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पेट्रोल-डीजल फिर महंगा! 12 साल में कितना बढ़ा तेल का बोझ, अब आम आदमी की जेब पर नया वार

देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच तेल कंपनियों ने ईंधन दरों में बढ़ोतरी की है। नई कीमतों के लागू होने के बाद कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गई है, जबकि डीजल के दामों में भी उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिला है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 2014 से 2026 के बीच ईंधन की कीमतों में कई बार बड़े बदलाव हुए। कभी वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण राहत मिली, तो कभी टैक्स और आयात लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय हालात, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और परिवहन लागत बढ़ने से तेल कंपनियों पर दबाव बना हुआ है।

आर्थिक जानकार मानते हैं कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन महंगा होने से सब्जियों, दूध, अनाज और रोजमर्रा के सामान की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई दर पर इसका असर दिखाई दे सकता है।

सरकार की ओर से कहा गया है कि वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर राहत देने के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। हालांकि फिलहाल बढ़ी कीमतों ने मध्यम वर्ग और व्यापारिक समुदाय दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।