राजनीति

मध्य प्रदेश में UCC बिल विधानसभा से पास: शादी, तलाक, लिव-इन और विरासत के नियम होंगे एक समान, विपक्ष का जोरदार विरोध

भोपाल | राजनीतिक डेस्क

मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधानसभा में विधेयक पर लंबी बहस और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच सरकार ने इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक एजेंडा करार देते हुए कई प्रावधानों पर सवाल उठाए। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू होगा।

क्या है UCC बिल?

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। सरकार का दावा है कि इससे अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान नागरिक कानून लागू होगा और सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं दायित्व मिलेंगे।

बिल के प्रमुख प्रावधान

मध्य प्रदेश UCC विधेयक में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं—

  • एक से अधिक विवाह (बहुविवाह) पर रोक।
  • सभी विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण।
  • तलाक की प्रक्रिया के लिए समान कानूनी प्रावधान।
  • लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य।
  • उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में समान नियम।
  • निकाह हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाओं को मान्यता नहीं।
  • लिव-इन संबंधों से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक प्रावधान।

सदन में हुआ तीखा राजनीतिक टकराव

विधेयक पेश होने के साथ ही विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर सामाजिक और धार्मिक मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया। दूसरी ओर भाजपा विधायकों ने इसे महिलाओं के अधिकारों और समान न्याय की दिशा में बड़ा सुधार बताया। बहस के दौरान सदन में नारेबाजी भी हुई और माहौल कई बार गर्म रहा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार यह कानून संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों की भावना के अनुरूप है और समाज में समानता तथा न्याय को मजबूत करेगा।

कांग्रेस ने उठाए ये सवाल

कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार को पहले व्यापक सामाजिक और कानूनी विमर्श करना चाहिए था। विपक्ष का कहना है कि कई प्रावधानों पर और अधिक चर्चा की आवश्यकता थी तथा विभिन्न समुदायों की आशंकाओं को दूर किए बिना कानून पारित करना उचित नहीं है। कांग्रेस ने इसे वैचारिक और राजनीतिक मुद्दा बताते हुए सरकार के कदम की आलोचना की।

देश का चौथा राज्य बना मध्य प्रदेश

इस विधेयक के पारित होने के साथ ही मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड सहित कुछ राज्यों ने भी अपने स्तर पर UCC संबंधी कानून बनाए हैं। हालांकि मध्य प्रदेश में यह कानून राज्यपाल की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा।

आगे क्या होगा?

अब यह विधेयक राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार इसके क्रियान्वयन की अधिसूचना जारी करेगी। इसके बाद विवाह पंजीकरण, लिव-इन संबंधों के पंजीकरण, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों से जुड़े नए नियम चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। आने वाले दिनों में इस कानून को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज रहने की संभावना है।