नई दिल्ली/लखनऊ/पटना/भोपाल | नेशनल डेस्क
मानसून की सक्रियता ने उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में हालात मुश्किल कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में लगातार बारिश के बीच नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग ने भी 10 अगस्त को यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई है।
लगातार बारिश ने कई इलाकों में जलभराव, सड़क संपर्क और सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है, जबकि लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता
उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के साथ प्रमुख नदियों के जलस्तर पर भी निगाह बनी हुई है। खासतौर पर गंगा और यमुना के किनारे बसे निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति को लेकर प्रशासन सतर्क है।
नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लगातार बारिश के साथ जलस्तर बढ़ने पर निचले क्षेत्रों में पानी तेजी से पहुंच सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उत्तर प्रदेश सरकार के राहत आयुक्त कार्यालय के रिकॉर्ड में भी 2026 के दौरान कई जिलों के लिए आपदा राहत से जुड़े प्रावधान और बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत व्यवस्था से संबंधित आदेश दर्ज हैं।
बिहार में भी भारी बारिश का अलर्ट
बिहार में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक राज्य के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। भारी बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका बनी रहती है।
बिहार में बाढ़ का खतरा विशेष रूप से नदी किनारे और निचले इलाकों में ज्यादा रहता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन के लिए जलस्तर की निगरानी, राहत शिविरों की तैयारी और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना प्राथमिकता बन जाता है।
MP में नदियां उफान पर, कई इलाकों में हालात चुनौतीपूर्ण
मध्य प्रदेश में भी पिछले 24 घंटों में बारिश ने कई जिलों में मुश्किलें बढ़ाई हैं। डिंडौरी और मंडला में भारी बारिश के कारण नर्मदा और चकरा नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। कुछ निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा देखते हुए परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
जबलपुर-अमरकंटक मार्ग पर भी जलभराव के कारण यातायात प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों का सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश में आगे भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। 11 से 13 अगस्त के बीच राज्य में नए मौसम तंत्र के सक्रिय होने की संभावना के कारण कई इलाकों में बारिश बढ़ सकती है।
स्कूलों पर भी बारिश का असर
लगातार बारिश और जलभराव की स्थिति में कई राज्यों के जिलों में प्रशासन स्कूल बंद करने जैसे एहतियाती कदम उठा सकता है। हालांकि, स्कूल बंद होने का फैसला जिला स्तर पर स्थानीय मौसम और प्रशासनिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
10 अगस्त के लिए कुछ राज्यों में भारी बारिश के कारण स्कूल बंद किए जाने या बंद रखने पर स्थानीय प्रशासन की ओर से फैसले लिए जा रहे हैं। इसलिए अभिभावकों और छात्रों को अपने जिले के कलेक्टर/शिक्षा विभाग की आधिकारिक सूचना को ही अंतिम मानना चाहिए।
IMD की चेतावनी: कई राज्यों में भारी बारिश
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 9 से 15 अगस्त के बीच देश के कई हिस्सों में व्यापक बारिश की संभावना है। उत्तर भारत के साथ मध्य भारत में भी बारिश का प्रभाव बना रहने का अनुमान है। भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव, सड़क और रेल यातायात में व्यवधान तथा स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बढ़ सकता है।
यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली-NCR, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
बारिश और बाढ़ के बीच लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
भारी बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन की सलाह का पालन करना सबसे जरूरी है। नदी, नाले और पुलिया के पास अनावश्यक जाने से बचना चाहिए। जलभराव वाली सड़क पर वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
बिजली के खंभों, खुले तारों और जलमग्न इलाकों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है। किसी इलाके में बाढ़ की स्थिति बनने पर स्थानीय प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का इस्तेमाल करना चाहिए।
अगले कुछ दिन अहम
उत्तर भारत और मध्य भारत में मानसून की सक्रियता के बीच अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। खासकर नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम और स्थानीय प्रशासन के अलर्ट पर नजर रखनी होगी।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती भारी बारिश के साथ बढ़ते जलस्तर और जलभराव को नियंत्रित करना है। यदि बारिश का दौर इसी तरह जारी रहता है, तो नदियों के आसपास के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को राहत एवं बचाव तैयारियों को और मजबूत करना पड़ सकता है।


