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हनुमान प्रतिमा पर अमेरिकी की टिप्पणी से भड़के ईशान थरूर, बोले- भारत में ईसाई धर्म अमेरिका से सदियों पहले पहुंचा

नई दिल्ली/टेक्सास: अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक सहिष्णुता और अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता की बहस तक पहुंच गया है। इसी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और पत्रकार ईशान थरूर की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है। उन्होंने हनुमान प्रतिमा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले एक अमेरिकी यूजर को जवाब देते हुए भारत में ईसाई धर्म के इतिहास का हवाला दिया।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मामला टेक्सास के शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर परिसर में स्थापित भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, 90 फीट ऊंची इस प्रतिमा की तस्वीर अमेरिकी यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस ने सोशल मीडिया पर साझा की और उसके साथ लिखा कि जीतने के बाद इसे गिरा दिया जाएगा। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

प्रतिमा को लेकर विवाद नया नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त 2024 में स्थापना के बाद से ही अमेरिका के कुछ ईसाई रूढ़िवादी समूह इसे लेकर आपत्ति जताते रहे हैं। हालांकि, मौजूदा विवाद उस समय तेज हुआ जब प्रतिमा को हटाने की बात सोशल मीडिया पर सार्वजनिक तौर पर कही गई।

ईशान थरूर ने क्या कहा?

जेसी ह्यूजेस की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए ईशान थरूर ने भारत में ईसाई धर्म के इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस देश में अलग-अलग धर्मों के धार्मिक स्थल मौजूद हैं, वहां एक हिंदू धार्मिक प्रतिमा को लेकर इस तरह की टिप्पणी क्यों की जा रही है।

ईशान ने अपनी पोस्ट में यह तर्क दिया कि भारत में ईसाई धर्म का इतिहास अमेरिका में उसके पहुंचने से काफी पुराना है और भारत में बड़ी संख्या में चर्च मौजूद हैं। उन्होंने धार्मिक राष्ट्रवाद और दूसरे धर्मों के प्रतीकों के प्रति असहिष्णुता को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।

उनकी यह प्रतिक्रिया सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, विवाद से जुड़े अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और इसे अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता तथा राजनीतिक बयानबाजी के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

90 फीट की प्रतिमा क्यों है चर्चा में?

टेक्सास के शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित ‘स्टैच्यू ऑफ द यूनियन’ करीब 90 फीट ऊंची भगवान हनुमान की प्रतिमा है। यह प्रतिमा अमेरिका में हिंदू समुदाय के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक के रूप में चर्चा में रही है। मौजूदा विवाद के बाद यह स्थानीय धार्मिक मुद्दे से आगे बढ़कर सोशल मीडिया और अमेरिकी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है।

रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि विवाद ऐसे समय सामने आया है जब टेक्सास में आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय, आव्रजन और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दे भी वहां की सार्वजनिक बहस में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

अमेरिकी पूर्व सैनिक ने भी जताया विरोध

विवाद के बीच अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने भी हनुमान प्रतिमा को हटाने की टिप्पणी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी अमेरिकी समुदाय के पूजा स्थल को सिर्फ इसलिए निशाना बनाना उचित नहीं है क्योंकि वहां दूसरे धर्म के लोग पूजा करते हैं।

बख्शी के बयान को Coalition of Hindus of North America (CoHNA) सहित कुछ अन्य लोगों का समर्थन मिला। वहीं, रिपोर्टों के मुताबिक जेसी ह्यूजेस ने बाद की टिप्पणियों में अपने रुख का बचाव किया और इसे अपनी धार्मिक मान्यता से जोड़कर पेश किया।

कौन हैं ईशान थरूर?

ईशान थरूर वरिष्ठ पत्रकार हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा वैश्विक राजनीति पर लंबे समय से लिखते रहे हैं। वह कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं। उनका जन्म 1984 में सिंगापुर में हुआ था।

ईशान लंबे समय तक द वॉशिंगटन पोस्ट से जुड़े रहे और इससे पहले टाइम में भी काम कर चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर लेखन और टिप्पणी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्हें 2021 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ डिप्लोमेसी का आर्थर रॉस मीडिया अवॉर्ड और 2024 में टेड सोरेनसन अवॉर्ड भी मिला था।

हनुमान प्रतिमा को लेकर सामने आया यह विवाद फिलहाल सोशल मीडिया की बहस से आगे बढ़कर अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक बयानबाजी जैसे सवालों को भी सामने ला रहा है।