मुंबई। वेब सीरीज ‘आश्रम’ में पम्मी का किरदार निभाकर पहचान बनाने वाली अभिनेत्री अदिति पोहनकर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी कोई नई फिल्म या सीरीज नहीं, बल्कि ‘आश्रम’ में बॉबी देओल के साथ फिल्माए गए इंटीमेट सीन्स को लेकर उनका पुराना अनुभव है, जिस पर अभिनेत्री ने खुलकर बात की है।
अदिति और बॉबी देओल के बीच सीरीज में कई ऐसे दृश्य फिल्माए गए थे, जिनमें दोनों कलाकारों को काफी करीबी और संवेदनशील परिस्थितियों में काम करना पड़ा। अदिति के मुताबिक, ऐसे दृश्यों को सिर्फ कैमरे के सामने निभाना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि सेट पर दोनों कलाकारों के बीच विश्वास, संवाद और सहजता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
‘मर्यादा’ और कम्फर्ट को बताया सबसे जरूरी
अदिति ने इंटीमेट सीन्स की शूटिंग के अनुभव को बताते हुए कहा कि कलाकारों को अपनी-अपनी सीमाओं को समझना चाहिए। उनका मानना है कि जब दोनों कलाकार एक-दूसरे के साथ सुरक्षित और सहज महसूस करते हैं, तभी ऐसे दृश्यों को स्वाभाविक तरीके से शूट किया जा सकता है।
अभिनेत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीमा का पता होना और उसका सम्मान करना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी भी कलाकार को शूटिंग के दौरान डर या असहजता महसूस नहीं होनी चाहिए। आपसी भरोसा होने पर काम काफी आसान हो जाता है।
बॉबी देओल के साथ शूटिंग का अनुभव भी किया साझा
अदिति ने पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘आश्रम’ में बॉबी देओल के साथ इंटीमेट सीन्स फिल्माने के बाद दोनों के बीच कुछ समय के लिए एक अजीब-सी स्थिति बन गई थी। शूटिंग के दौरान दोनों एक-दूसरे से यह पूछते रहते थे कि वे ठीक हैं या नहीं।
अदिति के मुताबिक, उस समय सेट पर इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की व्यवस्था भी नहीं थी। ऐसे में वह खुद अपने को-एक्टर से बातचीत करके सीन की सीमाएं और सहजता तय करती थीं। बाद में एक हल्के-फुल्के खाने से जुड़े किस्से ने दोनों के बीच बनी झिझक को खत्म करने में मदद की।
अदिति ने कहा- बातचीत से बहुत कुछ आसान हो जाता है
अदिति का मानना है कि इंटीमेट सीन की शूटिंग से पहले कलाकारों के बीच स्पष्ट बातचीत बेहद जरूरी है। उनका कहना रहा है कि ऐसे मौकों पर सिर्फ अभिनेत्री की सहजता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुरुष कलाकार भी असहज महसूस कर सकते हैं।
उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि वह अक्सर को-एक्टर से पहले ही बात कर लेती हैं कि किस तरह सीन शूट किया जाएगा और किस चीज को लेकर दोनों सहज हैं। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया किसी भी तरह की झिझक को कम करने में मदद करती है।
पहले नहीं थी इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की जानकारी
अदिति ने यह भी बताया था कि ‘आश्रम’ के समय उन्हें इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर जैसी भूमिका के बारे में जानकारी नहीं थी। वह खुद अपने को-स्टार से संवाद करके सीन की तैयारी करती थीं। आज फिल्म और वेब इंडस्ट्री में ऐसे दृश्यों के लिए इंटीमेसी कोऑर्डिनेशन को अधिक महत्व दिया जाता है, लेकिन अदिति के ‘आश्रम’ के अनुभव के समय यह व्यवस्था उनके लिए परिचित नहीं थी।
बॉबी देओल भी ऐसे सीन्स को लेकर थे संकोची
अदिति के पुराने इंटरव्यू में बॉबी देओल के व्यवहार का भी जिक्र आया था। उन्होंने बताया था कि बॉबी ऐसे दृश्यों को लेकर शुरुआत में काफी संकोची थे और उन्हें सहज होने में समय लगा। अदिति के अनुसार, दोनों के बीच बातचीत और भरोसे ने शूटिंग को आसान बनाया।
यह बात बॉबी के पुराने बयान से भी मेल खाती है। ‘आश्रम 3’ के दौरान ईशा गुप्ता के साथ इंटीमेट सीन्स के बारे में बात करते हुए बॉबी ने कहा था कि इस तरह का सीन पहली बार करते समय वह काफी नर्वस थे, हालांकि को-स्टार के प्रोफेशनल रवैये से उन्हें मदद मिली।
‘आश्रम’ ने बदली अदिति की पहचान
प्रकाश झा की ‘आश्रम’ सीरीज में अदिति पोहनकर ने पम्मी का किरदार निभाया था। उनका किरदार सीरीज की कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आता है और इसी भूमिका ने उन्हें बड़े स्तर पर दर्शकों के बीच पहचान दिलाई।
अदिति इससे पहले ‘शी’ जैसी वेब सीरीज में भी काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने अपने अभिनय के साथ-साथ संवेदनशील दृश्यों को लेकर भी काम किया। उनका कहना है कि ऐसे दृश्यों को केवल बोल्डनेस के नजरिए से देखने के बजाय उनके कहानी और किरदार के संदर्भ को समझना जरूरी है।
इंटीमेट सीन सिर्फ कैमरे के सामने का काम नहीं
अदिति की बातों से एक बड़ा सवाल भी सामने आता है—इंटीमेट सीन्स को शूट करते समय कलाकारों की व्यक्तिगत सीमाओं और मानसिक सहजता का कितना ध्यान रखा जाता है?
अभिनेत्री का जवाब काफी स्पष्ट है: आपसी भरोसा, संवाद और सीमाओं का सम्मान। उनके मुताबिक, जब दोनों कलाकार जानते हैं कि सामने वाला किस सीमा तक सहज है और उस सीमा का सम्मान किया जाता है, तो मुश्किल से मुश्किल सीन भी पेशेवर तरीके से किया जा सकता है।
‘आश्रम’ के सेट से जुड़ा अदिति का यह अनुभव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह पर्दे पर दिखने वाले कुछ मिनटों के दृश्य के पीछे की तैयारी और कलाकारों की मानसिक स्थिति की एक अलग तस्वीर सामने रखता है।


