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चीनी की कीमतों पर सरकार के दो बड़े फैसलों का असर! एक्स-मिल भाव 18% गिरकर ₹55 किलो, क्या अब आम आदमी को भी मिलेगी राहत?

नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर परेशान उपभोक्ताओं के लिए अब बाजार से राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार की ओर से चीनी के आयात की अनुमति और जमाखोरी-सट्टेबाजी पर सख्ती के बाद एक्स-मिल कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक, चीनी का एक्स-मिल भाव रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरकर करीब ₹55 प्रति किलो रह गया है। 

पिछले सप्ताह एक्स-मिल कीमत करीब ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। यानी कुछ ही दिनों में कीमत में लगभग 18 फीसदी की कमी आई है। सरकार का दावा है कि बाजार में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त है और हालिया तेजी का कारण वास्तविक कमी से ज्यादा सट्टेबाजी और कुछ कारोबारियों की ओर से अतिरिक्त स्टॉक रखना था। 

सरकार के दो फैसलों ने बदला बाजार का रुख

चीनी की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र ने एक तरफ 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी, वहीं दूसरी तरफ थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा को कड़ा किया गया। सरकार ने राज्यों को जमाखोरी और सट्टेबाजी के खिलाफ जांच तेज करने के निर्देश भी दिए। 

इन फैसलों का असर बाजार की धारणा पर तेजी से पड़ा। कारोबारियों को यह संकेत मिला कि आने वाले त्योहारी सीजन में सरकार चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करेगी।

इसी के बाद एक्स-मिल स्तर पर कीमतों में तेज करेक्शन देखने को मिला।

₹67 से सीधे ₹55 किलो पहुंचा भाव

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार, पिछले सप्ताह चीनी का एक्स-मिल भाव करीब ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गया था। अब यह घटकर करीब ₹55 प्रति किलो रह गया है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इसमें और नरमी संभव है। 

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—एक्स-मिल कीमत और खुदरा कीमत एक जैसी नहीं होती।

24 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक देश में औसत थोक कीमत करीब ₹58.29 प्रति किलो, जबकि औसत खुदरा कीमत करीब ₹63.05 प्रति किलो थी। इसलिए मिल स्तर पर आई पूरी गिरावट का असर दुकानों तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है। 

क्या चीनी की कोई वास्तविक कमी थी?

यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू है।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की ओर से कहा गया है कि बाजार में चीनी की वास्तविक कमी नहीं थी। संगठन ने हालिया तेजी को असामान्य बताते हुए स्टॉकिंग और सट्टेबाजी को कीमतों में उछाल की प्रमुख वजहों में गिना है। 

सरकार का भी कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। हालांकि 2025-26 मार्केटिंग वर्ष में चीनी उत्पादन पहले के अनुमान से कम रहने की संभावना है। इसके बावजूद सरकार का आकलन है कि उपलब्ध स्टॉक त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। 

चीनी आयात की जरूरत क्यों पड़ी?

सरकार ने हाल में 10 लाख टन कच्ची चीनी को शुल्क-मुक्त आयात करने की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और त्योहारी सीजन में कीमतों को नियंत्रण में रखना है। 

दिलचस्प बात यह है कि घरेलू कीमतों में गिरावट के बाद अब इस आयात की आर्थिक उपयोगिता भी कम हो गई है। बाजार सूत्रों के मुताबिक आयातकों को अब पहले की तुलना में कम मार्जिन मिल रहा है और अनुमान है कि स्वीकृत 10 लाख टन में से करीब आधी मात्रा ही वास्तव में आयात हो सकती है। 

यानी सरकार के फैसले ने सिर्फ तत्काल सप्लाई बढ़ाने का रास्ता नहीं खोला, बल्कि बाजार में कीमतों को लेकर उम्मीदों को भी बदल दिया।

जमाखोरी पर भी सरकार की नजर

चीनी के दामों में अचानक उछाल के बाद सरकार ने स्टॉक रखने के नियमों को भी सख्त किया है। 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 के बीच महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं को अधिकतम 15 दिन की खपत के बराबर स्टॉक रखने की सीमा लागू होगी। 

इसका सीधा मकसद यह है कि बड़े खरीदार जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके बाजार में कृत्रिम कमी जैसी स्थिति पैदा न कर सकें।

सरकार ने इससे पहले डीलरों के लिए भी स्टॉक सीमा से जुड़े कदम उठाए थे।

क्या अब खुदरा बाजार में भी चीनी सस्ती होगी?

यही सवाल आम उपभोक्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

फिलहाल एक्स-मिल कीमत में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसका पूरा फायदा खुदरा ग्राहक तक अभी नहीं पहुंचा है। थोक और खुदरा कीमतों में पहले से अंतर मौजूद है। इसलिए आने वाले दिनों में बाजार में नई कीमतों का असर दिखाई देने की उम्मीद है। 

अगर थोक बाजार में गिरावट बनी रहती है और आयातित चीनी की उपलब्धता बढ़ती है, तो खुदरा कीमतों पर भी दबाव कम हो सकता है।

त्योहारी सीजन से पहले सरकार के लिए बड़ी परीक्षा

अगस्त से नवंबर के बीच देश में त्योहारों का बड़ा सीजन रहता है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है। ऐसे में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती कीमत और उपलब्धता दोनों को संतुलित रखना है। 

सरकार की रणनीति फिलहाल साफ दिखाई देती है—जरूरत पड़ने पर आयात का रास्ता खोलना, बड़े स्टॉक पर निगरानी रखना और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई करना।

लेकिन बाजार में असली राहत तभी मानी जाएगी जब ₹55 प्रति किलो की एक्स-मिल कीमत का असर थोक और फिर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे।

एक नजर में

  • एक्स-मिल चीनी कीमत: ₹67 से घटकर करीब ₹55/kg
  • गिरावट: लगभग 18%
  • सरकार ने अनुमति दी: 10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी का आयात
  • थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा: 15 दिन की खपत
  • औसत खुदरा कीमत: 24 अगस्त को करीब ₹63.05/kg
  • सरकार का फोकस: उपलब्धता बढ़ाना और जमाखोरी रोकना