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दिल्ली हाईकोर्ट से CJP को बड़ी राहत: X अकाउंट बहाल करने का आदेश, कोर्ट बोला -अब रोक की वजह खत्म हो चुकी है

नई दिल्ली | 7 जुलाई 2026

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अकाउंट को बहाल करने का आदेश देते हुए केंद्र सरकार के पहले जारी किए गए ब्लॉकिंग आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि जिस उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई थी, वह अब समाप्त हो चुका है, इसलिए अकाउंट पर लगी रोक जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।

NEET री-टेस्ट के दौरान लगाया गया था प्रतिबंध

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मई में CJP के X अकाउंट को इसलिए ब्लॉक किया गया था ताकि NEET री-टेस्ट से पहले छात्रों और अभिभावकों के बीच किसी तरह का भ्रम या अव्यवस्था पैदा न हो। सरकार का कहना था कि उस समय सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया था।

हालांकि, अदालत ने कहा कि अब परीक्षा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जिन परिस्थितियों के आधार पर अकाउंट को रोका गया था, वे अब मौजूद नहीं हैं। ऐसे में ब्लॉकिंग आदेश को जारी रखना उचित नहीं होगा।

संस्थापक ने दी थी कानूनी चुनौती

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका पक्ष था कि पूरे अकाउंट को ब्लॉक करने के बजाय यदि किसी विशेष पोस्ट पर आपत्ति थी, तो केवल उसी सामग्री पर कार्रवाई की जा सकती थी।

याचिका में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पर व्यंग्य और राजनीतिक अभिव्यक्ति संविधान के तहत संरक्षित अधिकारों का हिस्सा हैं और किसी भी प्रतिबंध की प्रक्रिया कानून के अनुरूप तथा पारदर्शी होनी चाहिए।

अदालत ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सरकार की मूल चिंता NEET री-टेस्ट से जुड़ी थी। चूंकि वह परीक्षा अब संपन्न हो चुकी है, इसलिए उस आधार पर अकाउंट को ब्लॉक रखने का कारण समाप्त हो गया है।

इसी आधार पर अदालत ने ब्लॉकिंग आदेश वापस लेते हुए CJP के मूल X अकाउंट को तत्काल प्रभाव से बहाल करने का निर्देश दिया। आदेश के बाद संबंधित अकाउंट दोबारा सक्रिय हो गया।

डिजिटल अभिव्यक्ति बनाम सरकारी नियंत्रण

यह फैसला केवल एक सोशल मीडिया अकाउंट तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे डिजिटल अभिव्यक्ति और सरकारी नियामक शक्तियों के बीच संतुलन से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में भी देखा जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि यदि किसी प्रतिबंध का आधार समाप्त हो जाए, तो उसकी निरंतरता का स्वतंत्र रूप से परीक्षण किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने इस मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर व्यापक संवैधानिक टिप्पणी करने के बजाय उपलब्ध परिस्थितियों के आधार पर निर्णय दिया।

आगे क्या?

फिलहाल CJP का X अकाउंट बहाल हो चुका है। यह फैसला भविष्य में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाए जाने वाले अस्थायी प्रतिबंधों और उनकी न्यायिक समीक्षा से जुड़े मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ माना जा सकता है।

हालांकि, यदि भविष्य में किसी नए आधार पर कार्रवाई की आवश्यकता महसूस होती है, तो संबंधित प्राधिकरण कानून के अनुसार अलग से निर्णय ले सकते हैं।