राजनीति

दतिया की हार के बाद दिल्ली पहुंचे नरोत्तम मिश्रा, बोले- ‘हर भूमिका के लिए तैयार हूं’; मोहन यादव पर भी छोड़ा फैसला

भोपाल/नई दिल्ली | मध्य प्रदेश डेस्क

मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी को दतिया सीट पर मिली हार के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा दिल्ली पहुंचे। उनके दिल्ली दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, मिश्रा ने किसी खास नेता से मुलाकात की बात से इनकार किया है और कहा कि वह पार्टी की ओर से दी जाने वाली हर भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

दिल्ली पहुंचने पर क्या बोले नरोत्तम मिश्रा?

दिल्ली पहुंचने के बाद जब नरोत्तम मिश्रा से पूछा गया कि वह यहां किससे मिलने आए हैं, तो उन्होंने किसी निर्धारित राजनीतिक मुलाकात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मुलाकात का कोई प्रश्न ही नहीं है।

हालांकि, जब उनसे पार्टी में अपनी संभावित भूमिका को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मिश्रा ने संकेत दिया कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

‘मोहन यादव ज्यादा बेहतर बता पाएंगे’

दतिया में बीजेपी की हार और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर सवाल पूछे जाने पर नरोत्तम मिश्रा ने सीधे तौर पर विस्तृत टिप्पणी करने के बजाय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम लिया।

उन्होंने कहा कि इस विषय में मोहन यादव ज्यादा बेहतर जानकारी दे सकते हैं। मिश्रा का यह जवाब ऐसे समय आया है जब दतिया उपचुनाव के परिणाम के बाद बीजेपी के भीतर हार के कारणों और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

दतिया बीजेपी के लिए क्यों अहम है?

दतिया लंबे समय से नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पहचान से जुड़ा प्रमुख क्षेत्र रहा है। ऐसे में उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार ने पार्टी की स्थानीय रणनीति और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

चुनाव से पहले भी दतिया में टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रही थीं। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी की खबरें सामने आई थीं, जबकि बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। टिकट घोषणा के बाद समर्थकों के विरोध और सड़क जाम जैसी घटनाओं ने भी दतिया चुनाव को सुर्खियों में रखा था।

हार के बाद नरोत्तम की ‘नई भूमिका’ पर चर्चा

दतिया के परिणाम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी संगठन नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को किस तरह देखता है। उनका यह कहना कि वह हर भूमिका के लिए तैयार हैं, इस चर्चा को और हवा देता है।

हालांकि, अभी तक पार्टी की ओर से नरोत्तम मिश्रा के लिए किसी नई जिम्मेदारी की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए उनके दिल्ली दौरे को किसी नियुक्ति या संगठनात्मक बदलाव से जोड़कर देखना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

क्या दिल्ली दौरा किसी बड़े बदलाव का संकेत है?

नरोत्तम मिश्रा का दिल्ली पहुंचना ऐसे समय हुआ है जब दतिया के उपचुनाव परिणाम को लेकर बीजेपी में समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। यही वजह है कि उनके दौरे को लेकर राजनीतिक अटकलें स्वाभाविक हैं।

लेकिन मिश्रा ने स्वयं किसी खास मुलाकात की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में फिलहाल दो बातें स्पष्ट हैं—पहली, वह पार्टी नेतृत्व के फैसले के लिए तैयार हैं और दूसरी, दतिया की हार पर अंतिम राजनीतिक आकलन के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर संकेत किया है।

बीजेपी के लिए दतिया का नतीजा क्या संदेश देता है?

दतिया का परिणाम बीजेपी के लिए स्थानीय संगठन, उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति की समीक्षा का विषय बन सकता है। खासतौर पर उस सीट पर हार, जो लंबे समय तक नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पकड़ से जोड़ी जाती रही है, पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

अब निगाहें बीजेपी की संभावित समीक्षा बैठक और नेतृत्व के अगले कदम पर रहेंगी। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी भविष्य में नरोत्तम मिश्रा को किस जिम्मेदारी में देखती है।

फिलहाल नरोत्तम मिश्रा ने अपने बयान से इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी उन्हें जो जिम्मेदारी देगी, उसे निभाने के लिए वह तैयार हैं। यही बयान मध्य प्रदेश बीजेपी की आगे की राजनीति में उनके भविष्य को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है।