नई दिल्ली | संसद डेस्क
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ी सफलता मिली है। लोकसभा ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून संगठित पेपर लीक गिरोहों, परीक्षा माफिया और तकनीकी धोखाधड़ी पर कड़ा शिकंजा कसने के लिए लाया गया है। वहीं, विपक्ष ने विधेयक का विरोध करते हुए सरकार पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी और हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।
क्या हैं नए कानून की प्रमुख विशेषताएं?
संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए पहले से अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
- पेपर लीक या संगठित परीक्षा धोखाधड़ी में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद।
- व्यक्तिगत अपराधियों पर ₹50 लाख तक जुर्माना।
- संगठित नेटवर्क, संस्थानों या कंपनियों पर ₹10 करोड़ तक का आर्थिक दंड।
- राज्यों में फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से मामलों का त्वरित निपटारा।
- जांच एजेंसियों के लिए समयबद्ध जांच प्रक्रिया और परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के अतिरिक्त प्रावधान।
संसद में सरकार और विपक्ष आमने-सामने
विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे करोड़ों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए “ऐतिहासिक और आवश्यक कानून” बताया।
दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि केवल सख्त कानून बना देने से पेपर लीक की समस्या समाप्त नहीं होगी। विपक्ष का तर्क था कि परीक्षा प्रणाली में प्रशासनिक सुधार, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी सदन में जोरदार ढंग से उठाया गया।
राहुल गांधी ने उठाए छात्रों के मुद्दे
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बहस के दौरान छात्रों के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगा और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए केवल कानून नहीं, बल्कि प्रभावी प्रशासनिक सुधार भी जरूरी हैं।
सरकार का जवाब
सरकार की ओर से कहा गया कि यह संशोधन विधेयक परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का दावा है कि पहली बार संगठित परीक्षा माफिया के खिलाफ इतने कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
अब आगे क्या होगा?
लोकसभा से पारित होने के बाद विधेयक को अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कठोर दंड व्यवस्था एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता परीक्षा संचालन, डिजिटल सुरक्षा, संस्थागत जवाबदेही और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।


