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सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में बुलडोजर एक्शन तेज, CM रेखा गुप्ता का आदेश – अवैध निर्माण पर होगी सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नगर निगम के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां भी निर्माण नियमों का उल्लंघन मिले, वहां नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर अवैध ढांचों को बुलडोजर से हटाने और उन्हें सील करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का फोकस केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। MCD ने राजधानी के कई हिस्सों में अभियान शुरू किया है। मंगलवार को अलग-अलग इलाकों में 17 इमारतों को ध्वस्त किए जाने और पांच संपत्तियों को सील करने की जानकारी सामने आई। इसके साथ ही कई संपत्ति मालिकों को कारण बताओ और ध्वस्तीकरण से जुड़े नोटिस भी जारी किए गए हैं।

सत्य निकेतन हादसे के बाद क्यों बढ़ी सख्ती?

सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। शुरुआती जांच में इमारत में अतिरिक्त निर्माण, मरम्मत कार्य और सुरक्षा मानकों से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों की नजर इस बात पर भी है कि निर्माण के दौरान नियमों का पालन हुआ था या नहीं और संबंधित विभागों की ओर से जरूरी निगरानी की गई थी या नहीं।

हादसे के बाद सरकार ने कार्रवाई के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिस अवैध निर्माण की पहचान हो, उसके रिकॉर्ड की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि निर्माण कब हुआ, किसके अधिकार क्षेत्र में हुआ और उस दौरान संबंधित विभाग के अधिकारी कौन थे।

इन इलाकों में पहुंचा MCD का बुलडोजर

MCD की कार्रवाई मंगलवार को सैदुलाजाब, लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, मुखर्जी नगर, जामिया नगर, शाहीन बाग, तिलक नगर, करमपुरा, करोलबाग, रमेश नगर, मानसरोवर गार्डन, चांदनी चौक और नेहरू विहार समेत कई इलाकों में हुई। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई उन संपत्तियों के खिलाफ की जा रही है जहां निर्माण नक्शे के अनुरूप नहीं पाया गया या निर्धारित मानकों का उल्लंघन सामने आया।

बिंदापुर और नेहरू विहार में भी निर्माणाधीन या कथित रूप से अनधिकृत ढांचों पर कार्रवाई की खबर सामने आई है। वहीं अमर उजाला के अनुसार सत्य निकेतन, शाहदरा और लक्ष्मी नगर सहित कई क्षेत्रों में MCD का अभियान जारी है।

सिर्फ बुलडोजर नहीं, रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को केवल मौके पर जाकर निर्माण गिराने के बजाय उसकी पूरी पृष्ठभूमि जांचने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संबंधित भवन का स्वीकृत नक्शा क्या था, निर्माण किस वर्ष हुआ और क्या बाद में अतिरिक्त मंजिल या अन्य निर्माण जोड़ा गया।

खास तौर पर उन इमारतों की पहचान की जा रही है जिनमें निर्धारित ऊंचाई या मंजिल संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ है। ऐसी संपत्तियों के खिलाफ नियमों के मुताबिक सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।

PG और हॉस्टल भी सरकार के रडार पर

सत्य निकेतन हादसे की पृष्ठभूमि में दिल्ली सरकार ने राजधानी के PG और हॉस्टल की भी व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को ऐसे परिसरों की जांच करने को कहा गया है जहां बड़ी संख्या में छात्र या अन्य लोग रहते हैं।

जांच में भवन की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण की मंजूरी, अतिरिक्त मंजिलों, अग्नि सुरक्षा और दूसरे जरूरी मानकों को देखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ अधिकारी जमीन पर मौजूद रहें और केवल कागजी कार्रवाई तक अभियान सीमित न रहे।

1 जून से अब तक सैकड़ों संपत्तियों पर कार्रवाई

MCD के आंकड़ों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, 1 जून से 31 अगस्त के बीच 959 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई और 456 संपत्तियों को सील किया गया। इसी अवधि में अनधिकृत निर्माण के संबंध में 1,461 कारण बताओ नोटिस और 687 ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए गए।

वहीं 1 से 8 सितंबर के बीच 48 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई और 15 संपत्तियों को सील किए जाने की जानकारी दी गई है। इसी अवधि में अनधिकृत निर्माण के लिए 90 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग से जुड़े 124 नोटिस और 66 ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए गए।

सवाल सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, निगरानी का भी

दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कोई नई बात नहीं है, लेकिन हर बड़े हादसे के बाद एक सवाल फिर सामने आता है—जब निर्माण नियमों का उल्लंघन लंबे समय तक होता रहता है तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी कब मिलती है?

सत्य निकेतन हादसे के बाद यही सवाल एक बार फिर चर्चा में है। सरकार ने जहां कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है, वहीं जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। अगर किसी इमारत में नियमों का उल्लंघन वर्षों से मौजूद था, तो यह भी देखा जाना जरूरी है कि उस पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

दिल्ली सरकार की मौजूदा कार्रवाई का असली असर इसी बात से तय होगा कि बुलडोजर चलने के बाद व्यवस्था में स्थायी सुधार कितना आता है। सिर्फ हादसे के बाद कुछ इमारतों को गिराना पर्याप्त नहीं होगा; निर्माण की मंजूरी, निरीक्षण और सुरक्षा नियमों के पालन की पूरी व्यवस्था को जवाबदेह बनाना भी उतना ही जरूरी है।

फिलहाल सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में MCD की जांच और फील्ड एक्शन से यह तस्वीर और साफ होगी कि कितनी इमारतें नियमों के दायरे से बाहर पाई जाती हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।