देश विदेश

‘वह 90% खत्म हो चुका है’… ट्रंप का ईरान पर बड़ा दावा, मोजतबा खामेनेई को लेकर बयान से बढ़ा वैश्विक तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान | विशेष संवाददाता

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि मोजतबा खामेनेई “90 प्रतिशत खत्म हो चुके हैं” और ईरान की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था गंभीर दबाव में है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।

ट्रंप ने क्या कहा?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और बढ़ते दबाव का असर ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की वर्तमान स्थिति पहले जैसी नहीं रही और वहां की सत्ता संरचना कमजोर पड़ रही है। हालांकि ट्रंप ने अपने दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक खुफिया या आधिकारिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

ईरान की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं

रिपोर्ट लिखे जाने तक ईरान की सरकार या सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से ट्रंप के इस विशेष बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के नेताओं की बयानबाजी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

क्यों अहम है यह बयान?

विश्लेषकों के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य अभियानों, परमाणु कार्यक्रम और खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच कई दौर की तीखी बयानबाजी हो चुकी है। ऐसे माहौल में ट्रंप का यह बयान केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

वैश्विक समुदाय की नजर

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य तनाव इसी तरह जारी रहा, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसके व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं।

फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान की अगली आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बयान केवल राजनीतिक संदेश साबित होता है या दोनों देशों के संबंधों में नई कड़वाहट का कारण बनता है।