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‘दर्द, डेटा और दौलत’ के जरिए राहुल गांधी का युवाओं पर फोकस, बोले- भारत की सबसे बड़ी ताकत को अवसर नहीं मिल रहा

प्रयागराज | उत्तर प्रदेश डेस्क

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन रोजगार की कमी, महंगी शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और वित्तीय संसाधनों तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियां युवाओं की क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन को ‘दर्द, डेटा और दौलत’ के तीन प्रमुख बिंदुओं के इर्द-गिर्द रखा। उनका तर्क था कि युवाओं की समस्याओं को केवल राजनीतिक नारों के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके अनुभवों और आंकड़ों के आधार पर समझने की जरूरत है।

‘युवा देश की सबसे बड़ी ताकत, लेकिन अवसर की कमी’

राहुल गांधी ने कहा कि भारत के युवाओं में देश को आगे ले जाने की क्षमता है। उनके मुताबिक समस्या युवाओं की क्षमता में नहीं, बल्कि उन्हें उपलब्ध अवसरों और संसाधनों की कमी में है।

उन्होंने रोजगार को सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में युवा शिक्षा पूरी करने के बाद भी स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार की तलाश में हैं। उन्होंने इस मुद्दे को देश की आर्थिक नीति और भविष्य की दिशा से जोड़ते हुए सरकार से रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देने की मांग की।

पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं पर सवाल

राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अनिश्चितताओं को भी युवाओं की चिंता का बड़ा कारण बताया।

उनका कहना था कि जब कोई छात्र वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करता है और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण उसका अवसर प्रभावित होता है, तो इसका असर केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता। इससे युवाओं के भरोसे और मानसिक दबाव पर भी प्रभाव पड़ता है।

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र आंदोलन चल रहा है। इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज है।

महंगी शिक्षा भी चिंता का विषय

राहुल गांधी ने उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच केवल आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

उनके मुताबिक, यदि युवा शिक्षा हासिल करने के बाद भी रोजगार और आर्थिक अवसरों के लिए संघर्ष करता है, तो इसका असर देश की उत्पादक क्षमता पर पड़ता है।

उन्होंने शिक्षा और रोजगार को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मुद्दा बताते हुए कहा कि देश की आर्थिक नीतियों में युवाओं को केंद्र में रखना जरूरी है।

‘दर्द, डेटा और दौलत’—क्या है राहुल का फॉर्मूला?

प्रयागराज के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं के मुद्दे को तीन स्तरों पर रखने की कोशिश की।

दर्द यानी युवा किस समस्या से गुजर रहा है—बेरोजगारी, परीक्षा व्यवस्था, महंगी शिक्षा और भविष्य की अनिश्चितता।

डेटा यानी इन समस्याओं को राजनीतिक दावों के बजाय आंकड़ों और वास्तविक अनुभवों के आधार पर समझना।

और दौलत यानी देश में पैदा हो रही आर्थिक संपदा, पूंजी और अवसरों में युवाओं तथा समाज के विभिन्न वर्गों की हिस्सेदारी।

राहुल गांधी ने पहले भी सार्वजनिक मंचों पर डेटा, आर्थिक असमानता और संपत्ति के वितरण से जुड़े सवाल उठाए हैं। संसद में भी उन्होंने डेटा और तकनीकी बदलाव के संदर्भ में युवाओं को देश की भविष्य की आर्थिक क्षमता से जोड़ने की बात कही है।

AI से बदलती नौकरियों की चुनौती

राहुल गांधी ने युवाओं के सामने उभरती एक नई चुनौती के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी उल्लेख किया। उनका तर्क है कि तकनीकी बदलाव आने वाले समय में रोजगार के स्वरूप को बदल सकता है।

ऐसे में भारत को केवल रोजगार खोजने वाली युवा आबादी के बजाय ऐसी युवा शक्ति तैयार करनी होगी जो नई तकनीक को समझ सके, उसका इस्तेमाल कर सके और नई आर्थिक गतिविधियां पैदा कर सके।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की बड़ी युवा आबादी आने वाले वर्षों में देश के श्रम बाजार और आर्थिक विकास को प्रभावित करेगी।

प्रयागराज में राजनीतिक संदेश भी साफ

राहुल गांधी का प्रयागराज दौरा केवल युवाओं के साथ संवाद तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के आसपास राजनीतिक माहौल भी गर्म रहा। उनके कार्यक्रम से पहले प्रयागराज में ऐसे पोस्टर सामने आए जिनमें झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा गया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें झारखंड जाकर वहां आंदोलन कर रहे छात्रों से मिलना चाहिए था। रिजिजू की यह टिप्पणी कांग्रेस और भाजपा के बीच युवाओं के मुद्दों पर जारी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।

युवाओं की राजनीति: सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं

राहुल गांधी के भाषण का व्यापक राजनीतिक संदेश यह है कि युवा अब केवल चुनाव के समय संबोधित किया जाने वाला वर्ग नहीं है। रोजगार, परीक्षा प्रणाली, शिक्षा की लागत, तकनीकी बदलाव और आर्थिक अवसर जैसे मुद्दे लगातार सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन रहे हैं।

हाल के छात्र आंदोलनों ने भी दिखाया है कि भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं की नाराजगी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।

राहुल गांधी ने इसी व्यापक असंतोष को राजनीतिक विमर्श में जगह देने की कोशिश की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इन मुद्दों को केवल सरकार की आलोचना तक सीमित रखती है या युवाओं के लिए ठोस नीति और कार्यक्रम के रूप में भी सामने लाती है।