नई दिल्ली: दिल्ली में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में विपक्षी एकता की तस्वीरें खूब चर्चा में रहीं। सोनिया गांधी और ममता बनर्जी एक साथ बैठीं, एक-दूसरे का समर्थन करती नजर आईं और बैठक के बाद भी दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी दिखाई दी। लेकिन इसी बैठक के बाद एक सवाल ने सियासी चर्चा को दूसरी दिशा दे दी—2029 के लोकसभा चुनाव में INDIA ब्लॉक का प्रधानमंत्री पद का चेहरा कौन होगा?
पत्रकारों ने जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से पूछा कि क्या राहुल गांधी 2029 में विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे, तो उन्होंने सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। पहले उन्होंने कहा कि इस बारे में अगले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। दोबारा सवाल किए जाने पर उन्होंने पत्रकार से ही कहा—“आप होंगे आप।”
यह प्रतिक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बैठक में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और SIR जैसे मुद्दों पर संयुक्त रणनीति बनाने की बात तो की, लेकिन 2029 के लिए किसी एक नेता को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया गया।
बैठक में सोनिया-ममता की दिखी गर्मजोशी
INDIA ब्लॉक की बैठक में सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच जिस तरह की बॉन्डिंग दिखाई दी, वह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी।
दोनों नेता बैठक के दौरान साथ बैठीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी बात रखी, तब सोनिया गांधी ने उनका समर्थन किया। ममता के संबोधन के बाद सोनिया गांधी ने उनकी पीठ थपथपाई और दोनों के बीच गर्मजोशी का दृश्य कैमरों में कैद हुआ।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में आने के लिए सोनिया गांधी को मनाने में ममता बनर्जी की भूमिका होने की बात सूत्रों के हवाले से सामने आई है। हालांकि, यह बात आधिकारिक तौर पर दोनों नेताओं की ओर से पुष्ट नहीं की गई है।
फिर राहुल गांधी के नाम पर ममता ने क्यों नहीं दिया जवाब?
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प राजनीतिक पहलू है।
राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे से जुड़े सवाल पर ममता बनर्जी ने न तो समर्थन जताया और न ही विरोध। उन्होंने सवाल को टाल दिया। बाद में पत्रकार के दोबारा पूछने पर उनका जवाब था—“आप होंगे आप।”
इससे इतना जरूर स्पष्ट होता है कि 2029 के लिए INDIA ब्लॉक की ओर से राहुल गांधी के नाम की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, ममता की इस प्रतिक्रिया को राहुल गांधी की उम्मीदवारी के खिलाफ स्पष्ट बयान के रूप में पेश करना भी सही नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने ऐसा सीधे तौर पर नहीं कहा।
यानी फिलहाल तस्वीर यह है कि गठबंधन के नेता कई मुद्दों पर साथ खड़े होने की बात कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद के चेहरे का सवाल अभी खुला हुआ है।
बैठक का असली एजेंडा क्या था?
दरअसल, बुधवार की बैठक का मुख्य एजेंडा 2029 के प्रधानमंत्री पद का चेहरा तय करना नहीं था। विपक्षी दलों की बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को लेकर रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई थी।
बैठक के बाद विपक्षी नेताओं ने संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की। 2 अक्टूबर से जिला स्तर पर कार्यक्रम और 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों की ओर से चुनाव आयोग तक मार्च की योजना की जानकारी सामने आई है।
ममता बनर्जी ने भी बैठक में विपक्षी एकता पर जोर दिया और गठबंधन के बाहर के दलों को भी साथ लाने की जरूरत बताई। वहीं राहुल गांधी ने चुनावी मुद्दों पर संयुक्त लड़ाई की बात रखी।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
बैठक में राहुल गांधी ने विपक्षी दलों से एकजुट होकर राजनीतिक लड़ाई लड़ने पर जोर दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इसे लंबी राजनीतिक लड़ाई बताते हुए विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने विपक्ष का दायरा INDIA ब्लॉक से आगे बढ़ाने की बात कही। यानी दोनों नेताओं के बीच तत्काल मुद्दे पर व्यापक सहमति दिखाई दी, लेकिन भविष्य में गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा, इस सवाल का कोई स्पष्ट उत्तर सामने नहीं आया।
क्या सोनिया-ममता की नजदीकी का मतलब कांग्रेस-TMC की नई राजनीतिक समझ है?
सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात और बैठक के दौरान उनकी नजदीकी निश्चित तौर पर चर्चा में है। लेकिन सिर्फ तस्वीरों या एक बैठक के आधार पर दोनों दलों के बीच भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।
इतना जरूर है कि चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर दोनों दल फिलहाल एक मंच पर दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले भी ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से विपक्षी दलों को साथ बैठाने और संयुक्त रणनीति बनाने को लेकर बातचीत की थी।
2029 के चेहरे पर अभी भी सस्पेंस
INDIA ब्लॉक की राजनीति में प्रधानमंत्री पद का चेहरा पहले से ही एक संवेदनशील सवाल रहा है। अलग-अलग दलों के अपने राजनीतिक आधार और नेतृत्व हैं। ऐसे में 2029 के लिए किसी एक नेता का नाम तय करना गठबंधन के भीतर व्यापक सहमति का विषय होगा।
फिलहाल बुधवार की बैठक से जो बात सामने आई, वह यह है कि विपक्ष ने तत्काल राजनीतिक मुद्दों पर साथ चलने की रणनीति पर जोर दिया है, लेकिन प्रधानमंत्री पद के चेहरे पर कोई औपचारिक फैसला नहीं हुआ है।
ममता बनर्जी की राहुल गांधी के नाम पर चुप्पी ने इस चर्चा को जरूर फिर हवा दे दी है। दूसरी ओर, सोनिया गांधी के साथ उनकी गर्मजोशी ने यह संकेत दिया कि कम से कम मौजूदा मुद्दों पर दोनों दलों के बीच संवाद और साथ काम करने की गुंजाइश बनी हुई है।
अब निगाहें गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस और आने वाले दिनों में विपक्षी दलों की बैठकों पर रहेंगी। वहीं से यह साफ हो सकता है कि INDIA ब्लॉक की रणनीति केवल मौजूदा चुनावी मुद्दों तक सीमित रहती है या 2029 के नेतृत्व को लेकर भी कोई औपचारिक चर्चा आगे बढ़ती है।


