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रीवा अस्पताल पर कांग्रेस विधायक का बेहद गंभीर आरोप, ‘सुंदर महिला का शव हो तो पोस्टमॉर्टम के दौरान…’; अस्पताल ने कहा- निराधार

रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय को लेकर चल रहा विवाद अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप के बाद और गहरा गया है। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने अस्पताल की मोर्चरी और पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को लेकर ऐसा दावा किया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। विधायक का आरोप है कि यदि किसी सुंदर महिला की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम के दौरान उसके परिजन मौजूद नहीं रहते, तो शव के साथ बेहद आपत्तिजनक कृत्य किए जाते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन ने विधायक के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

अभय मिश्रा ने यह बयान उस समय दिया, जब रीवा के संजय गांधी अस्पताल में गर्भवती महिला कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहा था। अस्पताल की व्यवस्थाओं और कथित लापरवाही को लेकर परिजन लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी प्रदर्शन के दौरान विधायक ने अस्पताल की मोर्चरी में शवों की सुरक्षा और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

विधायक ने क्या दावा किया?

धरना स्थल पर लोगों को संबोधित करते हुए अभय मिश्रा ने करीब दो साल पुरानी एक कथित घटना का हवाला दिया। विधायक के मुताबिक, एक व्यक्ति उनके पास अपनी बहू के पोस्टमॉर्टम के सिलसिले में आया था। उसने पोस्टमॉर्टम अपने सामने कराने की इच्छा जताई और इसके लिए पैसे देने की बात कही।

विधायक के अनुसार, जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो उस व्यक्ति ने उन्हें कथित तौर पर बताया कि संजय गांधी अस्पताल में यदि किसी सुंदर महिला की मौत हो और पोस्टमॉर्टम के समय परिवार का कोई सदस्य वहां मौजूद न हो, तो शव के साथ गलत कृत्य किया जाता है। मिश्रा ने यह भी दावा किया कि शव के पोस्टमॉर्टम के दौरान परिजनों को वहां खड़े रहने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।

यह दावा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से प्रसारित होने लगा और अस्पताल की मोर्चरी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस कथित घटना के संबंध में कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी, पुलिस मामला या पीड़ित परिवार की शिकायत सामने नहीं आई है।

अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज

विधायक के बयान पर संजय गांधी अस्पताल प्रबंधन ने कड़ा जवाब दिया है। अस्पताल के सीएमओ अलख प्रकाश ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि विधायक जनता के प्रतिनिधि हैं और उन्हें इतने गंभीर आरोप लगाने से पहले उनके आधार और प्रमाण के बारे में सोचना चाहिए।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यदि विधायक के पास इन आरोपों से संबंधित कोई ठोस प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। प्रबंधन के अनुसार, फिलहाल ऐसे आरोपों में कोई सत्यता नहीं है।

यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—एक तरफ निर्वाचित जनप्रतिनिधि का गंभीर आरोप है और दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन का स्पष्ट खंडन। उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी यह कहना संभव नहीं है कि विधायक द्वारा लगाया गया आरोप सही है।

मामला सिर्फ बयान तक सीमित नहीं

संजय गांधी अस्पताल पहले से ही विवादों के घेरे में है। गर्भवती महिला कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के बाद परिजन अस्पताल की व्यवस्था और कथित चिकित्सकीय लापरवाही के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। परिवार ने सरकार की ओर से दिए गए मुआवजे को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, कल्पना मिश्रा और उनके बच्चे की मौत के बाद दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के डीन को भी हटाया गया।

यानी अस्पताल को लेकर शिकायतों और कार्रवाई का सिलसिला पहले से चल रहा था। विधायक के ताजा बयान ने इस विवाद में मोर्चरी और पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल- क्या आरोप की जांच होगी?

विधायक का बयान कितना तथ्यात्मक है, यह फिलहाल जांच का विषय है। ऐसे गंभीर आरोपों को केवल वायरल वीडियो के आधार पर सच मान लेना उचित नहीं होगा। दूसरी तरफ, यदि किसी सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में शवों की सुरक्षा को लेकर कोई शिकायत या संदेह सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच भी जरूरी है।

ऐसे मामले में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, मोर्चरी में प्रवेश की व्यवस्था, पोस्टमॉर्टम के दौरान मौजूद कर्मचारियों का रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित अवधि की शिकायतों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि विधायक के पास उस कथित घटना से संबंधित कोई दस्तावेज, शिकायत या प्रत्यक्ष जानकारी है तो जांच एजेंसियों के सामने उसे रखना इस मामले को स्पष्ट करने में मदद कर सकता है।

राजनीतिक बयान से आगे जांच जरूरी

रीवा का यह मामला अब सिर्फ एक राजनीतिक बयान का विषय नहीं रह गया है। एक ओर मृतका के परिवार को न्याय की मांग है, दूसरी ओर अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं। ऐसे माहौल में सामने आया यह नया आरोप स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींच रहा है।

लेकिन इतने गंभीर आरोपों में दावे और तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। अभी उपलब्ध जानकारी में विधायक के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल प्रबंधन ने इसे खारिज किया है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकल सकता है।

फिलहाल रीवा के संजय गांधी अस्पताल को लेकर विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। कल्पना मिश्रा की मौत से शुरू हुआ आंदोलन अब अस्पताल की समग्र व्यवस्था, जवाबदेही और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन इन नए आरोपों की जांच करता है, तो उससे इस पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद की जा सकती है।