नई दिल्ली: दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने कूटनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। औपचारिक बातचीत और बैठकों के बीच दोनों नेताओं का एक ही कार में सफर करना चर्चा का खास विषय बन गया। दिल्ली में यह दृश्य ऐसे समय सामने आया है जब भारत BRICS की मेजबानी कर रहा है और वैश्विक राजनीति यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष और बदलते व्यापारिक समीकरणों के बीच नए संतुलन से गुजर रही है।
दोनों नेताओं का साथ कार में जाना पहली बार नहीं है। अगस्त के आखिर में बिश्केक में SCO सम्मेलन के दौरान भी मोदी और पुतिन ने एक साथ कार में सफर किया था। इसके बाद दिल्ली में दोबारा ऐसा दृश्य सामने आने से भारत-रूस रिश्तों में दोनों नेताओं की व्यक्तिगत सहजता और संवाद की शैली पर चर्चा शुरू हो गई है।
बैठक से पहले ही दिखी दोस्ती की तस्वीर
पुतिन शुक्रवार को BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति के बीच मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल और लोगों के बीच संपर्क समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत बहुपक्षीय सहयोग पर भी विचार साझा किए।
दिल्ली में दोनों नेताओं का एक साथ कार में जाना इसी व्यापक मुलाकात के बीच हुआ। बाद में दोनों ने रूस की औद्योगिक प्रदर्शनी INNOPROM India का भी दौरा किया और वहां मौजूद प्रतिभागियों से बातचीत की। भारत में पहली बार आयोजित इस प्रदर्शनी को दोनों देशों के औद्योगिक और व्यापारिक रिश्तों को विस्तार देने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।
‘कार डिप्लोमेसी’ आखिर है क्या?
कूटनीति में नेताओं की औपचारिक बैठकें आम तौर पर तय एजेंडे और प्रोटोकॉल के मुताबिक होती हैं। लेकिन किसी कार्यक्रम स्थल तक साथ यात्रा करना अपेक्षाकृत अनौपचारिक माहौल उपलब्ध करा सकता है। इसी वजह से मोदी और पुतिन के साझा कार सफर को मीडिया में ‘कार डिप्लोमेसी’ कहा जा रहा है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि कार में हुई बातचीत का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए यह दावा करना उचित नहीं होगा कि दोनों नेताओं ने गाड़ी में किन-किन मुद्दों पर बात की। लेकिन तस्वीर और सार्वजनिक कार्यक्रम यह जरूर दिखाते हैं कि दोनों नेताओं के बीच संवाद का एक सहज और अनौपचारिक पक्ष मौजूद है।
सिर्फ दोस्ती नहीं, रिश्तों का रणनीतिक पक्ष भी अहम
मोदी-पुतिन की मुलाकात को केवल व्यक्तिगत गर्मजोशी के नजरिए से देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। भारत और रूस के रिश्ते रक्षा से लेकर ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार तक कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की और विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह साझेदारी ऐसे समय में भी जारी है जब वैश्विक राजनीति में रूस को लेकर पश्चिमी देशों का रुख काफी सख्त है।
रूस भारत के लिए ऊर्जा और रक्षा का महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। वहीं मॉस्को के लिए भारत एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार को आगे बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं। Reuters के मुताबिक भारत और रूस 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को करीब 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।
रक्षा सहयोग पर भी नजर
पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग भी अहम विषयों में शामिल है। इससे पहले कई रिपोर्टों में S-400 प्रणाली, ब्रह्मोस और भविष्य के रक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों की संभावित चर्चा का जिक्र किया गया था। हालांकि किसी विशेष नई रक्षा डील को लेकर आधिकारिक घोषणा को अलग से देखना होगा।
यानी BRICS सम्मेलन से पहले मोदी-पुतिन की मुलाकात सिर्फ औपचारिक अभिवादन तक सीमित नहीं है। इसके पीछे लंबे समय से चले आ रहे रक्षा और रणनीतिक रिश्तों के साथ-साथ ऊर्जा, व्यापार और नई तकनीक में सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश भी दिखाई देती है।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया का मुद्दा भी अहम
भारत और रूस के बीच बातचीत ऐसे वक्त हुई है जब यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों का वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन पर असर पड़ रहा है।
भारत ने लगातार संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार साझा किए। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों से समुद्री व्यापार तथा भारतीय नाविकों की सुरक्षा प्रभावित हुई है।
यह भारत की उस विदेश नीति की तस्वीर भी पेश करता है जिसमें नई दिल्ली एक तरफ रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक रिश्तों को कायम रख रही है और दूसरी तरफ अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों तथा अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ भी अपने संबंधों को संतुलित कर रही है।
BRICS की बड़ी बैठक से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह मुलाकात?
दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन में रूस के अलावा चीन और ईरान समेत कई महत्वपूर्ण देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। ऐसे में मोदी-पुतिन की मुलाकात का महत्व द्विपक्षीय रिश्तों से आगे बढ़कर BRICS की राजनीति तक जाता है।
भारत इस बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया में युद्ध, व्यापारिक तनाव और बदलते शक्ति-संतुलन ने बहुपक्षीय मंचों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। भारत के लिए चुनौती यह भी है कि वह BRICS के भीतर अलग-अलग देशों के हितों के बीच संतुलन कायम रखते हुए विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से सामने रखे।
तिरुक्कुरल की भेंट ने भी खींचा ध्यान
मोदी और पुतिन की मुलाकात में कूटनीतिक संदेशों के साथ सांस्कृतिक पक्ष भी नजर आया। प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को प्राचीन तमिल कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। यह उपहार भारत-रूस रिश्तों में सांस्कृतिक संपर्क को रेखांकित करने वाला प्रतीक माना जा रहा है।
यानी दिल्ली में मोदी-पुतिन की मुलाकात में एक तरफ रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे कठोर रणनीतिक मुद्दे हैं, तो दूसरी तरफ संस्कृति और व्यक्तिगत संबंधों की सहजता भी दिखाई देती है।
तस्वीर छोटी, संदेश बड़ा
मोदी और पुतिन का एक कार में बैठकर कुछ दूरी तक साथ जाना भले ही कुछ मिनटों का घटनाक्रम हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ऐसे दृश्य अक्सर अपनी अलग कहानी कहते हैं। खासकर तब, जब यह मुलाकात एक बड़े बहुपक्षीय सम्मेलन से ठीक पहले हो और दोनों देशों के संबंध वैश्विक दबावों के बीच भी लगातार बने हुए हों।
हालांकि किसी भी कूटनीतिक तस्वीर को उसके वास्तविक संदर्भ से अलग करके देखना ठीक नहीं होगा। भारत-रूस संबंधों की असली दिशा बैठकों में तय होने वाले फैसलों, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग के ठोस परिणामों से तय होगी।
फिलहाल दिल्ली से आई मोदी-पुतिन की यह तस्वीर इतना जरूर बताती है कि BRICS की बड़ी कूटनीतिक बैठक शुरू होने से पहले भारत और रूस ने अपनी पुरानी रणनीतिक साझेदारी की गर्माहट दुनिया को जरूर दिखाई है।


