लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपने पत्ते खोल दिए। पार्टी ने राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। सूची में योगी सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह, पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत, बीजेपी ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल और पार्टी के कई संगठनात्मक चेहरों को जगह मिली है।
बीजेपी की सूची की सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि मौजूदा राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी तथा बीएल वर्मा को इस बार दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। वहीं पार्टी ने कई ऐसे चेहरों पर भरोसा जताया है, जिनकी पहचान उत्तर प्रदेश की राजनीति और बीजेपी के संगठन से जुड़ी रही है।
BJP के 8 उम्मीदवार कौन-कौन?
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए जिन आठ नेताओं को मैदान में उतारा है, उनके नाम हैं:
- धर्मपाल सिंह
- राधाकांत ओझा
- प्रकाश पाल
- विद्यासागर सोनकर
- गोपी कृष्ण पांडेय
- प्रियंका सिंह रावत
- राम प्रताप सिंह चौहान
- श्रुति गंगवार
पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की मंजूरी के बाद इन नामों की घोषणा की गई। राज्यसभा के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होना है।
दो मौजूदा सांसदों का टिकट कटा
बीजेपी की सूची में सबसे बड़ा बदलाव हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को लेकर है। दोनों मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन पार्टी ने इस बार उन्हें दोबारा मैदान में नहीं उतारा है।
हरदीप सिंह पुरी केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हैं, जबकि बीएल वर्मा भी केंद्रीय मंत्री हैं। दोनों का राज्यसभा कार्यकाल अगले महीने समाप्त होने वाला है। इन दोनों को दोबारा टिकट नहीं दिए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि, केवल टिकट न मिलने के आधार पर इसे किसी खास राजनीतिक फैसले या मंत्रिमंडल में बदलाव का निश्चित संकेत मानना जल्दबाजी होगी। कुछ रिपोर्टों में संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल से इसे जोड़कर देखा गया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
धर्मपाल सिंह को क्यों मिला मौका?
बीजेपी की सूची में पहला नाम धर्मपाल सिंह का है। वह आंवला से विधायक हैं और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की जिम्मेदारी है।
धर्मपाल सिंह लोध समुदाय से आते हैं। यह सामाजिक समूह उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड और बुंदेलखंड के कई इलाकों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। खास बात यह है कि बीएल वर्मा भी इसी व्यापक सामाजिक समूह से आते हैं। ऐसे में धर्मपाल सिंह का चयन संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रियंका रावत और श्रुति गंगवार से महिला प्रतिनिधित्व
बीजेपी ने अपनी सूची में दो महिला चेहरों को भी जगह दी है। प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी से पूर्व लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और वर्तमान में बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
दूसरा नाम श्रुति गंगवार का है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान झारखंड राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। श्रुति गंगवार का संबंध बरेली क्षेत्र से है।
दोनों नामों के जरिए पार्टी ने सूची में महिला प्रतिनिधित्व के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है।
संगठन के चेहरों को भी राज्यसभा का टिकट
इस सूची में एक खास बात यह भी है कि बीजेपी ने सिर्फ सरकार में शामिल नेताओं को ही प्राथमिकता नहीं दी। पार्टी संगठन से जुड़े कई नेताओं को भी राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया है।
राम प्रताप सिंह चौहान बीजेपी के प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वहीं प्रकाश पाल पार्टी के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। गोपी कृष्ण पांडेय भी पार्टी के किसान और युवा संगठनों से जुड़े रहे हैं।
इससे संकेत मिलता है कि राज्यसभा के लिए उम्मीदवार तय करते समय पार्टी ने सरकार के साथ-साथ अपने संगठनात्मक ढांचे को भी महत्व दिया है।
जातीय समीकरण पर भी नजर
बीजेपी की आठ उम्मीदवारों की सूची में सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान दिखाई देता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उम्मीदवारों में तीन OBC, दो ब्राह्मण, दो दलित और एक ठाकुर समुदाय से हैं।
यानी पार्टी ने एक ही सामाजिक वर्ग पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों की भूमिका को देखते हुए यह पहलू खास महत्व रखता है।
हालांकि इसे सीधे तौर पर 2027 विधानसभा चुनाव की अंतिम रणनीति कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन उम्मीदवारों के सामाजिक और क्षेत्रीय वितरण से पार्टी की प्राथमिकताओं के संकेत जरूर मिलते हैं।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों अहम है यह लिस्ट?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन सिर्फ उच्च सदन की कुछ सीटों को भरने तक सीमित नहीं माना जा रहा।
बीजेपी ने सूची में OBC, दलित, ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय के प्रतिनिधित्व के साथ महिला चेहरों और संगठन से जुड़े नेताओं को भी जगह दी है। राजनीतिक विश्लेषणों में इसे 2027 से पहले पार्टी के सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
खासकर धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार जैसे OBC चेहरों को जगह मिलना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं प्रियंका सिंह रावत और विद्यासागर सोनकर के जरिए दलित प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया गया है।
BJP के सामने कितनी सीटों का गणित?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। बीजेपी ने फिलहाल आठ उम्मीदवार घोषित किए हैं। उपलब्ध संख्याबल के आधार पर बीजेपी के सात सीटें जीतने की स्थिति में होने की बात सामने आई है, जबकि बाकी सीटों के लिए विपक्षी दलों के बीच मुकाबला और रणनीति महत्वपूर्ण होगी।
इसी बीच समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव का गणित और दिलचस्प हो सकता है।
अखिलेश यादव की पार्टी के सामने भी चुनौती
बीजेपी की सूची आने के बाद अब निगाहें समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगियों की रणनीति पर हैं। राज्यसभा की 10 सीटों में संख्या बल के आधार पर सीटों का बंटवारा आसान नहीं होगा।
बीजेपी ने आठ उम्मीदवार घोषित करके अपना चुनावी रुख स्पष्ट कर दिया है। अब विपक्षी दलों को यह तय करना होगा कि वे अपने उपलब्ध विधायकों के आधार पर कितने उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं और अतिरिक्त उम्मीदवार के लिए किस तरह का समर्थन जुटाते हैं।
क्या यह 2027 का ट्रेलर है?
बीजेपी की इस सूची को 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन पार्टी की ओर से इसे सीधे चुनावी रोडमैप के रूप में पेश नहीं किया गया है।
फिर भी सूची में सामाजिक विविधता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, महिला भागीदारी और संगठनात्मक अनुभव का मिश्रण बताता है कि उम्मीदवार चुनते समय कई स्तरों पर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
राज्यसभा चुनाव में अब अगला बड़ा सवाल यह होगा कि क्या बीजेपी अपने घोषित उम्मीदवारों में से सभी को उच्च सदन तक पहुंचा पाएगी और विपक्ष इस चुनाव में उसके सामने कितनी मजबूत चुनौती खड़ी कर पाएगा। इसका जवाब 16 अक्टूबर के मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों में मिलेगा।


