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भरतपुर बॉर्डर से राजस्थान में हुआ ‘गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान’ का आगाज़, भव्य स्वागत के साथ निकली कलश यात्रा

भरतपुर | राजस्थान डेस्क

संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के 650वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी ‘श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ की कलश यात्रा गुरुवार को राजस्थान में प्रवेश कर गई। उत्तर प्रदेश से भरतपुर जिले के ऊंचा नगला बॉर्डर पहुंची यात्रा का भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और संत समाज की उपस्थिति में पारंपरिक एवं भव्य स्वागत किया गया। अभियान का उद्देश्य संत रविदास के सामाजिक समरसता, समानता, सेवा और भेदभाव-मुक्त समाज के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना बताया गया है।

इस अवसर पर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, डीग-कुम्हेर विधायक डॉ. शैलेश दिगम्बर सिंह  सहित कई जनप्रतिनिधियों ने कलश पूजन किया और संत गुरु रविदास महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके विचारों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

वाराणसी से शुरू हुई है सात माह की राष्ट्रीय यात्रा

यह अभियान 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी स्थित सीर गोवर्धनपुर, संत गुरु रविदास महाराज की जन्मस्थली से प्रारंभ किया गया। अभियान के तहत उनकी जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी से पूजित कलश देश के विभिन्न राज्यों में ले जाए जा रहे हैं। यह कार्यक्रम अगले वर्ष 20 फरवरी 2027, संत रविदास जयंती तक विभिन्न चरणों में आयोजित होगा।

राजस्थान के गांव-गांव तक पहुंचेगा समरसता का संदेश

राजस्थान में प्रवेश के बाद यह कलश यात्रा प्रदेश के विभिन्न जिलों, गांवों और ढाणियों तक पहुंचेगी। यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता, सेवा, समान अवसर, सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि अभियान का उद्देश्य संत रविदास के विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना और सामाजिक एकता को मजबूत करना है।

ब्रज क्षेत्र बना अभियान का प्रवेश द्वार

उत्तर प्रदेश से सटे होने के कारण भरतपुर का ऊंचा नगला बॉर्डर इस यात्रा के लिए राजस्थान का प्रवेश द्वार बना। स्वागत समारोह में पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यकर्ताओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का अभिनंदन किया, जबकि संत समाज ने वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कलश यात्रा का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता और संत परंपरा के महत्व पर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

संत रविदास के विचार आज भी प्रासंगिक

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि संत गुरु रविदास ने सदियों पहले जाति, ऊंच-नीच और भेदभाव से मुक्त समाज की कल्पना प्रस्तुत की थी। उनका संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और मानव समानता का भी संदेश है। उन्होंने सेवा, सद्भाव और मानवता को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताया था। आज के समय में उनके विचार सामाजिक सौहार्द और समावेशी विकास के लिए पहले से अधिक प्रासंगिक हैं।

आने वाले महीनों तक जारी रहेगा अभियान

भाजपा के अनुसार यह समरसता संकल्प अभियान केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक जनसंपर्क कार्यक्रम भी है। आगामी महीनों में प्रदेशभर में कलश यात्रा, विचार गोष्ठियां, दीपोत्सव, सामाजिक संवाद और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से संत रविदास के जीवन, दर्शन और सामाजिक संदेश को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाएगा। अभियान अगले वर्ष संत रविदास जयंती तक देशभर में विभिन्न चरणों में जारी रहेगा।