देश विदेश

Shabana Azmi Protest: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में उतरीं शबाना आजमी, बोलीं- ‘वोट का अधिकार छीना तो आवाज उठाएंगे’

मुंबई: गांधी जयंती के दिन मुंबई का शिवाजी पार्क एक बड़े विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन में बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी भी पहुंचीं। उनके अलावा अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और संगीतकार-गायक विशाल ददलानी समेत कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी प्रदर्शन में मौजूदगी दर्ज कराई।

प्रदर्शन का मुद्दा केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा। आयोजकों ने Special Intensive Revision यानी SIR, मतदाता सूची और वोट देने के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए। शबाना आजमी ने भी अपने संबोधन में मतदान के अधिकार और नागरिकों के सवाल पूछने के हक पर जोर दिया।

‘सवाल पूछना हमारा अधिकार है’

शिवाजी पार्क में लोगों को संबोधित करते हुए शबाना आजमी ने कहा कि मतदान संविधान से मिला अधिकार है और नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक तरीके से सवाल पूछने की बात कही।

आजमी ने प्रदर्शन के दौरान मतदाता सूची में नाम नहीं होने की स्थिति को लेकर चिंता जताई। इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से इस प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी।

उनका संदेश मूल रूप से इस बात पर केंद्रित रहा कि अगर किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है तो वह अपने वोट के अधिकार को लेकर सवाल पूछ सकता है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकता है।

शबाना के साथ पहुंचे नसीरुद्दीन शाह और विशाल ददलानी

प्रदर्शन में फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी भी खास चर्चा में रही। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने शाह से मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वहीं विशाल ददलानी भी प्रदर्शन स्थल पहुंचे और दिपके के साथ नजर आए।

फिल्म जगत की इन हस्तियों की मौजूदगी ने प्रदर्शन को सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में भी चर्चा का विषय बना दिया। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में किसी व्यक्ति के पूरे राजनीतिक एजेंडे या CJP के हर दावे का समर्थन माना जाए, ऐसा निष्कर्ष अलग-अलग हस्तियों के सार्वजनिक बयानों के बिना निकालना उचित नहीं होगा।

CJP क्यों कर रही है ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग?

CJP नेता अभिजीत दिपके के नेतृत्व में संगठन ने SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया में ऐसे फैसले लिए गए जिनसे पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में कुछ मामलों में दोनों आयुक्तों द्वारा फैसलों को लेकर जानकारी और प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने की बात कही गई।

इन्हीं रिपोर्टों को आधार बनाकर CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तेज की है।

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

विवाद का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग ने अंदरूनी मतभेदों की खबरों के जवाब में कहा है कि आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और सदस्यों के बीच सुझाव, टिप्पणियां या अलग-अलग विचार निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं।

आयोग ने सितंबर में विशेष रूप से कहा था कि देशभर में SIR लागू करने से जुड़ा आदेश CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था। आयोग ने यह भी कहा था कि Form 6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

यानी प्रदर्शनकारियों के आरोप और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष फिलहाल एक-दूसरे से अलग हैं। इस विवाद के तथ्यात्मक और कानूनी पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

SIR को लेकर क्यों बढ़ी बहस?

SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची का पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड की जांच के साथ पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखने और नए पात्र मतदाताओं को शामिल करने से जुड़े कदम भी आते हैं।

हाल के दिनों में इसी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हुई है। चुनाव आयोग ने 2 अक्टूबर को एक विशेष अभियान के निर्देश भी दिए, जिसके तहत SIR के बाद सूची से छूट गए पात्र मतदाताओं और पहली बार मतदान के योग्य लोगों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना है। आयोग ने कहा कि पात्र नागरिक को केवल SIR प्रक्रिया के दौरान सूची में शामिल न हो पाने के कारण पंजीकरण के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

यही वजह है कि मतदाता सूची से जुड़े सवाल अब राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों के साथ-साथ सार्वजनिक हस्तियों के बीच भी चर्चा का विषय बन गए हैं।

मुंबई से आगे देशव्यापी आंदोलन की तैयारी

CJP ने मुंबई के शिवाजी पार्क से शुरू हुए इस आंदोलन को आगे दूसरे शहरों तक ले जाने की बात कही है। संगठन के मुताबिक गोवा और कोलकाता समेत कई जगहों पर प्रदर्शन की योजना है और आगे दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा कार्यक्रम करने की बात कही गई है।

मुंबई में प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग जुटे। नवभारत टाइम्स ने पुलिस की विशेष शाखा के हवाले से शाम करीब चार बजे तक 9,000 से 10,000 लोगों के जमा होने का अनुमान रिपोर्ट किया। हालांकि अलग-अलग स्रोतों में भीड़ के आंकड़े अलग-अलग बताए गए हैं, इसलिए इसे आधिकारिक अंतिम संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

बॉलीवुड की मौजूदगी ने बढ़ाया प्रदर्शन का असर

शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और विशाल ददलानी की मौजूदगी ने इस राजनीतिक प्रदर्शन को व्यापक सार्वजनिक चर्चा में ला दिया। खासतौर पर शबाना आजमी का संबोधन मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक तरीके से सवाल पूछने पर केंद्रित रहा।

अब इस आंदोलन की अगली दिशा पर नजर रहेगी। एक तरफ CJP और उसके समर्थक SIR तथा चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को संस्थागत और सर्वसम्मत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।