जयपुर | विशेष संवाददाता
राजस्थान में आगामी परिसीमन (Delimitation) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। विभिन्न राजनीतिक चर्चाओं और विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद राज्य में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है। यदि ऐसा होता है, तो कई मौजूदा संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं और आरक्षण की स्थिति बदल सकती है, जिससे प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं के चुनावी समीकरण प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
किन सीटों पर हो सकती है सबसे बड़ी चर्चा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान में आरक्षित और सामान्य सीटों के स्वरूप में बदलाव की संभावना को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि बीकानेर और दौसा जैसी सीटों की आरक्षण स्थिति बदल सकती है, जबकि जनसंख्या संरचना के आधार पर कुछ अन्य संसदीय क्षेत्रों को SC या ST श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिग्गज नेताओं की रणनीति बदल सकती है
यदि परिसीमन और आरक्षण में बदलाव लागू होते हैं, तो कई प्रमुख नेताओं को नए संसदीय क्षेत्रों से चुनाव लड़ना पड़ सकता है। राजनीतिक हलकों में दुष्यंत सिंह और हनुमान बेनीवाल जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि यदि उनकी वर्तमान सीटों की संरचना बदलती है, तो उन्हें नए चुनावी विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। हालांकि, यह केवल संभावित राजनीतिक आकलन है और अंतिम स्थिति परिसीमन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगी।
क्यों जरूरी है परिसीमन?
परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना होता है, ताकि सभी क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके। इस प्रक्रिया में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव के साथ-साथ संविधान के प्रावधानों के अनुसार SC और ST के लिए आरक्षित सीटों की संख्या और उनका स्वरूप भी बदला जा सकता है।
राजस्थान में वर्तमान में 25 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें 4 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 3 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। भविष्य में जनसंख्या के नए आंकड़ों और परिसीमन आयोग की सिफारिशों के आधार पर इसमें परिवर्तन संभव है।
राजनीतिक दलों ने शुरू की तैयारी
भले ही परिसीमन की अंतिम प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने संभावित बदलावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। राजनीतिक दल जनसंख्या के नए आंकड़ों, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं ताकि भविष्य के चुनावी परिदृश्य के अनुसार अपनी रणनीति तय की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीटों के आरक्षण और सीमाओं में बड़े बदलाव होते हैं, तो राजस्थान की राजनीति में कई नए चेहरे उभर सकते हैं और पारंपरिक चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल परिसीमन आयोग या भारत सरकार की ओर से राजस्थान की लोकसभा सीटों के आरक्षण या सीमाओं में बदलाव को लेकर कोई अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इसलिए सामने आ रही सभी चर्चाओं को संभावित परिदृश्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अंतिम फैसला परिसीमन आयोग की सिफारिशों, जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


