथेनॉल प्लांट के लिए रवाना किया गया चावल समय पर नहीं पहुंचा। प्रशासनिक जांच के दौरान एक ट्रक निजी राइस मिल परिसर में खड़ा मिला, जिसमें लगभग 490 बोरे (करीब 242.55 क्विंटल) सरकारी चावल लदा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) गठित किया।
क्या है कथित हेराफेरी का तरीका?
जांच एजेंसियों के अनुसार, आशंका है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए रियायती दर पर उपलब्ध कराए गए सरकारी चावल को निजी राइस मिलों तक पहुंचाया गया। वहां इस चावल को कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के रूप में दोबारा सरकारी खरीद प्रणाली में शामिल करने की कोशिश की गई। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि एथेनॉल उत्पादन के लिए अपेक्षाकृत सस्ता टूटा चावल (Broken Rice) इस्तेमाल कर अंतर की राशि से अवैध लाभ कमाने का प्रयास तो नहीं किया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे सरकारी सब्सिडी और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ हो सकता है।
कई गिरफ्तारियां, कई जिलों तक पहुंची जांच
अब तक इस मामले में ट्रांसपोर्टर, ट्रक चालक और एथेनॉल प्लांट से जुड़े कुछ लोगों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कई ट्रकों को जब्त किया है और बालाघाट, छिंदवाड़ा तथा सिवनी सहित अन्य जिलों में भी जांच का दायरा बढ़ाया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस कथित नेटवर्क में अन्य राइस मिलें या एथेनॉल इकाइयां भी शामिल थीं।
करोड़ों के घोटाले की आशंका
जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि यह मामला केवल कुछ ट्रकों तक सीमित है या फिर बड़े पैमाने पर सरकारी चावल की हेराफेरी की गई। प्रारंभिक जांच में बड़ी मात्रा में सरकारी चावल के गलत तरीके से डायवर्ट होने की आशंका जताई गई है। हालांकि कथित वित्तीय नुकसान का अंतिम आकलन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
एथेनॉल मिशन पर भी उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) के लक्ष्य को आगे बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित खाद्यान्न की आपूर्ति श्रृंखला में अनियमितताएं होती हैं, तो इससे न केवल सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता प्रभावित होगी, बल्कि एथेनॉल कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल SIT वित्तीय लेन-देन, परिवहन रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे कथित नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।


