नई दिल्ली: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोप दोहराते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़कर इस मामले में सरकारी गवाह बनना चाहिए।
राहुल गांधी का हमला केवल चुनाव आयोग तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी पर भी गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेता के राजनीतिक दावे हैं और इन पर बीजेपी तथा चुनाव आयोग की ओर से अलग-अलग जवाब सामने आया है।
‘BJP के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी क्यों नहीं?’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इंकम्बेंसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में सरकारों के खिलाफ समय के साथ असंतोष पैदा होना सामान्य बात है और इसका असर अलग-अलग दलों पर दिखाई देता रहा है।
राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी थी, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें भी सत्ता विरोधी माहौल का सामना करना पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के मामले में यह राजनीतिक पैटर्न क्यों दिखाई नहीं देता।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों में सत्ता का आना-जाना और चुनावी नतीजों का बदलना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। उनके मुताबिक, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के लिए सत्ता विरोधी लहर दिखाई देती है, लेकिन बीजेपी के संदर्भ में इसे लेकर सवाल बने हुए हैं।
‘वोट चोरी से कानून और संस्था चोरी’
राहुल गांधी ने अपने आरोपों को एक व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक तर्क से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद वोट है। उनका कहना था कि यदि मतदान प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होते हैं तो उसके बाद बनने वाले कानून और संस्थाओं की वैधता पर भी सवाल उठते हैं।
उन्होंने इसे ‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी’ की कड़ी के रूप में पेश किया। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर हुई और उनके पास इसके संबंध में ठोस जानकारी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि चुनावों में धांधली और ‘वोट चोरी’ के ये दावे राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी का पक्ष अलग है।
ज्ञानेश कुमार से क्यों मांगा इस्तीफा?
राहुल गांधी का कहना है कि चुनाव आयोग मतदाता के वोट का संस्थागत संरक्षक है और इसलिए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को मौजूदा विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि CEC इस्तीफा देकर पूरे मामले में जानकारी सामने लाते हैं तो यह देशहित में होगा।
राहुल गांधी की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उस रिपोर्ट के एक दिन बाद हुई जिसमें दावा किया गया था कि SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर दो अन्य चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों में कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में ऐसी 14 आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग की ओर से अलग तस्वीर पेश की गई है। आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन इससे आयोग का अंतिम फैसला अलग या विभाजित नहीं माना जा सकता।
NDTV और इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR समेत आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। यानी व्यक्तिगत स्तर पर व्यक्त की गई राय और आयोग के अंतिम निर्णय में अंतर है।
यही बिंदु मौजूदा विवाद का अहम हिस्सा बन गया है—एक तरफ आंतरिक बैठकों में कथित आपत्तियों की रिपोर्ट है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम फैसलों में कोई असहमति नहीं थी।
बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों पर क्या कहा?
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बीजेपी ने भी तीखा पलटवार किया। बीजेपी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के एंटी-इंकम्बेंसी वाले तर्क पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के अलग-अलग राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने का उदाहरण दिया।
बीजेपी का तर्क है कि सत्ता विरोधी लहर केवल बीजेपी के संदर्भ में नहीं देखी जा सकती और अलग-अलग राज्यों में चुनावी नतीजों का अपना राजनीतिक इतिहास है। त्रिवेदी ने राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर लगाए गए आरोपों के स्रोत और आधार पर भी सवाल उठाए।
बीजेपी ने यह भी कहा कि मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी जिन दावों का हवाला दे रहे हैं, उनमें चुनाव आयुक्तों के सीधे सार्वजनिक बयान और मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
विवाद की जड़ में SIR क्या है?
Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। मौजूदा राजनीतिक विवाद इसी प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों और विपक्ष की आपत्तियों से जुड़ा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि SIR के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। चुनाव आयोग ने हालांकि कहा कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए।
अब आगे क्या?
राहुल गांधी की मांग के बाद CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ दिया है, जबकि बीजेपी आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उनका जवाब दे रही है।
इस बीच, चुनाव आयोग का पक्ष यह है कि उसके औपचारिक निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR से जुड़ी प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और तथ्य इस राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकते हैं।


