नई दिल्ली | न्यायपालिका एवं राष्ट्रीय डेस्क
संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लोकतंत्र की मूल भावना से जुड़ा बताते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत प्रदर्शन करना संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज या अत्यधिक बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग, लाठीचार्ज और अन्य कार्रवाई को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कहीं पुलिस द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया है, तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
अदालत ने कहा – प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था में होना चाहिए संतुलन
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि बड़े प्रदर्शनों से निपटने के लिए पूरे देश में एक समान पुलिस प्रोटोकॉल विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि नागरिकों के अधिकार और कानून-व्यवस्था—दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
पीठ ने कहा कि यदि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, तो केवल उसके आधार पर बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। वहीं यदि किसी स्थान पर हिंसा, असामाजिक तत्वों की मौजूदगी या कानून तोड़ने की घटनाएं होती हैं, तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।
पुलिस और प्रदर्शनकारी – दोनों की सुरक्षा पर जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि केवल प्रदर्शनकारियों की चोटें ही नहीं, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को लगी चोटें भी समान रूप से चिंता का विषय हैं। न्यायालय ने संकेत दिया कि मामले की समीक्षा समग्र दृष्टिकोण से की जाएगी और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
याचिकाओं में क्या मांग की गई?
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि संसद मार्च और अन्य स्थानों पर कथित पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई हो तथा भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए जाएं। कुछ याचिकाओं में घटनाओं से जुड़े वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की भी मांग की गई है।
हालिया घटनाओं की भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया। बिहार में एक प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा हथियार चलाने की घटना का भी अदालत के समक्ष जिक्र हुआ। इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आगे की सुनवाई पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह सभी संबंधित याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई करेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाले निर्देश न केवल मौजूदा विवाद, बल्कि भविष्य में देशभर में होने वाले सार्वजनिक प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के मानकों को भी प्रभावित कर सकते हैं। अदालत की टिप्पणियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और राज्य की कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।


