जयपुर | राजस्थान डेस्क
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर अब अगले चरण में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार की योजना आगामी विधानसभा मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश करने की है। यदि यह विधेयक विधानसभा में पेश होकर पारित होता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, तो राजस्थान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, फिलहाल इसे कानून लागू होने की स्थिति नहीं माना जाना चाहिए। सरकार की ओर से पहले ही UCC के मसौदे को लेकर जनता से सुझाव मांगे जा चुके हैं और इस प्रक्रिया के लिए समिति भी गठित की गई है।
UCC पर सरकार ने क्यों बढ़ाई रफ्तार?
राजस्थान सरकार ने UCC को लेकर एक समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति का काम विभिन्न पक्षों से राय लेना और प्रस्तावित कानून के लिए मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
सरकार ने इस प्रक्रिया में आम लोगों, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेने का रास्ता भी अपनाया है। इसके लिए सार्वजनिक परामर्श और ऑनलाइन सुझाव की व्यवस्था की गई थी।
राजस्थान सरकार के आधिकारिक UCC पोर्टल पर भी नागरिकों से समान नागरिक संहिता को लेकर सुझाव आमंत्रित किए गए थे। इससे संकेत मिलता है कि सरकार विधेयक लाने से पहले व्यापक जनमत लेने की प्रक्रिया पर जोर दे रही है।
UCC में किन मुद्दों पर हो सकता है असर?
समान नागरिक संहिता का मूल विचार व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। राजस्थान में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किन-किन प्रावधानों को शामिल किया जाएगा, इसकी अंतिम तस्वीर विधेयक और उसके आधिकारिक मसौदे के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
हालांकि UCC से जुड़े सार्वजनिक विमर्श में आम तौर पर इन विषयों पर चर्चा होती रही है—
- विवाह और विवाह पंजीकरण
- तलाक और वैवाहिक अधिकार
- उत्तराधिकार और संपत्ति का बंटवारा
- गोद लेने से जुड़े प्रावधान
- लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित नियम
- व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े अन्य विषय
राजस्थान में समिति की बैठकों और जनसुनवाई के दौरान भी लिव-इन संबंधों तथा उत्तराधिकार जैसे विषयों पर चर्चा सामने आई है।
जनता से मांगी गई थी राय
सरकार ने UCC को लेकर जनता की राय लेने के लिए अलग-अलग स्तरों पर परामर्श की प्रक्रिया शुरू की थी। राजस्थान के आधिकारिक पोर्टल पर नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए थे और उन्हें अपने सुझाव देने के लिए ऑनलाइन तथा प्रशासनिक माध्यम उपलब्ध कराए गए थे।
सरकार का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UCC का सीधा संबंध नागरिकों के निजी और पारिवारिक जीवन से जुड़े कई कानूनी पहलुओं से हो सकता है। ऐसे में मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न सामाजिक और सामुदायिक समूहों की राय लेना राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
राजस्थान में UCC पर पहले से चल रही है तैयारी
राजस्थान में UCC को लेकर चर्चा अचानक शुरू नहीं हुई है। जून 2026 में राज्य सरकार की ओर से समिति गठन की जानकारी सामने आई थी। समिति को प्रस्तावित कानून के लिए मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने भी समिति की प्रक्रिया और सार्वजनिक परामर्श से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी थी। समिति द्वारा संभाग स्तर पर लोगों से सुझाव लेने की प्रक्रिया अपनाई गई।
इसके बाद जुलाई में भी UCC से जुड़े मुद्दों पर जनसुनवाई और सामाजिक संगठनों के साथ चर्चा की खबरें सामने आईं।
UCC की राजनीति: राजस्थान क्यों महत्वपूर्ण?
राजस्थान में UCC विधेयक लाने की तैयारी भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक और विधायी प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा सकती है।
उत्तराखंड पहले ही UCC लागू करने वाला प्रमुख राज्य बन चुका है। मध्य प्रदेश में भी सरकार ने मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश करने की घोषणा की है।
ऐसे में राजस्थान में भी विधेयक विधानसभा तक पहुंचता है तो यह भाजपा शासित राज्यों में UCC के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम होगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया पर भी रहेगी नजर
UCC जैसे मुद्दे पर विधानसभा में राजनीतिक बहस होना तय माना जा रहा है। विपक्ष की ओर से विधेयक के प्रावधानों, व्यक्तिगत कानूनों, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं।
वहीं, सरकार इसे समान नागरिक अधिकारों और एक समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में कदम के तौर पर पेश कर सकती है।
इसलिए मानसून सत्र में विधेयक की प्रस्तुति के साथ ही राजस्थान विधानसभा में राजनीतिक बहस का एक नया केंद्र भी तैयार हो सकता है।
कानून बनने से पहले कई चरण बाकी
यह समझना जरूरी है कि विधानसभा में विधेयक पेश होना और कानून लागू होना दो अलग-अलग चरण हैं। विधेयक को विधानसभा में चर्चा और मतदान की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे की मंजूरियां आवश्यक हो सकती हैं।
इसलिए फिलहाल राजस्थान में UCC को लेकर सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम विधेयक का विधानसभा में पेश होना और उसके प्रावधानों पर होने वाली बहस होगी।
अब नजर मानसून सत्र पर
भजनलाल शर्मा सरकार के लिए आगामी मानसून सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। UCC विधेयक के अलावा भी विधानसभा में कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की संभावना रहेगी।
लेकिन UCC का मुद्दा विशेष महत्व रखेगा, क्योंकि इसका प्रभाव सीधे नागरिकों के व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों से जुड़ा हो सकता है।
अब असली तस्वीर विधेयक के आधिकारिक मसौदे के सामने आने के बाद स्पष्ट होगी—कौन से प्रावधान शामिल किए गए हैं, किन समुदायों या क्षेत्रों के लिए क्या व्यवस्था होगी और मौजूदा कानूनों में किस तरह का बदलाव प्रस्तावित है। राजस्थान की राजनीति में आने वाले दिनों में UCC निश्चित तौर पर एक बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।


