नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से लगातार सुर्खियां बटोर रहे युवा वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। दलीप ट्रॉफी 2026 के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ ऐसी पारी खेली, जिसने उन्हें टूर्नामेंट के रिकॉर्ड बुक में सबसे कम उम्र के अर्धशतकवीर के तौर पर दर्ज करा दिया।
महज 15 साल की उम्र में वैभव ने 42 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। इसके साथ ही उन्होंने दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने का करीब छह दशक पुराना रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था, जिन्होंने 1969 में 16 साल की उम्र में अर्धशतक जड़ा था।
42 गेंदों में फिफ्टी, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई
वैभव ने अपनी पारी की शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। उनका बल्लेबाजी अंदाज देखकर ऐसा लगा कि वह लाल गेंद के इस मुकाबले में भी अपनी आक्रामक शैली से समझौता करने के मूड में नहीं हैं।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अपनी पारी में 4 छक्के और 5 चौके लगाए और कुल 81 गेंदों का सामना करते हुए 92 रन बनाए। यानी शतक से महज आठ रन पहले उनकी पारी समाप्त हुई।
उनकी यह पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में इतनी कम उम्र में इस तरह की बल्लेबाजी करना अपने आप में असाधारण उपलब्धि है।
57 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
वैभव के अर्धशतक के साथ दलीप ट्रॉफी के सबसे कम उम्र के फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में बड़ा बदलाव हुआ है।
सबसे कम उम्र में दलीप ट्रॉफी अर्धशतक:
- वैभव सूर्यवंशी — करीब 15 साल की उम्र
- लक्ष्मण सिंह — 16 साल 23 दिन, 1969
- पीयूष चावला — 16 साल की उम्र में, 2005
इस उपलब्धि ने वैभव को भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में एक अलग पहचान दिला दी है।
कप्तानी की जिम्मेदारी भी मिली
दिलचस्प बात यह है कि वैभव के लिए यह मुकाबला केवल बल्लेबाजी के लिहाज से ही खास नहीं रहा। ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने के बाद 15 वर्षीय वैभव को मैच के दौरान टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ी।
कप्तानी मिलने के बाद उन्होंने मैदान पर अपनी निर्णय क्षमता का भी परिचय दिया। सेंट्रल जोन के बल्लेबाज आर्यन जुयाल के खिलाफ उन्होंने तेजी से DRS लेने का फैसला किया, जो ईस्ट जोन के पक्ष में गया। इस फैसले की भी काफी चर्चा हुई।
यानी वैभव के लिए दलीप ट्रॉफी का यह सेमीफाइनल केवल रिकॉर्ड बनाने वाली बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रहा। उन्हें पहली बार सीनियर स्तर पर नेतृत्व की जिम्मेदारी भी निभाने का मौका मिला।
बल्ले के साथ गेंद से भी दिखा चुके हैं दम
वैभव की खासियत सिर्फ उनकी बल्लेबाजी नहीं है। दलीप ट्रॉफी के पिछले मुकाबले में उन्होंने गेंद से भी प्रभावित किया था। क्वार्टर फाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए उन्होंने एक ओवर में दो विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की थी।
युवा खिलाड़ी का बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में योगदान देना टीम के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराता है। यही वजह है कि वैभव की प्रतिभा को लेकर क्रिकेट जगत में लगातार चर्चा हो रही है।
सेंट्रल जोन के खिलाफ मुकाबला क्यों रहा खास?
दलीप ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन और ईस्ट जोन आमने-सामने हैं। सेंट्रल जोन की टीम पहली पारी में 266 रन पर ऑलआउट हुई, जिसमें रिंकू सिंह ने 60 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। इसके जवाब में ईस्ट जोन की पारी में वैभव का आक्रामक अर्धशतक मुकाबले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
वैभव की 92 रन की पारी ने न सिर्फ ईस्ट जोन को मजबूती दी, बल्कि उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड भी कर दिया जिसे आने वाले वर्षों में तोड़ना किसी भी युवा बल्लेबाज के लिए चुनौती होगा।
रिकॉर्ड से आगे भी बड़ी उम्मीद
वैभव सूर्यवंशी का नाम पिछले कुछ समय से भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल है। लेकिन इतनी कम उम्र में रिकॉर्ड बनना अपने आप में मंजिल नहीं है। असली चुनौती इस प्रदर्शन को लगातार बनाए रखना और अलग-अलग स्तर पर खुद को साबित करना होगी।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि दलीप ट्रॉफी के इस मुकाबले में वैभव ने एक बार फिर बता दिया कि उनके खेल में सिर्फ आक्रामकता नहीं, बल्कि बड़े मंच पर दबाव संभालने की क्षमता भी दिखाई दे रही है।
15 साल की उम्र में 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ना आसान नहीं होता। वैभव ने यह कर दिखाया है—और अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भारतीय क्रिकेट का यह युवा सितारा आगे कितनी ऊंची उड़ान भरता है।


