राजनीति

‘मंगल मिलन’ में NDA का प्लान तैयार, विपक्ष पर दबाव की रणनीति; पैलेट गन मुद्दे पर राहुल गांधी के निशाने पर अमित शाह

नई दिल्ली | राष्ट्रीय डेस्क

संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच सत्तारूढ़ NDA ने अपनी रणनीति को और धार देने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ‘मंगल मिलन’ बैठक में गठबंधन की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। इसी बीच छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा विपक्ष लगातार संसद में उठा रहा है।

सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष से सदन चलाने और मुद्दों पर चर्चा के लिए आगे आने की अपील की जा रही है, जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दल गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई को लेकर जवाब मांग रहे हैं। इस पूरे विवाद ने मानसून सत्र की राजनीति को और तीखा कर दिया है।

‘मंगल मिलन’ में NDA की रणनीति पर मंथन

NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक को गठबंधन की संसदीय रणनीति तय करने के अहम मंच के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत NDA के प्रमुख नेता शामिल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार की कोशिश है कि संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़े और विपक्ष के लगातार विरोध के बीच सदन की कार्यवाही बाधित न हो।

‘मंगल मिलन’ नाम से NDA की संसदीय बैठक को मानसून सत्र के दौरान इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बैठक के जरिए सरकार अपने सहयोगी दलों के साथ समन्वय और सदन की रणनीति पर चर्चा करती रही है।

अमित शाह बोले- चर्चा के लिए तैयार, विपक्ष पर पलटवार

Navbharat Times की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह को विपक्ष के साथ चर्चा के लिए तैयार बताया गया है। संसदीय कार्य मंत्री ने भी विपक्ष से बातचीत और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की है।

सत्ता पक्ष का तर्क है कि संसद में किसी भी मुद्दे पर बहस हो सकती है, लेकिन इसके लिए सदन का सुचारु रूप से चलना जरूरी है। वहीं विपक्ष का कहना है कि छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर पहले सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब आना चाहिए।

यही असहमति फिलहाल संसद के गतिरोध की बड़ी वजह बनी हुई है।

पैलेट गन पर सबसे बड़ा टकराव

20 जुलाई को दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के बाद कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद तक पहुंच गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर जवाबदेही तय करने की मांग की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश किस स्तर पर दिया गया और गृह मंत्रालय को इसकी जानकारी थी या नहीं।

राहुल गांधी ने बाद में भी इस मुद्दे पर अपना रुख कायम रखा और अमित शाह की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए।

पुलिस का शुरुआती दावा कुछ और था

इस विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू दिल्ली पुलिस का शुरुआती रुख है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाए जाने के दावों को खारिज किया था और कहा था कि उसके पास इस तरह के हथियार नहीं थे और उनका इस्तेमाल नहीं किया गया।

एक अन्य पुलिस फैक्ट-चेक में एक प्रदर्शनकारी को गोली लगने के दावे पर भी सवाल उठाए गए थे। पुलिस के मुताबिक संबंधित मेडिकल रिपोर्ट में गोली लगने का प्रमाण नहीं मिला था और चोट को कुंद वस्तु से लगी चोट बताया गया था।

लेकिन इसके बाद पुलिस की जनरल डायरी से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल का उल्लेख होने का दावा किया गया। इस रिपोर्ट के मुताबिक अब GD एंट्री, SOP के पालन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

यही विरोधाभासी जानकारी इस मामले को और संवेदनशील बना रही है।

राहुल गांधी ने संसद में जवाब की मांग की

कांग्रेस इस मामले को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं मान रही, बल्कि इसे युवाओं और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रही है। राहुल गांधी ने घायल छात्रों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

विपक्ष की मांग है कि गृह मंत्री संसद में इस मामले पर स्पष्ट बयान दें और यह बताया जाए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की अनुमति दी गई थी।

सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत की कोशिश

सरकार की ओर से संकेत दिए जा रहे हैं कि वह विपक्ष के साथ चर्चा के लिए तैयार है। लेकिन विपक्ष की कुछ मांगें फिलहाल राजनीतिक गतिरोध का कारण बनी हुई हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, विपक्ष गृह मंत्री के बयान के साथ-साथ छात्रों पर कार्रवाई, प्रधानमंत्री से माफी और अन्य मुद्दों पर भी स्पष्ट जवाब चाहता है। वहीं सरकार का कहना है कि संसद में बहस और चर्चा के लिए विपक्ष को सदन की कार्यवाही चलने देनी चाहिए।

यानी दोनों पक्षों के बीच ‘पहले चर्चा या पहले सदन चलना’ को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी है।

NDA की एकजुटता पर भी जोर

‘मंगल मिलन’ बैठक केवल विपक्ष के मुद्दों का जवाब देने तक सीमित नहीं है। यह बैठक NDA के भीतर समन्वय और एकजुटता बनाए रखने की रणनीति का भी हिस्सा है।

मानसून सत्र के दौरान नए सहयोगियों और गठबंधन के घटक दलों के साथ सरकार का समन्वय लगातार चर्चा में रहा है। NCPI के सांसदों को भी NDA की संसदीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था।

सत्ता पक्ष के लिए यह संख्या और सहयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाने के लिए सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत रहती है।

आगे क्या होगा?

अब नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर कोई मध्य रास्ता निकलता है या नहीं।

अगर गृह मंत्री संसद में इस मामले पर बयान देते हैं तो विपक्ष की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, यदि विपक्ष अपनी मांगों पर कायम रहता है और सदन की कार्यवाही बाधित होती रहती है, तो मानसून सत्र के बचे हुए समय पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

फिलहाल ‘मंगल मिलन’ से NDA ने अपनी संसदीय एकजुटता और रणनीतिक तैयारी का संकेत दिया है, जबकि विपक्ष छात्रों पर कथित कार्रवाई को सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलने की कोशिश कर रहा है।

इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों की आधिकारिक और निष्पक्ष जांच का है। जब तक जांच से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती, किसी एक दावे को अंतिम तथ्य मानना जल्दबाजी होगी।