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राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, UCC समेत कई मुद्दों पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने; चुनाव से पहले सदन में सियासी तापमान बढ़ने के आसार

जयपुर। राजस्थान की 16वीं विधानसभा का छठा सत्र गुरुवार, 20 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है। विधानसभा के आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक सत्र 20 से 27 अगस्त तक निर्धारित है। हालांकि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए इस छोटे सत्र का महत्व काफी बढ़ गया है।

सत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक वजह समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक है। भजनलाल शर्मा सरकार कैबिनेट से मंजूरी पा चुके UCC विधेयक को सदन में लाने की तैयारी में है। इसके साथ ही राजस्थान ट्री प्रोटेक्शन बिल भी सरकार के प्रमुख विधायी एजेंडे में है। ऐसे में सदन में कानून और नीतिगत मुद्दों के साथ-साथ इन प्रस्तावों पर राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है।

UCC पर सबसे ज्यादा नजर, सरकार के लिए राजनीतिक परीक्षा

राजस्थान में UCC को लेकर सरकार की तैयारी पिछले कुछ समय से चल रही थी। कैबिनेट ने 13 अगस्त को इसके प्रारूप को मंजूरी दी थी और इसे विधानसभा सत्र में पेश किए जाने की जानकारी दी गई थी। सरकार का कहना है कि प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप समान नागरिक कानून की दिशा में कदम है।

UCC का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। प्रस्तावित कानून को लेकर सरकार और विपक्ष के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में विधेयक सदन में आते ही लंबी बहस और राजनीतिक टकराव की संभावना है।

ट्री प्रोटेक्शन बिल भी सरकार के एजेंडे में

UCC के साथ सरकार राजस्थान ट्री प्रोटेक्शन बिल को भी आगे बढ़ा रही है। कैबिनेट की मंजूरी के मुताबिक प्रस्तावित कानून में खेजड़ी सहित कई अधिसूचित वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण और अवैध कटाई पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

सरकार इसे पर्यावरण संरक्षण और राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। वहीं सदन में इसके प्रावधानों, अनुमति प्रक्रिया और दंड व्यवस्था को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेर सकता है?

कांग्रेस और विपक्ष के सामने इस सत्र में केवल UCC ही मुद्दा नहीं होगा। बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं, पेपर लीक, महंगाई और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे विषय विपक्ष के निशाने पर रह सकते हैं।

विपक्ष पहले से ही विधानसभा का सत्र लंबा करने की मांग करता रहा है। ऐसे में सीमित अवधि के सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान की संभावना बनी हुई है।

विपक्ष की रणनीति सरकार के विधायी एजेंडे के साथ-साथ उन मुद्दों को सदन के केंद्र में लाने की होगी जिनका सीधा संबंध आम मतदाता से है।

सिर्फ चार दिन की कार्यवाही की चर्चा, निकाय चुनाव का भी असर

इस सत्र की एक अहम विशेषता इसकी सीमित अवधि है। रिपोर्टों के अनुसार सदन की कार्यवाही करीब चार दिन तक सीमित रहने की संभावना है। इसके पीछे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को भी एक कारण माना जा रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे।

हालांकि विधानसभा का आधिकारिक कैलेंडर सत्र की अवधि 20 से 27 अगस्त दिखाता है। वास्तविक कार्यदिवस और विधायी कामकाज का स्वरूप सदन की कार्यमंत्रणा समिति तथा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के निर्णयों से स्पष्ट होगा।

पहले दिन प्रश्नकाल नहीं, शोक प्रस्ताव के बाद आगे की रणनीति

सत्र के पहले दिन सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने की जानकारी है। पहले दिन प्रश्नकाल नहीं रखा गया है। शोक प्रस्ताव के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित होने और इसके बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में आगे के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना बताई गई है।

इसका अर्थ है कि वास्तविक विधायी लड़ाई अगले कार्यदिवसों में देखने को मिलेगी।

विधानसभा का अंकगणित सरकार के पक्ष में

राजस्थान विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध दलवार प्रतिनिधित्व के अनुसार भाजपा के 118, कांग्रेस के 67, निर्दलीय 8, भारत आदिवासी पार्टी के 4 और बसपा के 2 सदस्य हैं।

संख्या बल सरकार के पक्ष में होने के बावजूद UCC जैसे संवेदनशील विधेयक पर विपक्ष की बहस और राजनीतिक विरोध को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। सरकार के लिए चुनौती विधेयक को पारित कराने के साथ-साथ उसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब देने की भी होगी।

चुनावी माहौल में विधानसभा सत्र का महत्व बढ़ा

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारियां भी राजनीतिक दलों के लिए अहम हैं। ऐसे समय में विधानसभा का यह सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं जनता तक पहुंचाने का मंच बन सकता है।

भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियों, नीतिगत फैसलों और विधायी एजेंडे को आगे रखेगी, जबकि कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, भर्ती व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाने की कोशिश करेगी।

इस लिहाज से यह सत्र संख्या बल की लड़ाई से ज्यादा राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई भी बन सकता है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

भजनलाल सरकार के सामने इस सत्र में दो स्तर की चुनौती है। पहला, अपने महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को सदन में प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाना और दूसरा, विपक्ष के आक्रामक सवालों का राजनीतिक एवं तथ्यात्मक जवाब देना।

वहीं कांग्रेस के लिए चुनौती यह होगी कि सीमित कार्यदिवसों में अधिक से अधिक जनसरोकार के मुद्दों को सदन में उठाया जाए और सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर किया जाए।

यानी राजस्थान विधानसभा का यह मानसून सत्र छोटा जरूर है, लेकिन राजनीतिक रूप से इसका असर बड़ा हो सकता है। खासकर UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे और आगामी स्थानीय चुनावों की पृष्ठभूमि इसे राज्य की राजनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव बना रहे हैं।