नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की उस उड़ान में क्या हुआ था, इसकी तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ हो रही है। कॉकपिट में सह-पायलट के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कॉल पर बातचीत के दौरान उस खौफनाक घटना के बारे में बताया। अस्पताल से हुई इस बातचीत में स्मित ने बताया कि वह खुद बुरी तरह घायल हो चुके थे, लेकिन उन्हें लगातार यह एहसास हो रहा था कि अगर उन्होंने कुछ नहीं किया तो विमान में सवार दूसरे लोगों की जान खतरे में पड़ जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्मित के साहस, सूझबूझ और मुश्किल परिस्थिति में संयम बनाए रखने की तारीफ की। बातचीत के दौरान स्मित भावुक भी हुए और उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि उनसे बात करना उनके लिए बेहद खास पल है।
‘मैं लोगों को मरने नहीं दे सकता था…’
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में कैप्टन स्मित ने बताया कि हमले के बाद वह बुरी तरह घायल होकर जमीन पर गिर गए थे। उस समय उन्हें अपनी जिंदगी और विमान में मौजूद यात्रियों—दोनों की चिंता थी।
उन्होंने बताया कि वह विमान उड़ाने के लंबे अनुभव के कारण यह समझ पा रहे थे कि हालात किस दिशा में जा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने खुद को दोबारा खड़ा किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। दरवाजा खुलने के बाद यात्रियों और विमान में मौजूद दूसरे पायलटों को अंदर आने और हमलावर को काबू करने का मौका मिला।
स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चिंता यही थी कि विमान में मौजूद लोगों को कुछ नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, वह अपनी जान बचाने के लिए भी लड़ रहे थे, लेकिन उन्हें यह भी पता था कि अगर उन्होंने हार मान ली तो बाकी यात्रियों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
मुश्किल वक्त में पढ़ रहे थे हनुमान चालीसा
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्मित से यह भी पूछा कि इतनी मुश्किल परिस्थिति में उन्हें हिम्मत कहां से मिली।
स्मित ने बताया कि जब भी वह मुश्किल या दर्द में होते हैं, तो हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। उस समय भी वह लगातार हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। उन्होंने इसे अपने लिए मुश्किल घड़ी में मानसिक सहारे के तौर पर बताया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत में स्मित ने इस घटना के दौरान भगवान हनुमान का भी जिक्र किया और अपनी भावनाएं प्रधानमंत्री के साथ साझा कीं।
‘स्मित, मैं बस एक कॉल दूर हूं…’
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पूरा देश उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है और भारत को उनकी बहादुरी पर गर्व है।
मोदी ने उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि जरूरत पड़ने पर वह उनसे संपर्क कर सकते हैं। इस बातचीत के दौरान स्मित भावुक हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना आदर्श बताते हुए कहा कि उनसे बात करना उनके लिए गर्व और बेहद खास अनुभव है।
प्रधानमंत्री ने स्मित की मां और उनके संस्कारों का भी जिक्र किया। बातचीत का यह हिस्सा भावनात्मक रहा, क्योंकि कुछ ही समय पहले स्मित अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे और अब वह सीधे देश के प्रधानमंत्री से बात कर रहे थे।
आखिर फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुआ क्या था?
यह पूरी घटना 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई थी। विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था और इसमें 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर हमला कर दिया।
घटना के बाद विमान की ऊंचाई में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार विमान कुछ ही समय में हजारों फीट नीचे आ गया। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी आपात लैंडिंग कराई गई।
स्मित मच्छार हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें शुरुआती इलाज के बाद सऊदी अरब से अबू धाबी ले जाया गया, जहां उनका आगे इलाज चल रहा है।
कॉकपिट का दरवाजा खोलना बना निर्णायक पल
इस घटना में सबसे अहम क्षण वह माना जा रहा है, जब घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, इसके बाद यात्रियों और विमान में मौजूद अन्य पायलटों को स्थिति संभालने का मौका मिला। विमान में मौजूद रिजर्व/पोजिशनिंग पायलट ने भी विमान को नियंत्रित करने में भूमिका निभाई और आखिरकार उड़ान को सुरक्षित तरीके से तबुक में उतारा गया।
घटना की जांच अभी जारी है। हमले के पीछे की पूरी वजह और सह-पायलट की मंशा को लेकर संबंधित एजेंसियां जांच कर रही हैं। इसलिए घटना के मकसद को लेकर सामने आए सभी दावों को जांच पूरी होने तक सावधानी से देखना जरूरी है।
स्मित की बहादुरी की हो रही दुनिया भर में चर्चा
घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई। भारत के अलावा इजराइल और अन्य देशों के नेताओं ने भी उनके साहस की सराहना की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी सार्वजनिक रूप से स्मित के धैर्य और सूझबूझ की तारीफ की। उनके साथ हुई बातचीत में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि संकट के समय स्मित ने जिस तरह निर्णय लिया, वह असाधारण साहस का उदाहरण है।
लेकिन स्मित की अपनी बात शायद इस पूरी कहानी को सबसे सरल तरीके से समझाती है—उस वक्त उनके सामने सिर्फ अपनी जान बचाने का सवाल नहीं था। कॉकपिट में घायल पड़े होने के बावजूद उन्हें पता था कि उनके फैसले का असर विमान में बैठे हर व्यक्ति की जिंदगी पर पड़ सकता है।
फिलहाल कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज जारी है और देश उनके जल्द स्वस्थ होकर वापस लौटने का इंतजार कर रहा है।


