जयपुर। राजस्थान के सरकारी हॉस्पिटल से जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म हो चुका है, जिससे मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल समेत कोटा, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर आदि शहरों के सरकारी हॉस्पिटल में बीपी, शुगर, कैंसर, हेपेटाइटिस-बी की दवा-इंजेक्शन, खून पतला करने की दवा समेत बच्चों की खांसी–बुखार की सिरप तक उपलब्ध नहीं है। दवाओं की सप्लाई नहीं होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है। खबरों के मुताबिक जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में 40 से ज्यादा दवाइयां पिछले कई दिनों से उपलब्ध नहीं हैं। कोटा में 300 दवाइयों का स्टॉक नहीं है। जोधपुर के मथुरा दास और महात्मा गांधी हॉस्पिटल में भी यही स्थिति है।
डीडीसी काउंटर पर इंजेक्शन की अनुपलब्धता के कारण रोजाना 250 से ज्यादा मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एंडोक्राइन विभाग में हर रोज 250 से ज्यादा मरीज ओपीडी में आ रहे हैं, जिनमें से 80% को डायबिटीज टाइप-1 है। इन मरीजों को रोज दो बार, और गंभीर मरीजों को चार बार इंसुलिन इंजेक्शन लेना पड़ता है। जनरल मेडिसिन विभाग में बुजुर्ग और अन्य मरीजों को भी हॉस्पिटल से दवाइयां नहीं मिल रही हैं। एस्पार्ट, डेग्लुडेक, ग्लार्जिन जैसे जरूरी इंसुलिन इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। इनकी खरीद एसएमएस के सेंट्रल ड्रग डिपार्टमेंट से नहीं हो रही।
जो दवाइयां डीडीसी काउंटर पर नहीं मिलतीं, वे स्थानीय स्तर पर खरीदी जाती हैं, लेकिन यह व्यवस्था भी लंबे समय से प्रभावित है। एसएमएस हॉस्पिटल प्रशासन ने अलग से डीडीसी सेंटर 10-11 बनाया है, जहां मरीजों से पर्ची और आधार कार्ड की कॉपी लेने के बाद 2 से 7 दिन बाद आने को कहा जाता है। जोधपुर के सरकारी हॉस्पिटल में भी दवाओं की भारी कमी है। सरकारी स्तर पर सप्लाई होने वाली दवाओं में से कई जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को लाखों की दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आरएमएससीएल समय-समय पर दवाओं की आपूर्ति करता है। जो दवाएं उपलब्ध नहीं होतीं, उनके लिए अनुपलब्धता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है और सहकारी समितियों से दवा ली जाती है। यदि वहां भी उपलब्ध नहीं होतीं, तो अधिकृत सप्लायर्स से मंगवाई जाती हैं। अत्यावश्यक मामलों में बाजार से खरीदने का भी विकल्प अपनाया जाता है।
कोटा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में पिछले छह महीने से सरकारी दवाओं की सप्लाई नहीं हो रही है। कोटा मेडिकल कॉलेज के ड्रग वेयर हाउस में 1585 दवाओं की मांग भेजी गई, लेकिन केवल 1296 दवाओं की सप्लाई हो रही है। कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े हॉस्पिटल में ब्लड प्रेशर, शुगर, ब्लड ग्रुपिंग सिरम, इंफेक्शन और आई ड्रॉप जैसी जरूरी दवाओं की सप्लाई भी नहीं हो रही है।
अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल में 1800 दवाएं उपलब्ध होने का दावा किया गया, लेकिन पड़ताल में पता चला कि खून पतला करने वाली, कोलेस्ट्रॉल कम करने की, शुगर कंट्रोल, मल्टीविटामिन सिरप, बच्चों के लिए बुखार की पैरासिटामोल सिरप, आईब्रोफिन सिरप जैसी जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल में छह महीने से बीपी-शुगर की दवाओं की कमी है। निशुल्क दवा वितरण के 25 काउंटरों पर जरूरी दवाइयां नहीं मिल रही हैं, जिससे मरीज परेशान हैं।
मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस प्रभारी के अनुसार, कोटा मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस हर साल 1585 दवाओं की मांग करता है, लेकिन फिलहाल 1296 दवाएं ही सप्लाई में हैं। जब डीडीसी काउंटर से मांग आती है, तो उपलब्ध दवा भेज दी जाती है, अन्यथा एनओसी जारी कर लोकल स्तर पर खरीदी जाती है।
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