कोटा

मिड-डे मील के बाद 27 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, कोटा के स्कूल में मचा हड़कंप; अस्पताल पहुंचे मंत्री मदन दिलावर

कोटा। राजस्थान के कोटा जिले में सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए परोसा गया मिड-डे मील सोमवार को अचानक चिंता का कारण बन गया। पूनिया देवरी गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में भोजन करने के करीब दो घंटे बाद एक के बाद एक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। करीब 27 बच्चों ने उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और जी मिचलाने जैसी शिकायत की। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल से लेकर अस्पताल तक प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। 

बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद कई अभिभावक उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। अलग-अलग रिपोर्टों में अस्पताल पहुंचाए गए बच्चों की संख्या में अंतर है, जबकि अधिकारियों के मुताबिक सभी प्रभावित बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कई बच्चों को निगरानी और उपचार के लिए रखा गया।

कद्दू की सब्जी खाने के बाद बिगड़ी तबीयत

स्कूल में सोमवार को बच्चों को मिड-डे मील में कद्दू की सब्जी परोसी गई थी। स्कूल में उस दिन करीब 110 बच्चे मौजूद थे। भोजन सुबह करीब 10 बजे परोसा गया और लगभग दो घंटे बाद कुछ बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, दस्त और चक्कर आने की शिकायत शुरू की। देखते ही देखते कई बच्चे अस्वस्थ हो गए।

कुछ बच्चों ने चिकित्सकों और परिजनों को बताया कि उन्हें कद्दू की सब्जी खाने के बाद परेशानी महसूस हुई। हालांकि, इसे बीमारी का अंतिम कारण मान लेना अभी जल्दबाजी होगी। प्रशासन ने भी साफ किया है कि मेडिकल जांच और खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक वजह सामने आएगी।

एक ही जगह से कई स्कूलों में पहुंचा था खाना

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संबंधित मिड-डे मील केवल इसी स्कूल के लिए तैयार नहीं हुआ था। अधिकारियों के अनुसार आसपास के करीब 8-9 स्कूलों में भी इसी स्रोत से भोजन भेजा गया था। लेकिन फिलहाल दूसरे स्कूलों से इसी तरह बच्चों के बीमार होने की सूचना नहीं मिली है।

यही तथ्य जांच को और महत्वपूर्ण बना देता है। अगर एक ही जगह से तैयार हुआ भोजन कई स्कूलों में गया था, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि परेशानी भोजन में थी, पानी में, स्थानीय परिस्थितियों में या किसी अन्य वजह से।

खाने को लेकर उठे सवाल, लेकिन जांच के बाद ही साफ होगी वजह

घटना के बाद स्वाभाविक रूप से मिड-डे मील की गुणवत्ता और उसकी तैयारी को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी इसे फूड पॉइजनिंग का मामला घोषित नहीं किया है।

जिला शिक्षा अधिकारी रूप सिंह मीणा के अनुसार मेडिकल टीम को स्कूल भेजा गया है और मामले की जांच की जा रही है। शुरुआती स्तर पर गर्मी, उमस और स्थानीय पानी जैसे संभावित कारणों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। प्रयोगशाला और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

यह सावधानी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उसी भोजन को दूसरे स्कूलों के बच्चों ने भी खाया था, लेकिन वहां से समान शिकायतें सामने नहीं आईं।

अस्पताल पहुंचे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर भी न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भर्ती बच्चों से मुलाकात की और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।

मंत्री ने बच्चों की स्थिति की जानकारी लेने के साथ यह भी कहा कि घटना की जांच की जाएगी। भोजन और अन्य संभावित कारणों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों की तबीयत आखिर किस वजह से बिगड़ी।

अभी सबसे बड़ी राहत—बच्चों की हालत स्थिर

घटना से अभिभावकों में चिंता जरूर बढ़ी, लेकिन अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। कुछ बच्चों को उपचार के बाद राहत मिली है और कई को निगरानी में रखा गया।

फिलहाल प्रशासन के सामने दो प्राथमिकताएं हैं—बच्चों का इलाज और घटना की वास्तविक वजह का पता लगाना। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि मिड-डे मील की गुणवत्ता में कोई खामी थी या बीमारी के पीछे कोई दूसरा कारण था।

घटना ने फिर खड़े किए मिड-डे मील की निगरानी पर सवाल

मिड-डे मील सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सिर्फ भोजन की व्यवस्था नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी योजना है। ऐसे में भोजन के बाद बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने की घटना व्यवस्था की निगरानी पर सवाल जरूर खड़े करती है।

हालांकि, इस मामले में अभी किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। फिलहाल प्रशासन की निगाह बच्चों की सेहत और जांच के नतीजों पर है।