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अयोध्या राम मंदिर जांच में बड़ा मोड़: चढ़ावे से आगे बढ़ी SIT की पड़ताल, अब ज़मीन सौदों पर भी शिकंजा

अयोध्या | 3 जुलाई 2026

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच अब एक नए और अहम चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने अब अपनी जांच का दायरा केवल मंदिर में आए दान और चढ़ावे तक सीमित न रखकर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े ज़मीन खरीद-फरोख्त के मामलों तक बढ़ा दिया है।

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच के दौरान ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि मामला केवल चढ़ावे की कथित हेराफेरी तक सीमित नहीं हो सकता। इसी आधार पर SIT अब ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई विभिन्न जमीनों, विशेष रूप से नजूल भूमि और अन्य संपत्तियों के सौदों की भी गहन जांच कर रही है।

ज़मीन खरीद के दस्तावेज़ और बिचौलियों पर फोकस

सूत्रों के मुताबिक, SIT ने उन प्रॉपर्टी डीलरों और बिचौलियों की सूची तैयार की है, जिन्होंने ट्रस्ट की ओर से या उससे जुड़े भूमि सौदों में भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसी इन सभी से पूछताछ कर रही है और रजिस्ट्री दस्तावेज़ों, भुगतान के स्रोत तथा सौदों की प्रक्रिया का मिलान किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि जांच टीम ने हाल ही में अयोध्या पहुंचकर दूसरे चरण की जांच शुरू की, जहां गवाहों के बयान दर्ज किए गए और भूमि खरीद से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया।

चढ़ावे की चोरी से शुरू हुई थी जांच

पूरे मामले की शुरुआत राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से हुई थी।

इस मामले में पहले ही कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच के दौरान नकदी और अन्य सामान भी बरामद किए गए थे। शुरुआती जांच में मंदिर के दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर भी संकेत मिले थे, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT को जांच का दायरा बढ़ाने की अनुमति दी।

अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या कथित रूप से गबन की गई धनराशि का उपयोग कहीं संपत्ति खरीदने या अन्य निवेशों में किया गया।

संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल

सूत्रों का कहना है कि SIT अब आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों का भी ब्योरा जुटा रही है। अयोध्या के अलावा लखनऊ, नोएडा और अन्य शहरों में खरीदी गई संपत्तियों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

यदि जांच के दौरान आय से अधिक संपत्ति या संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच एजेंसी इस मामले में और लोगों से पूछताछ कर सकती है।

राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यदि किसी के पास भूमि सौदों या वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े प्रमाण हैं, तो उन्हें SIT को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। वहीं विपक्षी दलों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।

आम आदमी पार्टी ने भूमि सौदों से जुड़े दस्तावेज़ जांच एजेंसियों को सौंपने का दावा किया है, जबकि कांग्रेस ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई है।

पुराने भूमि विवाद फिर चर्चा में

वर्तमान जांच के साथ वर्ष 2020-21 के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा की गई कुछ भूमि खरीद को लेकर उठे विवाद भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।

उस समय भी इन सौदों की जांच के लिए एक समिति बनाई गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई थी। अब SIT उन्हीं दस्तावेज़ों और गवाहों की दोबारा जांच कर रही है, जिससे पुराने विवादों पर भी नई रोशनी पड़ सकती है।

जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी

फिलहाल SIT की जांच जारी है और एजेंसी ने इस मामले में किसी भी नए भूमि सौदे को लेकर अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष या आरोप तय नहीं किए हैं।

आने वाले दिनों में वित्तीय रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज़ और गवाहों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। यदि अनियमितताओं के ठोस प्रमाण सामने आते हैं, तो मामले में और कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

देश के सबसे चर्चित धार्मिक संस्थानों में से एक से जुड़े इस मामले पर पूरे देश की नज़र है। ऐसे में SIT की अंतिम रिपोर्ट न केवल कानूनी बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।