मुंबई | एंटरटेनमेंट डेस्क
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं, जिनकी लोकप्रियता समय के साथ कम होने के बजाय और बढ़ती जाती है। ऐसा ही एक गीत है “चढ़ गयो पापी बिछुआ”, जिसने करीब 68 साल पहले रिलीज़ होने के बावजूद आज भी अपनी अलग पहचान बनाए रखी है। फिल्म मधुमती का यह लोकधुन पर आधारित गीत न केवल लता मंगेशकर की सशक्त गायकी का उदाहरण है, बल्कि अभिनेत्री वैजयंतीमाला के जीवंत नृत्य और अभिव्यक्ति ने भी इसे अमर बना दिया।
लोकसंगीत से निकला, सिनेमा का क्लासिक बना
साल 1958 में रिलीज़ हुई फिल्म मधुमती अपने संगीत और कहानी के लिए आज भी याद की जाती है। फिल्म का संगीत महान संगीतकार सलिल चौधरी ने तैयार किया था, जबकि गीतकार शैलेन्द्र के बोलों ने लोक संस्कृति की सादगी और ऊर्जा को खूबसूरती से शब्द दिए। “चढ़ गयो पापी बिछुआ” इसी कड़ी का ऐसा गीत था, जिसने ग्रामीण लोकधुन को मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा तक पहुंचाया।
लता मंगेशकर की आवाज़ बनी सबसे बड़ी ताकत
गीत को अपनी आवाज़ दी भारत रत्न लता मंगेशकर ने। उनकी सहज, चुलबुली और लोकशैली के अनुरूप गायकी ने इस गीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। संगीत समीक्षकों का मानना है कि इस गीत में लता मंगेशकर ने शास्त्रीय अनुशासन और लोकगायन की सरलता का अनूठा संतुलन प्रस्तुत किया, जो आज भी श्रोताओं को आकर्षित करता है।
वैजयंतीमाला का नृत्य बना पहचान
गीत की सफलता में अभिनेत्री वैजयंतीमाला की भूमिका भी बेहद अहम रही। उनके भावपूर्ण नृत्य, चेहरे के हाव-भाव और पारंपरिक प्रस्तुति ने गीत को केवल सुनने योग्य नहीं, बल्कि देखने योग्य भी बना दिया। यही वजह है कि यह गीत भारतीय फिल्म इतिहास के सर्वश्रेष्ठ डांस नंबरों में शामिल किया जाता है।
समय बदला, लेकिन लोकप्रियता नहीं
आज डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के दौर में भी यह गीत लगातार नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है। पुराने फिल्मी गीतों की प्लेलिस्ट, रियलिटी शो, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोकनृत्य प्रस्तुतियों में “चढ़ गयो पापी बिछुआ” आज भी समान उत्साह के साथ सुनाई देता है। यह गीत इस बात का प्रमाण है कि अच्छी धुन, उत्कृष्ट गायकी और प्रभावशाली प्रस्तुति समय की सीमाओं से परे होती है।
भारतीय संगीत विरासत की अमूल्य धरोहर
संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमती का संगीत हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर का प्रतिनिधित्व करता है। “चढ़ गयो पापी बिछुआ” केवल एक मनोरंजक गीत नहीं, बल्कि भारतीय लोकसंगीत और फिल्म संगीत के सफल संगम का उदाहरण भी है। यही कारण है कि छह दशक से अधिक समय बाद भी यह गीत श्रोताओं के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है।


