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सिंधु जल संधि पर बदले भारत के तेवर: जम्मू-कश्मीर में 5,500 मेगावाट की नई जलविद्युत परियोजनाओं की तैयारी, पाकिस्तान की बढ़ सकती है मुश्किल

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में लगभग 5,500 मेगावाट क्षमता की नई जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब भारत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के क्रियान्वयन को स्थगित कर रखा है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल देश की ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग भी संभव होगा।

क्या है सरकार की योजना?

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में कई नई जलविद्युत परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं की कुल उत्पादन क्षमता करीब 5,500 मेगावाट होगी। इनका उद्देश्य बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल संसाधनों का दीर्घकालिक प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।

सिंधु जल संधि से कैसे जुड़ा है मामला?

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी, जिसके तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल उपयोग के नियम तय किए गए थे। हाल के वर्षों में सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी घटनाओं के बाद भारत ने संधि के भविष्य और उसके संचालन पर अपना रुख सख्त किया है। इसी पृष्ठभूमि में जलविद्युत परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने की रणनीति सामने आई है।

पाकिस्तान ने जताई आपत्ति

रिपोर्टों के मुताबिक भारत ने पाकिस्तान को दर्जनों जलविद्युत परियोजनाओं की जानकारी दी है, जिनमें से कई पर पाकिस्तान ने आपत्ति दर्ज कराई है। पाकिस्तान इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता मंचों पर ले जाने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत का कहना है कि वह अपने अधिकारों और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप निर्णय ले रहा है।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि नई परियोजनाओं से कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं—

  • जम्मू-कश्मीर में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार और आधारभूत ढांचे का विकास।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक उपस्थिति को मजबूती।
  • जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और भंडारण क्षमता में सुधार।
  • राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक समर्थन।

सरकार का संकेत

सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत का रुख यह है कि यदि पड़ोसी देश आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भरोसे का वातावरण बनाने में विफल रहता है, तो पुराने ढांचे में लौटना कठिन होगा। इसी कारण सरकार जल एवं ऊर्जा परियोजनाओं को तेज़ गति से आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

आगे क्या?

जलविद्युत परियोजनाओं के लिए विस्तृत तकनीकी और पर्यावरणीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर जम्मू-कश्मीर की बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसका लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय ग्रिड को भी मिल सकता है।