नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और इसका प्रभाव उत्तर, मध्य, पूर्व तथा पश्चिम भारत के कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आगामी दिनों में कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है। कई राज्यों में तेज हवाओं, आकाशीय बिजली और स्थानीय बाढ़ की चेतावनी भी जारी की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की सक्रियता के चलते उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के कई जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई का महीना कृषि गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है और इस समय होने वाली अच्छी बारिश खरीफ फसलों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।
किसानों के लिए राहत
देश की लगभग आधी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में मानसून की स्थिति का सीधा प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त वर्षा आवश्यक होती है। कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों के दौरान हुई बारिश के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर बुवाई कार्य शुरू कर दिया है।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई कृषि क्षेत्रों में किसानों ने उम्मीद जताई है कि यदि जुलाई और अगस्त में बारिश का यह क्रम जारी रहता है तो इस वर्ष उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
शहरों में बढ़ी परेशानी
जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश राहत लेकर आई है, वहीं कई बड़े शहरों में जलभराव और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज शहरीकरण और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के कारण हर वर्ष मानसून के दौरान महानगरों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर पानी भरने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है और कई स्थानों पर व्यवसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है।
नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि नालों की सफाई, जल निकासी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को प्राथमिकता दी जाए।
बिजली गिरने की घटनाओं पर चिंता
मौसम विभाग ने कई राज्यों में आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम कर रहे किसानों तथा खुले स्थानों पर मौजूद लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की अपील की है।
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
अच्छा मानसून केवल कृषि उत्पादन ही नहीं बढ़ाता, बल्कि ग्रामीण मांग, खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि इस वर्ष सामान्य से बेहतर वर्षा होती है तो खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे खाद्य महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण बाजारों में उपभोक्ता खर्च बढ़ने की संभावना भी रहेगी।
आगे क्या?
मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह तक मानसून सक्रिय बना रह सकता है। कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

