नई दिल्ली/छत्रपति संभाजीनगर | राष्ट्रीय डेस्क
NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और परीक्षा सुधार को लेकर देशव्यापी छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान या आंदोलन नहीं, बल्कि उनका निजी फैसला है। दिपके ने फिलहाल विवाह टालने का निर्णय लिया है। उनके परिवार का कहना है कि वह पहले अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं और उसके बाद ही विवाह के बारे में विचार करेंगे।
परिवार ने क्या कहा?
अभिजीत दिपके की मां ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले दो वर्षों से परिवार को कई वैवाहिक प्रस्ताव मिले, लेकिन अभिजीत ने सभी प्रस्ताव विनम्रता से ठुकरा दिए। परिवार के अनुसार उनका मानना है कि जब तक शिक्षा पूरी नहीं हो जाती और स्वयं के पैरों पर खड़े नहीं हो जाते, तब तक विवाह करना उचित नहीं होगा। यही कारण है कि उन्होंने फिलहाल अपना पूरा ध्यान पढ़ाई और सार्वजनिक जीवन से जुड़े दायित्वों पर केंद्रित रखा है।
आंदोलन के बाद भी जारी रहेगा अभियान
हाल ही में जंतर-मंतर पर चले लंबे छात्र आंदोलन के समापन के बाद अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि परीक्षा सुधार की लड़ाई समाप्त नहीं हुई है। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास बहाल करना है। उन्होंने समर्थकों से भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहने की अपील की।
छात्रों के समर्थन में दिया संदेश
छत्रपति संभाजीनगर लौटने के बाद आयोजित कार्यक्रम में अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन में शामिल छात्र अपराधी या राष्ट्रविरोधी नहीं हैं, बल्कि अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद स्थापित किया जाए और उनके खिलाफ किसी प्रकार की अनावश्यक कार्रवाई से बचा जाए।
परीक्षा सुधार बना राष्ट्रीय मुद्दा
देशभर में NEET सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए प्रदर्शनों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर व्यापक बहस छेड़ दी है। हाल के सप्ताहों में केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें सख्त कानून और प्रशासनिक सुधारों की पहल शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर दंड पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शी परीक्षा प्रबंधन और समयबद्ध जांच व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक होगी।
निजी फैसले ने भी बटोरी सुर्खियां
राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के बीच अभिजीत दिपके का विवाह टालने का निर्णय भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोगों ने इसे उनके व्यक्तिगत जीवन और सार्वजनिक दायित्वों के बीच प्राथमिकताओं का संकेत माना है। हालांकि दिपके या उनके परिवार ने इसे पूरी तरह निजी निर्णय बताते हुए कहा है कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान शिक्षा, आत्मनिर्भरता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर है।


