नई दिल्ली/छत्रपति संभाजीनगर | राष्ट्रीय डेस्क
हाल के छात्र आंदोलनों के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने अगले चरण की रणनीति का ऐलान कर दिया है। संगठन ने घोषणा की है कि वह सितंबर 2026 से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ नाम से राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करेगा। संगठन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों में जाकर युवाओं, छात्रों, किसानों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुनना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाना होगा।
फिलहाल चुनाव नहीं, ‘प्रेशर ग्रुप’ की भूमिका
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित दो दिवसीय कोर कमेटी बैठक के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि संगठन फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने की बजाय एक ‘पब्लिक प्रेशर ग्रुप’ के रूप में काम करेगा। उनका कहना है कि प्राथमिक लक्ष्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जनमत तैयार करना और सरकारों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है, न कि तत्काल चुनाव लड़ना।
क्या होगा ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान?
संगठन के अनुसार, सितंबर से शुरू होने वाले इस अभियान के तहत देश के विभिन्न शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता, महंगाई और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर लोगों की राय ली जाएगी। अभियान के दौरान नागरिकों की शिकायतों और सुझावों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।
सदस्यता अभियान भी होगा तेज
CJP ने अपने संगठनात्मक विस्तार के लिए राष्ट्रीय सदस्यता अभियान शुरू करने की भी घोषणा की है। संगठन ने छात्रों, युवा पेशेवरों और आम नागरिकों से डिजिटल माध्यम के जरिए जुड़ने की अपील की है। नेतृत्व का दावा है कि जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाकर संगठन अपनी पहुंच विभिन्न राज्यों तक विस्तारित करना चाहता है।
छात्र आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान तक
CJP का नाम इस वर्ष देशव्यापी छात्र आंदोलनों के दौरान प्रमुखता से सामने आया था। परीक्षा सुधार, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के मुद्दों को लेकर हुए अभियानों के बाद संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। अब संगठन आंदोलन की राजनीति से आगे बढ़कर संवाद और जनभागीदारी आधारित अभियान की दिशा में कदम बढ़ाने की बात कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह अभियान व्यापक जनसमर्थन जुटाने में सफल रहता है, तो भविष्य में यह एक प्रभावशाली सामाजिक दबाव समूह के रूप में उभर सकता है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि संगठन लंबे समय तक गैर-चुनावी भूमिका में रहता है या भविष्य में औपचारिक राजनीतिक विकल्प बनने की दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसका तत्काल फोकस जनसंवाद और जनहित के मुद्दों पर दबाव बनाने पर रहेगा।


