जयपुर | 3 सितंबर 2026
राजस्थान के गांवों में आने वाले दिनों में विकास का दायरा सिर्फ सड़क और नाली तक सीमित नहीं रहने वाला है। राज्य सरकार अब ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं, खेल, रोजगार, सड़क, सिंचाई और कृषि को एक साथ जोड़कर काम करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों की उच्चस्तरीय बैठक में कई योजनाओं और आगामी कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इन्हें तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में सरकार ने खास तौर पर ग्राम पंचायतों में अटल ज्ञान केंद्र, पंचायत स्तर पर खेल मैदान और ग्रामीण इलाकों में बेहतर सड़क संपर्क विकसित करने पर जोर दिया। सरकार का कहना है कि गांवों में ऐसे स्थायी संसाधन तैयार किए जाएं, जिनका फायदा लोगों को लंबे समय तक मिलता रहे।
हर ग्राम पंचायत में बनेगा अटल ज्ञान केंद्र
ग्रामीण युवाओं के लिए सरकार की सबसे अहम पहलों में अटल ज्ञान केंद्र शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर चरणबद्ध तरीके से इन केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
इन केंद्रों में आधुनिक लाइब्रेरी और ई-लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर मार्गदर्शन, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और सरकारी सेवाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का भी प्रावधान रखा गया है।
यानी गांव के युवाओं को पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए हर बार शहर का रुख न करना पड़े, इसके लिए पंचायत स्तर पर ही एक उपयोगी अध्ययन और सूचना केंद्र तैयार करने की कोशिश है। सरकार के अनुसार, 535 अटल ज्ञान केंद्रों का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि बाकी केंद्रों को भी तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
3,219 किलोमीटर सड़कें, 2026-27 में 1,500 किलोमीटर का लक्ष्य
ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी PMGSY के चौथे चरण के तहत प्रदेश में करीब 3,219 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है।
सरकार ने इनमें से 1,500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण वित्त वर्ष 2026-27 में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। बाकी सड़कों का निर्माण अगले वर्ष किए जाने की बात कही गई है।
इसके साथ ही अटल प्रगति पथ योजना के तहत 5,000 से ज्यादा आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें बनाई जा रही हैं। इस योजना के तहत अब तक 1,681 करोड़ रुपये की लागत से 764 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 309 कार्य पूरे होने की जानकारी सरकार ने दी है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी सार्वजनिक संस्थानों तक बेहतर सड़क संपर्क को प्राथमिकता दी जाए। बारिश के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों और सरकारी भवनों की मरम्मत भी जल्द करने के निर्देश दिए गए हैं।
गांवों में खेल मैदानों पर भी जोर
ग्रामीण युवाओं और स्थानीय खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदान विकसित करने की योजना है। सरकार के मुताबिक, प्रदेश के गांवों में अब तक 9,134 खेल मैदान विकसित किए जा चुके हैं, जबकि 2,221 अन्य खेल मैदानों का काम जल्द पूरा किया जाना है।
सरकार का फोकस केवल खेल सुविधाओं तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली और बेहतर पर्यावरण के लिए 228 करोड़ रुपये की लागत से 457 अमृत संजीवनी पार्क भी विकसित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा 28,342 मॉडल तालाब और अमृत सरोवर के काम प्रगति पर होने की जानकारी दी गई है। ब्लॉक स्तर पर 457 नमो नर्सरियां भी विकसित की जा रही हैं, जहां प्रत्येक नर्सरी से सालाना करीब एक लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
7.22 लाख श्रमिकों को रोजगार, महिलाओं की भागीदारी 72 फीसदी से ज्यादा
ग्रामीण रोजगार को लेकर भी बैठक में सरकार ने आंकड़े साझा किए। मुख्यमंत्री के अनुसार, विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत फिलहाल राजस्थान में 7.22 लाख श्रमिक रोजगार में लगे हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में करीब 2.30 लाख अधिक बताई गई है।
सरकार के मुताबिक, पिछले दो महीनों में करीब 215 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है और इसमें महिलाओं की भागीदारी 72 प्रतिशत से अधिक रही है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि रोजगार देने वाले कार्यों के साथ-साथ ऐसे स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी प्राथमिकता से किया जाए, जिनका उपयोग ग्रामीण समुदाय लंबे समय तक कर सके।
11 हजार से ज्यादा अमृत पोषण वाटिकाएं होंगी विकसित
ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक फल और सब्जियां उपलब्ध कराने तथा गांवों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए सरकार 11 हजार से ज्यादा अमृत पोषण वाटिकाएं विकसित करने की तैयारी में है।
इसके लिए करीब 550 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। सरकार के अनुसार, इनमें से 8,501 कार्यों के लिए 237 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं।
इन वाटिकाओं को शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, उद्यानिकी और राजीविका जैसे विभागों के समन्वय से विकसित किया जाएगा। वहीं, गांवों में तैयार होने वाले स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 457 अमृत ग्रामीण हाट विकसित करने की योजना भी सामने आई है।
2,000 ग्रामीण स्कूलों में नए क्लासरूम
ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार 2,000 ग्रामीण स्कूलों में नए क्लासरूम बनाने पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
इसके अलावा ग्रामीण विद्यालयों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण पर करीब 81 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है।
अटल ज्ञान केंद्रों के साथ स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर यह जोर बताता है कि सरकार ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा और अध्ययन से जुड़ी सुविधाओं को पंचायत स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रही है।
किसानों के लिए सिंचाई और फसल सुरक्षा पर फोकस
ग्रामीण विकास के साथ किसानों से जुड़ी योजनाओं पर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। सरकार के अनुसार, इस साल खेतों में पानी की उपलब्धता और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए 18 हजार फार्म पॉन्ड और 8 हजार डिग्गियां बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
फसलों को आवारा और अन्य पशुओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए किसानों को 200 लाख मीटर यानी 2 करोड़ मीटर तारबंदी के लिए अनुदान देने की योजना है। इसके अलावा इस वर्ष 50 हजार कृषि यंत्रों पर भी अनुदान देने की बात कही गई है।
सरकार ने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत राज्य में अब तक 1,67,863 सौर ऊर्जा पंप संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनसे करीब 4.50 लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि में सूक्ष्म सिंचाई अपनाए जाने की जानकारी दी गई है।
सरकार का लक्ष्य – ग्रामीण विकास का राजस्थान मॉडल
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से वीबी-जी राम जी योजना के तहत राजस्थान को ग्रामीण विकास का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में काम करने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं का चयन स्थानीय जरूरत और जनोपयोगिता को ध्यान में रखकर किया जाए।
इस पूरी कवायद की खासियत यह है कि इसमें गांवों के विकास को अलग-अलग योजनाओं में बांटने के बजाय सड़क, रोजगार, शिक्षा, डिजिटल सुविधाएं, खेल, जल संरक्षण, कृषि और पर्यावरण को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।
अब असली चुनौती इन घोषणाओं को जमीन पर उतारने की होगी। अटल ज्ञान केंद्रों से लेकर सड़कों, खेल मैदानों और सिंचाई परियोजनाओं तक योजनाओं का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और पंचायत स्तर पर वास्तविक जरूरतों के अनुसार इनका क्रियान्वयन कितना प्रभावी रहता है।


