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उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने पर बवाल, शहर काजी के घर पथराव; 5 सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पर केस

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद के सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाने को लेकर सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई। रविवार रात प्रशासन और शहर काजी के बीच सहमति बनने के बाद लगा था कि मामला शांतिपूर्वक सुलझ जाएगा, लेकिन सोमवार सुबह बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ और पथराव की घटना सामने आई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और बल प्रयोग किया।

विवाद के बीच शहर काजी खलीकुर्रहमान के घर के बाहर भी प्रदर्शन और पथराव की घटना सामने आई। पुलिस ने मामले में कई एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर अफवाह या भ्रामक जानकारी फैलाने और माहौल बिगाड़ने के आरोप में पांच सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है।

सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है पूरा विवाद

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई इलाकों में मार्ग चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी क्रम में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा था।

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद मस्जिद के प्रभावित हिस्से को खुद हटाने पर सहमति बनी थी। बताया गया कि करीब 11 फीट हिस्से को मशीन से गिराने के बजाय समाज के लोग स्वयं हटाएंगे। रविवार रात हुई बातचीत के बाद कुछ समय के लिए स्थिति सामान्य भी हो गई थी।

शहर काजी की अपील के बाद भी क्यों बिगड़ा माहौल?

शहर काजी ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की थी। प्रशासन का कहना था कि मस्जिद का प्रभावित हिस्सा हटाने की प्रक्रिया आपसी सहमति से की जा रही है।

लेकिन सोमवार सुबह घटनाक्रम अचानक बदल गया। मस्जिद के आसपास भीड़ जुटने लगी और बैरिकेडिंग के पास विरोध शुरू हो गया। पुलिस के मुताबिक, कुछ लोगों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने की कोशिश की, जिसके बाद तनाव बढ़ा और पथराव शुरू हुआ।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, रात में बनी सहमति की जानकारी समाज के सभी लोगों तक एक समान तरीके से नहीं पहुंच पाई। इसी बीच अलग-अलग संदेशों और सूचनाओं के कारण सुबह भीड़ जुटने लगी और स्थिति बिगड़ गई।

पुलिस पर पथराव, आंसू गैस और बल प्रयोग

स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ रिपोर्टों में पुलिस द्वारा लाठीचार्ज/बल प्रयोग किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, पथराव में कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। वेबदुनिया ने एक महिला थाना प्रभारी के घायल होने की भी जानकारी दी है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या को लेकर अंतर है, इसलिए इस संख्या की पुष्टि आधिकारिक विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट के बिना करना उचित नहीं होगा।

शहर काजी के घर पर भी पथराव

मस्जिद के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया को लेकर शहर काजी द्वारा सहमति जताए जाने के बाद उनके खिलाफ भी नाराजगी देखने को मिली। नवभारत टाइम्स के मुताबिक, कुछ लोगों ने शहर काजी के आवास पर पहुंचकर पथराव किया।

पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को वहां से हटाया। घटना के बाद शहर काजी के घर के बाहर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। पुलिस ने प्रदर्शन और पथराव से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज करने की बात कही है।

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी पुलिस के रडार पर

उज्जैन पुलिस ने सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भ्रामक जानकारी फैलाने और माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस के मुताबिक, सोमवार को 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिनमें पांच सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बताए गए हैं। इन पर कथित तौर पर गलत सूचना फैलाने और शांति व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप हैं। फिलहाल इन आरोपों को पुलिस का पक्ष माना जाना चाहिए; मामले की कानूनी प्रक्रिया के दौरान आरोपों की पुष्टि अदालत में होगी।

10 लोगों पर केस, कई हिरासत में

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें पांच ऐसे लोग बताए गए हैं जिन पर सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने का आरोप है, जबकि अन्य पांच लोगों को पुलिस ने बाहरी बताया है।

वेबदुनिया ने भी 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर और पांच सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के नाम मामले में होने की जानकारी दी है। हालांकि गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए आगे की आधिकारिक पुलिस जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

2,000 से 2,500 से ज्यादा जवान तैनात

तनाव को देखते हुए उज्जैन में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। अलग-अलग रिपोर्टों में सुरक्षा बल की संख्या 2,000 से 2,500 से अधिक बताई गई है। आसपास के जिलों से भी पुलिस बल बुलाया गया है।

प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग की है और पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए भी स्थिति पर नजर रखे जाने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासन का फोकस शांति बनाए रखने पर

उज्जैन पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है। पुलिस का कहना है कि मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया मुस्लिम समाज और मस्जिद कमेटी की सहमति से आगे बढ़ रही है।

पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि पथराव, भीड़ जुटाने और कथित तौर पर सोशल मीडिया के जरिए माहौल बिगाड़ने वालों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रात में बनी सहमति, सुबह फिर क्यों भड़का विवाद?

उज्जैन की घटना का सबसे अहम पहलू यही है कि जिस मुद्दे पर रविवार रात बातचीत के बाद सहमति बन गई थी, वही मामला सोमवार सुबह फिर तनाव में बदल गया। एक तरफ मुस्लिम समाज के कुछ लोग मस्जिद के प्रभावित हिस्से को खुद हटाने की प्रक्रिया में शामिल हुए, वहीं दूसरी तरफ विरोध कर रही भीड़ और पुलिस के बीच टकराव हो गया।

इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए पूरा करना और दूसरी ओर अफवाहों तथा सोशल मीडिया पर फैल रही सूचनाओं के कारण तनाव को बढ़ने से रोकना।

फिलहाल पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। मामले में दर्ज एफआईआर और हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर होगी।