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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उबाल: JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज, वायरल वीडियो ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें

रांची | राष्ट्रीय डेस्क

झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में हजारों अभ्यर्थी रांची में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर आंदोलन से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे यह मुद्दा अब राज्य की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता की कमी रही है। उनका कहना है कि वर्षों से भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, कथित अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया पर उठते सवालों ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है।

छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—

  • JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच।
  • कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच (कुछ संगठनों ने CBI जांच की मांग भी उठाई है)।
  • नियमित और समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए।
  • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
  • लंबित नियुक्तियों को जल्द पूरा किया जाए।

रांची बना आंदोलन का केंद्र

रांची में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हैं। कई छात्र पिछले कई दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था की मांग के लिए है। आंदोलन के दौरान कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।

वायरल वीडियो ने खींचा देश का ध्यान

आंदोलन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रखते दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो के वायरल होने के बाद देशभर के प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों और विभिन्न छात्र संगठनों ने भी झारखंड के छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है।

सरकार का क्या कहना है?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी सरकार छात्रों के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर संवेदनशील है और किसी भी वास्तविक शिकायत की अनदेखी नहीं की जाएगी।

राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा

जैसे-जैसे आंदोलन लंबा खिंच रहा है, विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन भी छात्रों के समर्थन में सामने आने लगे हैं। कुछ विपक्षी दलों ने भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की है, जबकि छात्र संगठनों ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों ने आने वाले दिनों में तिरंगा मार्च और विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रमों की भी घोषणा की है।

आगे क्या?

झारखंड का यह आंदोलन अब केवल एक भर्ती परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है। यह युवाओं के रोजगार, सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर व्यापक बहस का विषय बन चुका है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम, संभावित जांच और प्रदर्शनकारियों के साथ होने वाली बातचीत पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन के और व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।