नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। राहुल गांधी ने मोदी सरकार की कूटनीति पर तंज कसते हुए विदेशी नेताओं से मुलाकात और उन्हें गले लगाने की शैली पर सवाल उठाए। इसके बाद बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया और उनकी टिप्पणी को अपरिपक्व तथा राजनीति के स्तर को गिराने वाला बताया।
राहुल गांधी ने विदेश नीति पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार की कूटनीति को महज विदेशी नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकातों और गर्मजोशी भरे व्यवहार तक सीमित करके देखा जा रहा है।
उनकी टिप्पणी में खास तौर पर चीन और भारत की विदेश नीति से जुड़े सवाल भी शामिल थे। राहुल गांधी का तंज मूल रूप से इस बात पर था कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आकलन केवल नेताओं के बीच व्यक्तिगत समीकरणों से नहीं, बल्कि रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों के आधार पर होना चाहिए।
राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार की विदेश नीति, चीन के साथ संबंधों और भारत की वैश्विक रणनीति को लेकर सवाल उठाती रही है।
बीजेपी ने क्यों खोला मोर्चा?
राहुल गांधी के बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने उन्हें निशाने पर ले लिया। बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी की उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि अब उन्हें राजनीतिक परिपक्वता दिखानी चाहिए।
बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया है। बांसुरी स्वराज ने दावा किया कि मोदी सरकार के दौर में भारत ने कई देशों के साथ अपने रणनीतिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत किए हैं।
‘स्टैंडअप कॉमेडियन’ वाला तंज
बीजेपी की ओर से राहुल गांधी पर व्यक्तिगत अंदाज में भी हमला किया गया। बांसुरी स्वराज ने उनकी टिप्पणी को लेकर उन्हें ‘फेल स्टैंडअप कॉमेडियन’ तक कह दिया।
बीजेपी का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर बैठे नेता से विदेश नीति जैसे गंभीर विषय पर ज्यादा तथ्यात्मक और जिम्मेदार बहस की अपेक्षा की जाती है। पार्टी नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री के विदेशी नेताओं के साथ व्यक्तिगत संपर्कों को मजाक का विषय बनाने के बजाय राहुल गांधी को भारत के रणनीतिक हितों पर अपनी वैकल्पिक नीति बतानी चाहिए।
निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी की तस्वीर से दिया जवाब
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी इस विवाद में सामने आए। उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की विदेशी नेताओं के साथ मुलाकातों की पुरानी तस्वीरें और वीडियो साझा किए।
दुबे का इशारा इस ओर था कि भारतीय प्रधानमंत्रियों का विदेशी नेताओं के साथ व्यक्तिगत संवाद और गर्मजोशी से मिलना भारतीय कूटनीतिक व्यवहार का हिस्सा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी से राजनीतिक परिपक्वता दिखाने का सवाल भी उठाया।
यानी बीजेपी ने राहुल गांधी के ‘हग डिप्लोमेसी’ वाले तंज का जवाब कांग्रेस के ही पुराने राजनीतिक इतिहास को सामने रखकर देने की कोशिश की।
मेलोनी का जिक्र विवाद को और बढ़ा गया
इस पूरे विवाद में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का संदर्भ भी चर्चा में आ गया है। राहुल गांधी के बयान और उससे जुड़े कांग्रेस के राजनीतिक विमर्श में प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच सार्वजनिक मुलाकातों का उल्लेख हुआ।
इसके बाद बीजेपी नेताओं ने इसे लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मेलोनी का संदर्भ लिया।
हालांकि, इस पूरे मामले को केवल व्यक्तिगत टिप्पणी के रूप में देखने के बजाय इसके राजनीतिक संदर्भ को समझना भी जरूरी है। मोदी और मेलोनी के बीच भारत-इटली संबंधों को लेकर आधिकारिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बैठकें हुई हैं।
भारत-इटली संबंधों में क्या है असली तस्वीर?
राहुल गांधी के बयान के राजनीतिक विवाद से अलग देखें तो भारत और इटली के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा है।
मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने भारत-इटली संबंधों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई थी। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, राजनीतिक संवाद और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
यही वजह है कि मेलोनी का नाम केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है; भारत-इटली संबंधों में दोनों सरकारों के बीच संस्थागत स्तर पर भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
असली राजनीतिक लड़ाई विदेश नीति की नैरेटिव पर
इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि विदेश नीति को लेकर सरकार और विपक्ष की राजनीतिक नैरेटिव अलग-अलग है।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की विदेश नीति में व्यक्तिगत नेतृत्व और सार्वजनिक छवि को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जाता है। पार्टी चीन जैसे रणनीतिक मुद्दों पर सरकार से ज्यादा स्पष्ट जवाब मांगती रही है।
वहीं बीजेपी का कहना है कि मोदी सरकार ने भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है और प्रधानमंत्री की विदेशी नेताओं के साथ व्यक्तिगत कूटनीति भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने का माध्यम बनी है।
इसलिए ‘हग डिप्लोमेसी’ पर शुरू हुई बहस वास्तव में मोदी की विदेश नीति के मॉडल बनाम कांग्रेस की विदेश नीति संबंधी आलोचना की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है।
सोशल मीडिया से संसद तक पहुंचा राजनीतिक वार-पलटवार
राहुल गांधी और बीजेपी के बीच यह ताजा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के मानसून सत्र और दूसरे राजनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों में पहले से तीखी बयानबाजी चल रही है।
राहुल गांधी लगातार सरकार को चीन, अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं जैसे मुद्दों पर घेर रहे हैं। दूसरी तरफ बीजेपी उनके बयानों को राजनीतिक रूप से गैर-जिम्मेदार और तथ्यहीन बताकर जवाब दे रही है।
इस तरह एक बयान से शुरू हुआ विवाद अब विदेश नीति, प्रधानमंत्री की कूटनीतिक शैली और विपक्ष की राजनीतिक भाषा—तीनों पर बहस में बदल गया है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि भारत की विदेश नीति का मूल्यांकन नेताओं की व्यक्तिगत कूटनीति से किया जाना चाहिए या ठोस रणनीतिक परिणामों से।
कांग्रेस जहां चीन और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रही है, वहीं बीजेपी प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और द्विपक्षीय संबंधों को अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है।
फिलहाल इतना तय है कि ‘हग डिप्लोमेसी’ पर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर विदेश नीति की बड़ी बहस का रूप ले सकता है।


