नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 76 साल के हो गए हैं। उनके लंबे राजनीतिक जीवन के साथ उनकी दिनचर्या और खान-पान भी अक्सर चर्चा का विषय रहा है। खास बात यह है कि उनकी खाने की पसंद में कोई बहुत विदेशी या बेहद जटिल डाइट नजर नहीं आती। मखाना, खिचड़ी, मिलेट्स, मोरिंगा और पारंपरिक भारतीय व्यंजन जैसे कई नाम ऐसे हैं, जिनका जिक्र पीएम मोदी खुद अलग-अलग मौकों पर कर चुके हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया और कुछ लाइफस्टाइल रिपोर्टों में इन चीजों को कभी-कभी “पीएम मोदी की फिटनेस का राज” या “फिक्स्ड डाइट” की तरह पेश किया जाता है। उपलब्ध सार्वजनिक बयानों को देखें तो ज्यादा सटीक तस्वीर यह है कि मोदी भारतीय, सादा और शाकाहारी भोजन को लेकर अपनी पसंद साझा करते रहे हैं और कुछ खास देसी खाद्य पदार्थों को बढ़ावा भी देते रहे हैं। इसलिए इन 9 चीजों को उनकी सार्वजनिक रूप से बताई गई खाद्य पसंदों और उल्लेखों के रूप में देखना बेहतर है, न कि किसी चिकित्सकीय डाइट प्लान के रूप में।
1. मखाना—पीएम मोदी की सबसे चर्चित पसंद
इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा मखाने की होती है। फरवरी 2025 में बिहार के भागलपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने खुद कहा था कि वह साल के 365 में से करीब 300 दिन मखाना खाते हैं। उन्होंने इसे “सुपरफूड” बताते हुए बिहार के मखाना किसानों और इसे वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की जरूरत पर भी बात की थी।
मखाना बिहार की पारंपरिक उपज है और अब देशभर में स्नैक के रूप में लोकप्रिय हो चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक है और बिहार देश के उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा देता है।
2. मोरिंगा पराठा—पराठे का थोड़ा अलग अंदाज
आलू, गोभी या पनीर से बने पराठों के बीच मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियों का पराठा काफी अलग लगता है। पीएम मोदी ने 2020 के Fit India Dialogue के दौरान मोरिंगा पराठे का जिक्र करते हुए बताया था कि वह इसे हफ्ते में एक-दो बार खाते हैं। इसके बाद यह डिश उनकी खान-पान की पसंद से जुड़ी सबसे चर्चित चीजों में शामिल हो गई।
मोरिंगा की पत्तियों में आयरन, कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे सब्जी, दाल और पराठे में इस्तेमाल करने की भारतीय परंपरा भी काफी पुरानी है। इसलिए यहां दिलचस्प बात सिर्फ पीएम मोदी की पसंद नहीं, बल्कि एक सामान्य देसी सामग्री का दोबारा चर्चा में आना भी है।
3. मिलेट्स—बाजरा, रागी और ज्वार की वापसी
पीएम मोदी लंबे समय से मोटे अनाज यानी मिलेट्स को प्रोत्साहित करते रहे हैं। बाजरा, रागी, ज्वार जैसे अनाज भारतीय खान-पान का पुराना हिस्सा रहे हैं और इन्हें आधुनिक दौर में “श्री अन्न” के नाम से भी बढ़ावा मिला। 2023 में अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष मनाने के पीछे भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।
पीएम मोदी ने संसद में मिलेट्स से बने व्यंजनों के भोजन में शामिल होने का भी उल्लेख किया था। मिलेट्स में फाइबर और कई सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिसके कारण इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाता है।
4. सी बकथॉर्न—हिमालय का अनोखा फल
इस सूची का सबसे अलग नाम शायद सी बकथॉर्न है। यह नारंगी रंग की छोटी बेरी हिमालयी और ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों में पाई जाती है। पीएम मोदी ने 2026 में एक दीक्षांत समारोह के दौरान इसके बारे में बात की थी और इसके पोषण से जुड़े पहलुओं तथा इसके संभावित उपयोगों का उल्लेख किया था।
हाल के दिनों में सी बकथॉर्न को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हुई है। लेकिन इसके संदर्भ में यह फर्क बनाए रखना जरूरी है कि यह पोषक तत्वों से भरपूर फल हो सकता है, मगर इसे किसी बीमारी की दवा या इलाज का विकल्प मानना उचित नहीं है।
5. ब्लैक राइस—पूर्वोत्तर से निकला देसी विकल्प
काला चावल या ब्लैक राइस भी उन खाद्य पदार्थों में है, जिनका पीएम मोदी ने विभिन्न मौकों पर उल्लेख किया है। खासकर मणिपुर समेत पूर्वोत्तर भारत के किसानों और स्थानीय उत्पादों की चर्चा के दौरान इसका जिक्र सामने आया है।
ब्लैक राइस का रंग इसमें मौजूद प्राकृतिक पौध-यौगिकों, खासकर एंथोसाइनिन, से जुड़ा होता है। इसका स्वाद और बनावट सामान्य सफेद चावल से अलग होती है। यानी पीएम मोदी की खान-पान से जुड़ी सूची में सिर्फ लोकप्रिय महानगरीय “हेल्दी फूड” ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय भारतीय उत्पाद भी दिखाई देते हैं।
6. भाकरी और दाल—गुजरात की पारंपरिक थाली
पीएम मोदी के खान-पान की चर्चा गुजरात के पारंपरिक भोजन के बिना अधूरी रहती है। भाकरी और दाल ऐसी ही एक पारंपरिक जोड़ी है। आमतौर पर भाकरी मोटे अनाज के आटे से तैयार की जाती है और दाल के साथ इसे खाया जाता है।
इस तरह का भोजन भारतीय घरेलू थाली का हिस्सा रहा है और इसमें अनाज और दाल का संयोजन मिलता है। पीएम मोदी की सार्वजनिक रूप से बताई गई खाद्य पसंदों में सादगी और पारंपरिक भोजन का पहलू इसी वजह से बार-बार दिखाई देता है।
7. इंडियन एवोकाडो—विदेशी नाम, लेकिन देसी उत्पादन
एवोकाडो को आमतौर पर विदेशी फल माना जाता है, लेकिन भारत के अलग-अलग हिस्सों में अब इसकी खेती बढ़ रही है। 2 सितंबर 2026 को पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर भारतीय एवोकाडो की बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि पहले देश में इसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे, लेकिन अब इसकी मांग बढ़ रही है।
यहां भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी का फोकस सिर्फ खान-पान नहीं था, बल्कि भारतीय किसानों और स्थानीय उत्पादन की क्षमता पर भी था। इसीलिए इंडियन एवोकाडो उनकी “देसी खाद्य पदार्थों” वाली चर्चा में एक दिलचस्प नया नाम बनकर सामने आया।
8. खिचड़ी—साधारण भोजन से जुड़ी पुरानी पसंद
खिचड़ी भारतीय घरों का ऐसा भोजन है जिसे बनाने में ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं पड़ती। पीएम मोदी ने भी अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कई मौकों पर खिचड़ी का जिक्र किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने बताया है कि वह कभी-कभी खुद भी खिचड़ी बनाते थे।
दाल और चावल से बनने वाली खिचड़ी में अनाज और दाल का मेल होता है। शायद यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है—सरल, घरेलू और भारतीय। पीएम मोदी की भोजन संबंधी सार्वजनिक टिप्पणियों में खिचड़ी का नाम इसी सादगी के साथ सामने आता है।
9. ढोकला—गुजराती स्वाद भी बरकरार
गुजरात के पारंपरिक व्यंजनों में ढोकला का अलग स्थान है और पीएम मोदी के पसंदीदा खाने की चर्चाओं में इसका नाम भी सामने आता रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में इसे उनके हल्के स्नैक विकल्पों में शामिल बताया गया है।
बेसन से बनने वाला ढोकला भाप में पकाया जाता है और इसकी बनावट हल्की व स्पंजी होती है। यह उन पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में है जो घर के खाने के साथ-साथ अब पूरे देश के शहरों में आसानी से मिल जाते हैं।
तो क्या यही है पीएम मोदी की ‘फिटनेस डाइट’?
यहीं थोड़ा सावधान रहना जरूरी है। किसी व्यक्ति की फिटनेस को सिर्फ कुछ खाद्य पदार्थों से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सही निष्कर्ष नहीं होगा। पीएम मोदी ने खुद अपनी जिंदगी में योग, उपवास, नियमित दिनचर्या और काम के अनुशासन की भी बात की है। 2026 में उनके 76वें जन्मदिन पर उनकी जीवनशैली और भोजन को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में भी इन सभी पहलुओं का उल्लेख हुआ है।
खाने की बात करें तो उपलब्ध बयानों से एक पैटर्न जरूर दिखता है—मखाना जैसे स्थानीय स्नैक्स, मोटे अनाज, पारंपरिक गुजराती व्यंजन, खिचड़ी और मोरिंगा जैसे भारतीय खाद्य पदार्थ। इनमें से कुछ चीजों को उन्होंने खुद अपनी पसंद या सेवन के रूप में बताया है, जबकि कुछ का उन्होंने सार्वजनिक मंचों से प्रचार और उल्लेख किया है।
यानी कहानी किसी “गुप्त डाइट प्लान” की कम और भारतीय थाली में मौजूद पारंपरिक खाद्य पदार्थों को लेकर प्रधानमंत्री की सार्वजनिक पसंद और उनका प्रचार करने की प्रवृत्ति की ज्यादा है। मखाने को 300 दिन खाने की उनकी बात और मोरिंगा पराठे जैसी व्यक्तिगत पसंदें इसी वजह से बार-बार सुर्खियों में आती हैं।
76वें जन्मदिन के मौके पर एक बात जरूर दिलचस्प है—प्रधानमंत्री की भोजन संबंधी सार्वजनिक टिप्पणियों में बार-बार महंगे या जटिल “डाइट फूड” के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाली साधारण खाद्य सामग्री दिखाई देती है। बिहार का मखाना हो, गुजरात की भाकरी-दाल, हिमालय का सी बकथॉर्न या पूर्वोत्तर का ब्लैक राइस—इन सबके जरिए उनकी फूड स्टोरी भारतीय कृषि और क्षेत्रीय खान-पान से भी जुड़ जाती है।


