नई दिल्ली | 4 सितंबर 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक पुराने प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित मारपीट का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के बाद विवाद ने नया मोड़ लिया है। इसी मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास और पार्टी के अन्य सदस्य शुक्रवार को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे।
CJP की मांग है कि प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। संगठन ने पुलिस से गिरफ्तारी और मामले में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग उठाई है। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक दबाव या किसी प्रभाव में कार्रवाई न करने के आरोपों को खारिज किया है।
वीडियो सामने आने के बाद फिर गरमाया मामला
विवाद की शुरुआत जून में जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, 23 जून को प्रदर्शन के दौरान गाजियाबाद निवासी संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। वह छात्रा निशु आजाद के पिता हैं।
हाल में एक वीडियो सामने आया, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर संजय कुमार के साथ हुई झड़प और मारपीट को लेकर बात करते नजर आए। वीडियो के सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और मामले को दोबारा जोर-शोर से उठाने का फैसला किया।
हालांकि, वीडियो में किए गए दावों और घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान हैं। इसलिए किसी भी दावे को अंतिम तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
CJP ने संसद मार्ग थाने का किया रुख
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने पहले ही घोषणा की थी कि संगठन के सदस्य शुक्रवार सुबह संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचेंगे। इसके बाद संगठन के सदस्य थाने पहुंचे और मामले में कार्रवाई की मांग की।
CJP का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हुई घटना में संजय कुमार को गंभीर चोट आई थी और पुलिस को मामले में कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी मामले को लेकर पुलिस पर दबाव बनाने और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
मामले में दिल्ली पुलिस का रुख CJP के आरोपों से अलग है। पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
पुलिस के मुताबिक, संजय कुमार को लगी चोट की मेडिकल जांच की गई थी। पुलिस का कहना है कि चोट किसी हथियार से नहीं, बल्कि कथित झड़प के दौरान आरोपी के हाथ में पहने कड़े से लगी थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को मामूली बताया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में किसी राजनीतिक दबाव का प्रभाव नहीं था। अधिकारियों के अनुसार, मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का भी आया पक्ष
वायरल वीडियो को लेकर विवाद बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने बयान की अलग व्याख्या दी है। उन्होंने दावा किया कि उस समय की स्थिति में उन्होंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी और उन्हें खुद भी अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हुआ था।
इसलिए मामले में एक तरफ CJP वीडियो में कही गई बातों को आधार बनाकर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं भारद्वाज अपने कृत्य को आत्मरक्षा के संदर्भ में बता रहे हैं। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
निशु आजाद के मामले ने पहले भी खींचा था ध्यान
निशु आजाद उन छात्र प्रदर्शनकारियों में शामिल रही हैं, जिनके विरोध प्रदर्शन का संबंध परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों से रहा है। CJP के आंदोलन के दौरान यह मामला पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है।
हाल के घटनाक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी निशु आजाद को समर्थन देते हुए कहा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है और वह उनके साथ हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं।
पहले भी विवादों में रहा है CJP का आंदोलन
यह पहली बार नहीं है जब CJP का कोई प्रदर्शन दिल्ली पुलिस के साथ टकराव या कानूनी विवाद के चलते चर्चा में आया हो। जुलाई में CJP के संसद मार्च के दौरान भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। उस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग थानों में कई प्राथमिकी दर्ज की थीं।
हालांकि, सितंबर की मौजूदा कार्रवाई का केंद्र जून में जंतर-मंतर पर हुई कथित मारपीट और उसके बाद सामने आया वीडियो है।
अब जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि वायरल वीडियो में किए गए दावों और पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों के बीच वास्तविक स्थिति क्या है। CJP आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की गई है और किसी राजनीतिक दबाव का सवाल नहीं है।
ऐसे में आगे की जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य यह तय करेंगे कि घटना की वास्तविक प्रकृति क्या थी और आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में कार्रवाई बनती है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावे सामने हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकल सकेगा।


