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CJP आंदोलन पर सुलह की कोशिश! जेपी नड्डा ने की सोनम वांगचुक से मुलाकात, बोले- ‘जब चाहें बातचीत को तैयार है सरकार’

नई दिल्ली | राष्ट्रीय डेस्क

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत के संकेत दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने संदेश दिया कि सरकार आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है।

सरकार ने दिया संवाद का प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुलाकात के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि यदि CJP बातचीत करना चाहता है तो सरकार किसी भी समय संवाद के लिए तैयार है। उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ा जाए और सामान्य स्थिति बहाल करने में सहयोग किया जाए।

सोनम वांगचुक का हाल जाना

वांगचुक पिछले दिनों अनिश्चितकालीन अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन चिकित्सकीय निगरानी जारी है। जेपी नड्डा के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना।

CJP ने रखीं अपनी प्रमुख मांगें

सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आने के बाद CJP प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगें दोहराईं। इनमें कथित परीक्षा घोटालों पर जवाबदेही तय करना, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, सोनम वांगचुक से जुड़े मुद्दे तथा परीक्षा सुधारों पर ठोस कार्रवाई शामिल है। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को मांगों का ज्ञापन भी सौंपा।

बातचीत पर भी कायम रहा मतभेद

हालांकि संवाद की पहल के बावजूद गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। CJP नेताओं ने कहा कि केवल औपचारिक बैठक पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय देना होगा। बाद में संगठन के कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि यदि बातचीत केवल औपचारिकता साबित होती है तो आंदोलन जारी रहेगा। कुछ प्रतिनिधियों ने यह भी आग्रह किया कि सरकार आंदोलन स्थल पर आकर संवाद करे।

आंदोलन बना राष्ट्रीय मुद्दा

NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। संसद के मानसून सत्र में भी विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों का समर्थन मिलने से आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

आगे क्या?

अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और CJP के बीच प्रस्तावित बातचीत किसी ठोस समाधान तक पहुंचती है या नहीं। यदि वार्ता सफल रहती है तो लंबे समय से चल रहे आंदोलन को नया मोड़ मिल सकता है। वहीं यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती, तो CJP पहले ही देशभर में आंदोलन को और व्यापक बनाने के संकेत दे चुका है।