तेहरान/वॉशिंगटन | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि अमेरिका में 9/11 जैसे हमले की साजिश रचकर उसका दोष ईरान पर मढ़ने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक और स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही बाधित करने की किसी भी कोशिश पर कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है।
ईरान ने क्या दावा किया?
ईरान के वरिष्ठ नेता और सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें ऐसा घटनाक्रम पैदा करने की कोशिश कर सकती हैं, जिससे अमेरिका में बड़े आतंकी हमले जैसा माहौल बने और उसका दोष तेहरान पर डाला जाए। ईरानी पक्ष का कहना है कि ऐसे किसी भी घटनाक्रम को लेकर दुनिया को सतर्क रहना चाहिए।
हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिका की ओर से भी इस आरोप की पुष्टि या स्वीकारोक्ति नहीं की गई है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा तनाव बिंदु
विवाद का केंद्र इस समय होरमुज़ जलडमरूमध्य है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।
ट्रंप का सख्त संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि यदि ईरान या उसके सहयोगी होरमुज़ में किसी व्यापारी जहाज पर हमला करते हैं या समुद्री मार्ग बाधित करते हैं, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ऐसी किसी भी कार्रवाई के जवाब में ईरान के रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य में सैन्य टकराव बढ़ता है, तो इसका प्रभाव केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। हाल के दिनों में लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों पर भी सुरक्षा संबंधी घटनाएं सामने आई हैं, जिससे चिंता और बढ़ी है।
कूटनीतिक समाधान की उम्मीद
तनाव के बीच कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य बयानबाजी बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर ऊर्जा बाजार, पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहेगी।


