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5500 से ज्यादा आवेदन, 16 इंटरव्यू और फिर तीन नामों की रेस… ऐसे चुने गए राम मंदिर के पहले CEO जितेंद्र मिश्र

अयोध्या। राम मंदिर की भव्यता के साथ अब उसके प्रशासन और संचालन को भी नए ढंग से व्यवस्थित करने की तैयारी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है।

लेकिन जितेंद्र मिश्र तक पहुंचने का यह फैसला किसी एक बैठक में नहीं हुआ। इस पद के लिए देशभर से 5,585 आवेदन आए। आवेदनों की स्क्रीनिंग से लेकर ऑनलाइन बातचीत, अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू और फिर प्राथमिकता के आधार पर नामों का पैनल तैयार करने तक पूरी प्रक्रिया कई चरणों में आगे बढ़ी। आखिरकार पहली प्राथमिकता वाले तीन नामों में सबसे ऊपर रहे जितेंद्र मिश्र के नाम पर ट्रस्ट ने अंतिम मुहर लगा दी।

पहली पसंद के तीन नाम कौन थे?

ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन के अनुसार, सर्च कमेटी ने छह नामों को दो प्राथमिकता वाले पैनल में बांटा था। पहली प्राथमिकता वाले पैनल में तीन नाम थे।

सबसे ऊपर एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का नाम रखा गया था। दूसरे नंबर पर मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह विश्वास राव और तीसरे स्थान पर श्रुति भारद्वाज का नाम था।

यानी अंतिम चरण में मुकाबला इन तीन उम्मीदवारों के बीच था। इनके अलावा तीन अन्य नाम दूसरी प्राथमिकता वाले पैनल में रखे गए थे।

5585 आवेदनों से शुरू हुई थी तलाश

राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासन और संचालन के लिए पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया जुलाई में शुरू की थी।

6 जुलाई को इस दिशा में निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ी और इसके बाद तीन सदस्यीय चयन समिति गठित की गई। 13 जुलाई को CEO पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 18 जुलाई थी।

जब आवेदन प्रक्रिया पूरी हुई तो ट्रस्ट को कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों के बाद उम्मीदवारों की छंटनी कई चरणों में की गई।

600 अंकों के मूल्यांकन से हुई पहली बड़ी छंटनी

इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों में से योग्य उम्मीदवारों को अलग करने के लिए तकनीकी और मैनुअल स्क्रीनिंग की गई।

चयन प्रक्रिया में 600 अंकों के मूल्यांकन फॉर्म का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक 3,577 उम्मीदवारों ने इस मूल्यांकन में हिस्सा लिया। इनमें से 470 या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले 108 उम्मीदवार अगले चरण में पहुंचे।

इसके बाद चयन प्रक्रिया और सिमटती गई।

108 से 16 उम्मीदवार, फिर आमने-सामने इंटरव्यू

अगस्त के पहले सप्ताह में 108 उम्मीदवारों में से 16 उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। 3 से 6 अगस्त के बीच इन उम्मीदवारों से ऑनलाइन बातचीत और इंटरव्यू किए गए।

इसके बाद 11 और 12 अगस्त को इन 16 उम्मीदवारों का अयोध्या में आमने-सामने साक्षात्कार हुआ।

यहीं से चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंची। सर्च कमेटी ने उम्मीदवारों के अनुभव, नेतृत्व क्षमता और अन्य मानकों के आधार पर अंतिम नामों पर विचार किया।

तीन सदस्यीय कमेटी ने तैयार किया छह नामों का पैनल

26 अगस्त तक प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई थी। इसके बाद 1 सितंबर को तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट के साथ छह नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा।

इस पैनल में तीन नाम पहली प्राथमिकता और तीन दूसरी प्राथमिकता के तौर पर रखे गए थे।

पहली प्राथमिकता में जितेंद्र मिश्र का नाम सबसे ऊपर था। यही क्रम बाद में अंतिम फैसले में भी निर्णायक साबित हुआ।

कौन हैं जितेंद्र मिश्र?

जितेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल हैं। उन्होंने वायुसेना में करीब 39 साल सेवा की और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

रिपोर्टों के मुताबिक, वह एक अनुभवी फाइटर पायलट रहे हैं और भारतीय वायुसेना में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका निभा चुके हैं। वह वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख भी रहे और 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस कमान का नेतृत्व कर रहे थे।

यही सैन्य और प्रशासनिक अनुभव उनके चयन की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।

राम मंदिर को CEO की जरूरत क्यों पड़ी?

राम मंदिर अब केवल निर्माणाधीन परियोजना नहीं है। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और आने वाले समय में यहां आने वाले लोगों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

ऐसे में ट्रस्ट के सामने मंदिर संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं।

एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को इसी बढ़ती प्रशासनिक जरूरत के संदर्भ में देखा जा रहा है। Times of India ने भी इस नियुक्ति को मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन को अधिक पेशेवर और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

मंदिर प्रबंधन में बड़ा बदलाव

जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति अकेला बदलाव नहीं है। राम मंदिर ट्रस्ट में हाल में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव हुए हैं।

ट्रस्ट ने स्वामी गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाया है। इसके अलावा महेश भगचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. निर्मला यादव और मदन मोहन पांडे को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है।

इन बदलावों के बीच CEO की नियुक्ति को मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को अधिक संस्थागत और पेशेवर बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

अब CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?

जितेंद्र मिश्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे धार्मिक परिसर का संचालन करना होगा, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और जिसकी गतिविधियां राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सुर्खियों में रहती हैं।

उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ ट्रस्ट के विभिन्न विभागों और बाहरी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाना होगा। मंदिर परिसर में बढ़ती भीड़, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और संचालन की दक्षता आने वाले समय में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल हो सकती है।

इसके अलावा ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में निगरानी तथा पारदर्शिता बढ़ाना भी इस नई व्यवस्था की महत्वपूर्ण कसौटी होगी।

5500 आवेदनों से एक नाम तक का सफर

राम मंदिर के पहले CEO की नियुक्ति की कहानी अपने आप में इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यह किसी सामान्य नियुक्ति की तरह नहीं हुई।

5,585 आवेदन → 3,577 मूल्यांकन में शामिल → 108 उम्मीदवार → 16 इंटरव्यू → छह नामों का पैनल → तीन पहली पसंद के उम्मीदवार → और अंत में जितेंद्र मिश्र।

2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में इस पूरी चयन प्रक्रिया का अंतिम पड़ाव आया और एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO घोषित कर दिया गया।

अब देखना यह होगा कि सैन्य सेवा से मिले अनुशासन, नेतृत्व और प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल जितेंद्र मिश्र अयोध्या में मंदिर की बढ़ती जिम्मेदारियों को संभालने में किस तरह करते हैं।